भारत में हर दिन करोड़ों लोग ट्रेन से सफर करते हैं. टिकट बुक करते समय या स्टेशन पर लगे बोर्ड देखते वक्त आपने कई बार नई दिल्ली, मथुरा जंक्शन, आनंद विहार टर्मिनल या दिल्ली कैंट जैसे नाम जरूर देखे होंगे. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर किसी स्टेशन के नाम के आगे जंक्शन, टर्मिनल या कैंट क्यों लिखा होता है? क्या ये सिर्फ नाम का हिस्सा है या इसके पीछे रेलवे का कोई खास नियम भी है? दरअसल, ये तीनों शब्द किसी स्टेशन की पहचान बताते हैं.तो चलिए जानते हैं क्या है इनका मतलब क्या होता है और इनमें अंतर.
टर्मिनल क्या होता है?
अगर किसी रेलवे स्टेशन के नाम के साथ टर्मिनल लिखा है तो इसका मतलब है कि वहां रेलवे लाइन खत्म हो जाती है. यानी ट्रेन उस स्टेशन से आगे उसी ट्रैक पर नहीं जा सकती. उसे या तो दूसरी दिशा में वापस जाना पड़ता है या फिर दूसरी लाइन से आगे बढ़ाया जाता है. इसे ऐसे समझिए जैसे किसी सड़क का आखिरी छोर. वहां पहुंचने के बाद आपको वापस मुड़ना ही पड़ेगा. रेलवे में भी टर्मिनल स्टेशन का यही काम होता है. दिल्ली का आनंद विहार टर्मिनल, मुंबई का लोकमान्य तिलक टर्मिनस और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस इसके अच्छे उदाहरण हैं. इन स्टेशनों से कई लंबी दूरी की ट्रेनें शुरू होती हैं और कई ट्रेनों का सफर यहीं खत्म हो जाता है.
जंक्शन क्या होता है?
अब बात करते हैं जंक्शन की. जंक्शन वह स्टेशन होता है, जहां से कम से कम तीन अलग-अलग दिशाओं में रेलवे लाइनें निकलती हैं. यानी यहां पहुंचने के बाद ट्रेन अलग-अलग रूट पर जा सकती है. मान लीजिए आप किसी चौराहे पर खड़े हैं, जहां से चार सड़कें अलग-अलग शहरों की तरफ जाती हैं. रेलवे में ऐसे ही चौराहे को जंक्शन कहा जाता है. उदाहरण के लिए मथुरा जंक्शन से दिल्ली, आगरा, कोटा, अलीगढ़ और कई अन्य रूट जुड़ते हैं. इसी तरह प्रयागराज जंक्शन और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन भी कई महत्वपूर्ण रेल मार्गों को जोड़ते हैं. यही वजह है कि जंक्शन रेलवे नेटवर्क का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है.
क्या हर बड़ा स्टेशन जंक्शन होता है?
कई लोगों को लगता है कि जहां ज्यादा ट्रेनें आती-जाती हैं, वह जंक्शन होगा. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. जंक्शन कहलाने के लिए स्टेशन का बड़ा होना जरूरी नहीं, बल्कि वहां से कम से कम तीन दिशाओं में रेलवे लाइनें निकलना जरूरी है. यही कारण है कि देश के सबसे व्यस्त स्टेशनों में शामिल नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के नाम के साथ जंक्शन नहीं लिखा जाता, जबकि कुछ छोटे शहरों के स्टेशन जंक्शन कहलाते हैं क्योंकि वहां कई रेल मार्ग मिलते हैं.
स्टेशन के नाम के आगे 'कैंट' क्यों लिखा होता है?
अगर आपने दिल्ली कैंट, मेरठ कैंट, अंबाला कैंट या झांसी कैंट जैसे स्टेशन देखे हैं तो जान लीजिए कि यहां कैंट का मतलब कैंटोनमेंट होता है. ब्रिटिश शासन के दौरान देश के कई हिस्सों में सेना की छावनियां बनाई गई थीं. सैनिकों और सैन्य सामान की आवाजाही आसान बनाने के लिए इन इलाकों के पास रेलवे स्टेशन भी बनाए गए. समय के साथ उन स्टेशनों के नाम के साथ Cantt. जुड़ गया और आज भी वही नाम इस्तेमाल होता है. हालांकि, इन स्टेशनों से सिर्फ सेना ही सफर नहीं करती। यहां आम यात्रियों के लिए भी सभी ट्रेन सेवाएं उपलब्ध रहती हैं.
रेलवे स्टेशन के नाम में ये शब्द क्यों जोड़े जाते हैं?
रेलवे सिर्फ नाम रखने के लिए ये शब्द नहीं जोड़ता. इनका मकसद स्टेशन की पहचान बताना होता है. जैसे ही कोई यात्री बोर्ड पर जंक्शन, टर्मिनल या कैंट पढ़ता है, उसे तुरंत समझ आ जाता है कि यह स्टेशन किस तरह का है. यही वजह है कि रेलवे के लिए भी संचालन आसान होता है और यात्रियों को भी स्टेशन के बारे में पहले से जानकारी मिल जाती है.
aajtak.in