क्या आपकी जिंदगी में भी ऐसा होता है कि आप किसी नए व्यक्ति से मिलते ही उससे बहुत जल्दी अटैच हो जाते हैं? थोड़ी सी बातचीत, थोड़ा सा ध्यान या प्यार भरा व्यवहार और वह व्यक्ति आपको बेहद खास लगने लगता है. फिर आप उसकी बातों, मैसेज और व्यवहार के बारे में ज्यादा सोचने लगते हैं. अगर वह बात न करे तो बेचैनी महसूस होने लगती है. साइकोलॉजी के अनुसार, किसी से जल्दी अटैच होना सिर्फ प्यार में पड़ने का संकेत नहीं है. इसके पीछे व्यक्ति के अनुभव, इमोशनल जरूरतें और रिश्तों को देखने का तरीका भी जिम्मेदार हो सकता है.
जल्दी अटैचमेंट क्यों हो जाता है?
साइकोलॉजी के अनुसार, हर इंसान की इमोशनल जरूरतें अलग-अलग होती हैं. कुछ लोगों को प्यार, अपनापन और किसी के साथ की जरूरत दूसरों की तुलना में ज्यादा महसूस होती है. ऐसे में जब उन्हें कोई व्यक्ति प्यार से बात करता है या महत्व देता है, तो वे जल्दी उससे जुड़ सकते हैं. कई बार व्यक्ति लंबे समय से अकेलापन महसूस कर रहा होता है. उसे लगता है कि उसकी बात सुनने वाला या समझने वाला कोई नहीं है. ऐसे में जब कोई नया व्यक्ति उसकी जिंदगी में आता है और उसे ध्यान देता है, तो वह बहुत जल्दी उस रिश्ते को खास मानने लगता है.
बचपन के अनुभव भी हो सकते हैं जिम्मेदार
साइकोलॉजी में अटैचमेंट थ्योरी काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है. इसके अनुसार, बचपन में माता-पिता और परिवार के साथ बने रिश्ते आगे चलकर हमारे रिश्तों को प्रभावित कर सकते हैं. अगर किसी व्यक्ति को बचपन में अपनों से प्यार नहीं मिला, तो बड़े होने पर वह रिश्तों में ज्यादा सुरक्षा तलाश सकता है. उसे हमेशा यह डर रह सकता है कि कहीं सामने वाला व्यक्ति उसे छोड़ न दे. इसी वजह से वह किसी नए रिश्ते में जल्दी इमोशनल रूप से इन्वेस्ट कर सकता है. उसे लगने लगता है कि यही व्यक्ति उसकी जिंदगी में हमेशा रहेगा.
कुछ लोगों के मन में यह डर ज्यादा होता है कि उनके अपने लोग उन्हें छोड़ देंगे. इसे साइकोलॉजी में कई बार 'Fear of Abandonment' से जोड़कर देखा जाता है. ऐसे लोग किसी से जुड़ने के बाद उस व्यक्ति को खोने के बारे में ज्यादा सोच सकते हैं. अगर सामने वाला व्यक्ति मैसेज का जवाब देर से दे, कम बात करे या थोड़ा दूर दिखाई दे, तो उन्हें चिंता होने लगती है. वे बार-बार सोच सकते हैं, "क्या वह मुझसे नाराज है?", "क्या उसे अब मेरी जरूरत नहीं है?" या "क्या वह मुझे छोड़ देगा?" यह चिंता कई बार अटैचमेंट को और ज्यादा मजबूत बना देती है.
ओवरथिंकिंग भी बढ़ा सकती है अटैचमेंट
जो लोग ज्यादा ओवरथिंकिंग करते हैं, वे रिश्तों की छोटी-छोटी बातों को भी बहुत गंभीरता से ले सकते हैं. सामने वाले ने क्या कहा, कैसे देखा या मैसेज में क्या लिखा, वे हर बात का मतलब निकालने लगते हैं. धीरे-धीरे उनका दिमाग उस व्यक्ति के बारे में ज्यादा सोचने लगता है. इससे इमोशनल जुड़ाव और बढ़ सकता है. कई बार व्यक्ति सामने वाले को वास्तव में जितना जानता है, उससे ज्यादा अपनी कल्पना में उसके बारे में सोच चुका होता है. इसलिए उसे लगता है कि वह व्यक्ति उसकी जिंदगी का बहुत अहम हिस्सा बन गया है.
कम आत्मविश्वास वाले कुछ लोग दूसरों से मिलने वाली तारीफ और प्यार को अपनी खुशी का मुख्य कारण बना लेते हैं. जब कोई उन्हें महत्व देता है, तो उन्हें अच्छा महसूस होता है. लेकिन समस्या तब हो सकती है, जब व्यक्ति अपनी खुशी पूरी तरह दूसरे इंसान के व्यवहार पर निर्भर करने लगे. सामने वाला प्यार से बात करे तो खुशी और थोड़ा दूर हो जाए तो पूरा मूड खराब. साइकोलॉजी के अनुसार, स्वस्थ रिश्ते में दूसरे व्यक्ति से प्यार करना जरूरी है, लेकिन अपनी पहचान और खुशी को पूरी तरह खो देना सही नहीं है.
जल्दी अटैच होना हमेशा गलत नहीं
किसी से जल्दी जुड़ जाना हमेशा कोई समस्या नहीं है. कुछ लोग स्वभाव से ही भावुक, संवेदनशील और प्यार करने वाले होते हैं. वे रिश्तों को दिल से निभाते हैं और लोगों के साथ आसानी से भावनात्मक जुड़ाव महसूस करते हैं. लेकिन अगर किसी व्यक्ति के बिना आपको बहुत ज्यादा बेचैनी होने लगे, हर समय उसी के बारे में सोचने लगें या अपनी खुशी पूरी तरह उसी पर निर्भर हो जाए, तो थोड़ा रुक कर अपने रिश्ते को समझना जरूरी हो सकता है. एक हेल्दी रिलेशन वह होता है जिसमें प्यार के साथ भरोसा, सम्मान और व्यक्तिगत आजादी भी हो. किसी से जुड़िए जरूर, लेकिन खुद से जुड़ना भी उतना ही जरूरी है. आखिर कोई भी रिश्ता तभी मजबूत होता है, जब उसमें प्यार के साथ अपनी इमोशनल पहचान भी बनी रहे.
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