फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में कॉकपिट पर हुए हमले के बाद कॉकपिट के बाहर बैठे दो पायलटों ने फ्लाइट को सुरक्षित लैंड करवाया. जब प्लेन को सुरक्षित लैंड कराया गया तो लोगों के मन में एक सवाल जरूर उठा कि आखिर वो दो पायलट कौन थे, जिन्होंने संकट के समय विमान को संभाला? क्या हर फ्लाइट में दो पायलट एक्स्ट्रा चलते हैं? अगर नहीं, तो ये दोनों उस विमान में क्या कर रहे थे? क्या वे आम यात्रियों की तरह सफर कर रहे थे या एयरलाइन ने उन्हें किसी खास वजह से विमान में रखा था?
बता दें कि ये दोनों पायलट उस फ्लाइट के आधिकारिक ऑपरेटिंग क्रू का हिस्सा नहीं थे. कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि वे प्लेन में 'डेडहेडिंग' कर रहे थे. इस बारे में विमान में सवार एक यात्री डैनियल श्लिक्टर ने समाचार एजेंसी एपी को पूरी जानकारी दी. विमान की दूसरी पंक्ति में बैठे श्लिक्टर ने बताया कि हर फ्लाइट में दो अतिरिक्त पायलट नहीं होते. यात्री ने इसे संयोग बताते हुए कहा कि यही वजह थी कि संकट के समय विमान में दो और प्रशिक्षित पायलट मौजूद थे. अगर वे उस फ्लाइट में नहीं होते तो स्थिति अलग हो सकती थी.
ये तो समझ आ गया कि वो पायलट क्रू का हिस्सा नहीं थे और सिर्फ दो पायलट पर ही फ्लाइट को उड़ाने की जिम्मेदारी थी, जिसमें स्मित मच्छार और ओमान के पायलट शामिल थे. अब सवाल है कि ये डेडहेडिंग है क्या, जिसकी वजह से वो फ्लाइट में बैठे थे.
आखिर डेडहेडिंग क्या होती है?
एविएशन की भाषा में हेडहेडिंग का मतलब होता है कि किसी एयरलाइन का पायलट या अन्य क्रू मेंबर अपनी ड्यूटी के लिए किसी दूसरी जगह जा रहा है, लेकिन जिस विमान में वह यात्रा कर रहा है, उसे ऑपरेट नहीं कर रहा. यानी वे अपनी ड्यूटी के सिलसिले में एक जगह से दूसरी जगह जा रहे हैं, लेकिन जिस फ्लाइट में बैठे हैं, उसे उड़ाने की उनकी जिम्मेदारी नहीं है.
इसे एक आसान उदाहरण से समझिए. मान लीजिए किसी पायलट की अगली ड्यूटी मुंबई से शुरू होनी है, लेकिन वह उस समय दिल्ली में है. एयरलाइन उसे दिल्ली से मुंबई पहुंचाने के लिए किसी फ्लाइट में सीट दे सकती है. वह उस फ्लाइट में यात्री की तरह बैठेगा, लेकिन मुंबई पहुंचने के बाद दूसरी फ्लाइट में उसकी ड्यूटी होगी.
बताया जा रहा है कि इस स्थिति में दोनों पायलट इसलिए विमान में थे क्योंकि उन्हें तेल अवीव पहुंचने के बाद तेल अवीव से दुबई वापस आने वाली फ्लाइट उड़ानी थी. इसलिए वे दुबई से तेल अवीव जाने वाली FZ1073 में सवार हुए थे.
यानी वह यात्री है, लेकिन आम यात्री नहीं. वो एयरलाइन का कर्मचारी और प्रशिक्षित पायलट है, जो अपनी अगली ड्यूटी की जगह पहुंचने के लिए विमान में सफर कर रहा है. FZ1073 के मामले में भी यही हुआ. दो पायलट दुबई से तेल अवीव जा रहे थे ताकि वहां से वापस दुबई जाने वाली फ्लाइट की कमान संभाल सकें. लेकिन रास्ते में जिस फ्लाइट में वे बैठे थे, उसी में कॉकपिट से जुड़ा गंभीर संकट पैदा हो गया.
क्या हर फ्लाइट में ऐसे दो एक्स्ट्रा पायलट होते हैं?
नहीं. हर विमान में चार पायलट होना सामान्य नियम नहीं है. आमतौर पर किसी सामान्य फ्लाइट को दो ऑपरेटिंग पायलट उड़ाते हैं- एक कैप्टन और एक फर्स्ट ऑफिसर. हालांकि कुछ लंबी उड़ानों में अतिरिक्त ऑपरेटिंग पायलट रखे जा सकते हैं. इसकी वजह सुरक्षा और पायलटों की थकान से जुड़े नियम होते हैं. लंबी उड़ान में पायलटों को आराम की जरूरत होती है और एविएशन रेगुलेटर उनकी अधिकतम ड्यूटी अवधि तय करते हैं. ऐसे मामलों में अतिरिक्त पायलट ऑपरेटिंग क्रू का हिस्सा हो सकते हैं और उड़ान के दौरान पायलटों को आराम करने का मौका मिलता है.
लंबी उड़ान में अतिरिक्त ऑपरेटिंग पायलट इसलिए हो सकते हैं क्योंकि उड़ान की अवधि और ड्यूटी-टाइम नियम इसकी जरूरत पैदा करते हैं. वहीं, डेडहेडिंग में पायलट उस फ्लाइट को उड़ाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी अगली ड्यूटी की जगह पहुंचने के लिए विमान में बैठता है.
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