Window Seat Psychology: फ्लाइट में सफर करने वाले लोगों को अक्सर दो तरह की पसंद होती है. कुछ लोग हमेशा विंडो सीट चुनते हैं, जबकि कुछ को आइल सीट ज्यादा पसंद आती है. लेकिन आपने शायद ऐसे लोगों को भी देखा होगा, जो हर बार खिड़की वाली सीट लेने की कोशिश करते हैं, लेकिन पूरी यात्रा के दौरान बाहर झांकते तक नहीं हैं. वे फोन चलाते रहते हैं, फिल्म देखते हैं या सो जाते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि जब बाहर का नजारा देखना ही नहीं है तो आखिर विंडो सीट इतनी पसंद क्यों आती है?
सबसे पहले आपको बता दें कि आइल सीट (Aisle Seat) का मतलब विमान, ट्रेन, बस, या थिएटर में उस सीट से है जो आने-जाने के रास्ते यानी गलियारे (walkway) के बिल्कुल बगल में होती है. इसमें बैठने वाले यात्री को बाहर निकलने या टॉयलेट जाने के लिए किसी दूसरे यात्री को परेशान नहीं करना पड़ता.
फ्लाइट में सफर करते समय हर किसी की अपनी पसंद होती है. किसी को आइल सीट यानी रास्ते के पास बैठना अच्छा लगता है, तो किसी को विंडो सीट यानी खिड़की के पास. लेकिन आपने शायद कुछ ऐसे लोगों को भी देखा होगा, जो हर बार खिड़की वाली सीट चुनते हैं, लेकिन पूरी यात्रा के दौरान खिड़की से बाहर देखते तक नहीं हैं. वे कभी मोबाइल चलाते रहते हैं, कभी फिल्म देखते हैं और कई बार पूरी फ्लाइट में सो जाते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि जब बाहर का नजारा देखना ही नहीं है तो फिर विंडो सीट क्यों चाहिए? इसके पीछे कई आसान वजहें हो सकती हैं. कुछ लोगों को खिड़की वाली सीट पर बैठकर ज्यादा आराम मिलता है. वहीं कुछ लोगों को लगता है कि वहां उनकी अपनी एक अलग जगह है.
अपनी जगह होने का एहसास
फ्लाइट के अंदर जगह बहुत ज्यादा नहीं होती. यात्री एक-दूसरे के काफी पास बैठते हैं. आइल सीट पर बैठने वाले व्यक्ति के पास से लोग बार-बार गुजरते रहते हैं. कोई यात्री अपनी सीट पर जाने के लिए वहां से निकलता है. कोई वॉशरूम जाने के लिए उठता है. कभी एयर होस्टेस सामान या खाना लेकर वहां से गुजरती हैं. ऐसे में आइल सीट के पास काफी हलचल हो सकती है. लेकिन विंडो सीट पर बैठने वाले व्यक्ति के एक तरफ विमान की दीवार होती है. वहां से कोई नहीं गुजर सकता. इसलिए कुछ लोगों को लगता है कि उनकी जगह ज्यादा शांत है. उन्हें बार-बार किसी के लिए उठना नहीं पड़ता और न ही उनके पास से लगातार लोग गुजरते हैं. यही वजह है कि कुछ लोगों को विंडो सीट ज्यादा आरामदायक लगती है.
थोड़ा कंट्रोल होने का एहसास
जब हम फ्लाइट में बैठते हैं तो बहुत सी चीजें हमारे हाथ में नहीं होतीं. फ्लाइट कब उड़ान भरेगी, मौसम कैसा होगा या रास्ते में कितना समय लगेगा, इन बातों को यात्री तय नहीं कर सकता. लेकिन सीट चुनना एक ऐसी चीज है, जिसमें व्यक्ति अपनी पसंद बता सकता है. अगर किसी व्यक्ति ने खुद विंडो सीट चुनी है, तो उसे अच्छा लग सकता है कि कम से कम उसने अपनी बैठने की जगह अपनी पसंद से चुनी है. यह एक छोटी-सी बात है, लेकिन कई लोगों के लिए अपनी पसंद से फैसला लेना अच्छा महसूस करा सकता है.
बाहर का नजारा देखना जरूरी नहीं
विंडो सीट पसंद करने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि व्यक्ति को बादल, पहाड़ या नीचे दिखाई देने वाले शहरों का नजारा देखना है. कुछ लोगों को बस दीवार के पास बैठना अच्छा लगता है. वे वहां अपना सिर टिकाकर आराम से सो सकते हैं. खासकर लंबी फ्लाइट में यह उनके लिए ज्यादा आरामदायक हो सकता है. कुछ लोग शांति पसंद करते हैं. उन्हें अच्छा लगता है कि उनकी एक तरफ कोई दूसरा व्यक्ति नहीं बैठा है और न ही उस तरफ से कोई उनके पास से गुजर रहा है. यानी उनके लिए विंडो सीट का सबसे बड़ा फायदा खिड़की से बाहर देखना नहीं, बल्कि आराम और शांति हो सकती है.
आदत भी हो सकती है बड़ी वजह
कई बार किसी व्यक्ति को एक खास सीट पर बैठने की आदत हो जाती है. अगर उसने पहले कई बार विंडो सीट पर बैठकर आराम महसूस किया है, तो अगली बार भी वह वही सीट चुनना चाहेगा. यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे स्कूल में कुछ बच्चों को हमेशा एक खास बेंच पर बैठना पसंद होता है. उन्हें वहां बैठने की आदत हो जाती है और दूसरी जगह उतना अच्छा नहीं लगता. इसी तरह कुछ लोगों के लिए विंडो सीट उनकी पसंदीदा जगह बन जाती है.
हर विंडो सीट पसंद करने वाला व्यक्ति एक जैसा नहीं
यह बात भी याद रखनी चाहिए कि सिर्फ सीट की पसंद देखकर किसी व्यक्ति की पूरी पर्सनैलिटी के बारे में फैसला नहीं किया जा सकता. किसी को बाहर का नजारा पसंद हो सकता है. किसी को सोने के लिए दीवार का सहारा अच्छा लगता है. किसी को लोगों के बार-बार आने-जाने से परेशानी होती है, तो किसी को बस विंडो सीट पर बैठने की आदत होती है. इसलिए अगली बार अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को देखें जो विंडो सीट पर बैठकर भी बाहर नहीं देख रहा है, तो हैरान मत होइए. हो सकता है उसके लिए खिड़की से बाहर का नजारा जरूरी न हो. उसे बस वहां बैठकर शांति, आराम और अपनी अलग-सी जगह होने का एहसास अच्छा लगता हो.
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