बम से भी नहीं टूटते... आखिर किस सीमेंट से बनते हैं मिलिट्री बंकर और बैंकों के वॉल्ट

बड़े- बड़े न्यूक्लियर रिएक्टर्स, मिलिट्री बंकर और हाई सिक्योर बैंकों वॉल्ट किसी साधारण सीमेंट से नहीं बने होते हैं. इसके कंक्रीट इतने ज्यादा मजबूत होते हैं कि शक्तिशाली बम और ग्रेनेड के धमाके भी झेल जाएं.

Advertisement
साधारण सीमेंट से नहीं बनते हैं मिलिट्री बंकर और न्यूक्लियर रिएक्टर्स (Photo - AI Generated) साधारण सीमेंट से नहीं बनते हैं मिलिट्री बंकर और न्यूक्लियर रिएक्टर्स (Photo - AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:34 PM IST

मिलिट्री बंकरों, न्यूक्लियर सेंटर्स और बैंकों के हाई-सिक्योरिटी वॉल्ट को किसी आम सीमेंट से नहीं बनते हैं. ऐसे स्ट्रक्चर्स को बनाने में अल्ट्रा-हाई परफॉर्मेंस कंक्रीट यानी UHPC का इस्तेमाल होता है. ऐसे में जानते हैं कि ये यूएचपीसी क्या होता है और ये कैसे इतना ज्यादा मजबूत बन जाता है.  

अल्ट्रा-हाई परफॉर्मेंस कंक्रीट साधारण सीमेंट के मुकाबले 10 गुना तक ज्यादा मजबूत होता है और बड़े से बड़े बम या मिसाइल के सीधे प्रभाव को भी आसानी से झेल जाता है. इसे इतना ज्यादा शक्तिशाली और मजबूत बनाने के लिए इसमें रिएक्टिव पाउडर कंक्रीट (RPC) जैसी अत्याधुनिक कंस्ट्रक्शन मटेरियल मिलाया जाता है. 

Advertisement

साधारण कंक्रीट में पानी, सीमेंट, रेत और बजरी का इस्तेमाल होता है. इससे उसमें छोटे- छोटे छेद रह जाते हैं. लेकिन मिलिट्री बंकर, न्यूक्लियर रिएक्टर, हाई सिक्योरिटी वॉल्ट के लिए इस्तेमाल होने वाले यूएचपीसी में कुछ बेहद ही खास मटेरियल्स का  सटीक मिश्रण किया जाता है.

इसमें पोर्टलैंड सीमेंट मेन बेस होता है. इसके बाद फिर इसमें सिलिका फ्यूम और क्वार्ट्ज पाउडर मिलाया जाता है. ये इतने बारीक कण होते हैं जो सीमेंट के बीच के सबसे छोटे खाली स्थानों को भी पूरी तरह भर देते हैं. इससे हवा या पानी के रुकने की कोई गुंजाइश नहीं बचती.

इसके अलावा इसमें हाई-कार्बन स्टील और ग्लास फाइबर्स मिलाए जाते हैं. आसान भाषा में समझे तो स्टील और लोहे के काफी महीन रेशे और फाइबर कंक्रीट में मिलाए जाते है.  इस मिक्सचर में लाखों की संख्या में स्टील, प्लास्टिक या ग्लास के बारीक फाइबर्स  मिलाए जाते हैं. ये रेशे आंतरिक रूप से एक मकड़जाल की तरह कंक्रीट को जकड़ लेते हैं, जिससे यह लचीला भी बनता है और झटके से टूटता नहीं है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: क्या फिर सीमेंट में पॉटी मिलाकर बनाएंगे घर? इस नई टेक्नोलॉजी से सस्ते में बनेगा मजबूत घर

जब कोई साधारण बम या 'बंकर बस्टर' मिसाइल किसी आम कंक्रीट की दीवार से टकराती है, तो वह उसे चीरती हुई अंदर घुस जाती है और कंक्रीट तुरंत बिखर जाता है. वहीं यूएचपीसी कंक्रीट की डेंसिटी इतनी ज्यादा होती है कि बम या रॉकेट का नुकीला सिरा इसे भेद नहीं पाता है. इसमें मिले स्टील के फाइबर्स विस्फोट के झटके को पूरी दीवार में फैला देते हैं. इस वजह से एक ही जगह गड्ढा नहीं बन पाता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »