क्या सही में ताजमहल बनवाने के बाद शाहजहां ने कटवा दिए थे मजदूरों के हाथ?

ताजमहल से जुड़ी सबसे चर्चित कहानियों में एक यह भी है कि शाहजहां ने इसे बनाने वाले कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे, ताकि दुनिया में दोबारा ऐसी इमारत न बन सके. लेकिन क्या इतिहास इस दावे की पुष्टि करता है? आइए जानते हैं.

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ताजमहल हजारों कारीगरों की कला, मेहनत और हुनर की कहानी है (Photo: Pexel) ताजमहल हजारों कारीगरों की कला, मेहनत और हुनर की कहानी है (Photo: Pexel)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:52 PM IST

"कितने हाथों ने तराशे ये हसीं ताजमहल,
झांकते हैं दर-ओ-दीवार से क्या-क्या चेहरे..."

शायर जमील मलिक का यह शेर ताजमहल की खूबसूरती के साथ-साथ उसे बनाने वाले हजारों कारीगरों की मेहनत को भी याद दिलाता है. दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल आज भी प्यार, कला और बेमिसाल शिल्पकला की पहचान माना जाता है.

लेकिन जितना मशहूर ताजमहल है, उतनी ही मशहूर उससे जुड़ी एक कहानी भी है.क्या शाहजहां ने ताजमहल बनने के बाद कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे, ताकि वे दोबारा ऐसी इमारत न बना सकें?

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आइए जानते हैं कि इतिहास इस बारे में क्या कहता है.

क्या सच में कारीगरों के हाथ कटवाए गए थे?

इतिहासकारों के अनुसार, इस दावे का कोई समकालीन ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता.मुगलकालीन दस्तावेजों, उस समय के सरकारी अभिलेखों और भारत आए यूरोपीय यात्रियों जीन-बैप्टिस्ट टैवर्नियर तथा फ्रांस्वा बर्नियर के विवरणों में कहीं भी यह उल्लेख नहीं मिलता कि शाहजहां ने ताजमहल बनाने वाले कारीगरों के हाथ कटवाए थे.

यह भी पढ़ें: जहां बना है ताजमहल, वहां पहले क्या था? शाहजहां ने साथ में क्यों बनवाए थे 22 कमरे

इतिहासकार क्या कहते हैं?

आजतक रेडियो से बातचीत में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के पूर्व चेयरमैन और मध्यकालीन इतिहास के विशेषज्ञ प्रोफेसर सैयद अली नदीम रिज़वी ने कहा कि अगर किसी को रोकना ही होता, तो कारीगरों के नहीं बल्कि वास्तुकार (आर्किटेक्ट) के हाथ काटे जाते, क्योंकि इमारत का डिजाइन वही तैयार करता है. कारीगर तो उसी डिजाइन के अनुसार काम करते हैं.

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उन्होंने यह भी बताया कि ताजमहल बनने के बाद भी कारीगरों को वेतन मिलता रहा और उनके भुगतान से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध हैं. आगरा के ताजगंज इलाके में आज भी उन कारीगरों के वंशज पारंपरिक शिल्पकला से जुड़े हुए हैं.

Photo: Pexel

अगर हाथ काट दिए गए होते, तो आगे की इमारतें किसने बनाईं?

इतिहासकारों का कहना है कि ताजमहल के निर्माण के बाद भी कई कारीगर मुगल साम्राज्य की दूसरी परियोजनाओं में काम करते रहे. इन्हीं में शाहजहानाबाद (पुरानी दिल्ली), लाल किला और जामा मस्जिद जैसी इमारतें शामिल हैं. इसलिए हाथ काटने वाली कहानी उपलब्ध ऐतिहासिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती.

ताजमहल की असली कहानी

ताजमहल का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में कराया था. इसका निर्माण 1632 से 1653 के बीच हुआ और इसमें लगभग 20 हजार कारीगरों और मजदूरों ने काम किया. संगमरमर, कीमती पत्थरों की जड़ाई और बारीक नक्काशी ने इसे दुनिया की सबसे प्रसिद्ध इमारतों में शामिल कर दिया.

ताजमहल के बारीक नक्काशी और कैलिग्राफी का क्लोज-अप . (Photo: Pexel)

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण कार्य में बड़ी संख्या में मजदूर कन्नौज क्षेत्र से आए थे, जबकि राजमिस्त्री, पत्थर तराशने वाले, बढ़ई, चित्रकार और अन्य विशेषज्ञ कारीगर मुगल साम्राज्य के विभिन्न हिस्सों के अलावा मध्य एशिया और ईरान से भी बुलाए गए थे.

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फिर यह कहानी फैली कैसे?

इतिहासकार एब्बा कोच, जिन्हें मुगल वास्तुकला का प्रमुख विशेषज्ञ माना जाता है, इस कहानी को "गाइड्स टेल" (Guides' Tale) यानी पर्यटक गाइडों द्वारा सुनाई जाने वाली लोककथा बताती हैं. उनके अनुसार, दुनिया के कई ऐतिहासिक स्मारकों के साथ ऐसी कहानियां जुड़ी रही हैं.

वहीं इतिहासकार एस. इरफान हबीब के अनुसार, यह कहानी खास तौर पर 1960 के दशक में लोकप्रिय हुई. उनके मुताबिक, इस दावे के समर्थन में कोई विश्वसनीय ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं है और किसी प्रतिष्ठित इतिहासकार ने इसे तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया.

आज उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेज, समकालीन विवरण और इतिहासकारों के शोध इस बात की पुष्टि नहीं करते कि शाहजहां ने ताजमहल बनाने वाले कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे.

इसलिए इसे इतिहास की स्थापित घटना नहीं, बल्कि एक लोकप्रिय मिथक  माना जाता है. ताजमहल की सबसे बड़ी पहचान किसी क्रूर कहानी से नहीं, बल्कि उन हजारों कारीगरों की कला, मेहनत और हुनर से है, जिन्होंने इसे दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतों में शामिल किया.

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