अगर आप किसी ऑफिस में काम करते हैं, कॉलेज जाते हैं या किसी भी ऐसी जगह पर रहते हैं जहां लोगों से रोजाना मुलाकात होती है, तो आपने जरूर ऐसे लोगों को देखा होगा जो दिन में कई बार अपना चेहरा देखते रहते हैं. कभी वॉशरूम में जाकर अपने बाल ठीक करते हैं, कभी लिफ्ट के शीशे में खुद को देखते हैं, तो कभी मोबाइल का फ्रंट कैमरा खोलकर अपना चेहरा चेक करने लगते हैं. कई बार ऐसा लगता है कि जैसे उन्हें हर थोड़ी देर में यह जानना जरूरी है कि वे कैसे दिख रहे हैं. ऐसे लोगों को देखकर मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर वे बार-बार आईना क्यों देखते हैं. क्या यह सिर्फ अच्छी पर्सनैलिटी दिखाने की कोशिश होती है या इसके पीछे कोई साइकोलॉजिकल फैक्ट भी होता है.
साइकोलॉजी के अनुसार, हर बार अपना चेहरा देखने की वजह एक जैसी नहीं होती. कुछ लोग सिर्फ यह देखना चाहते हैं कि उनके कपड़े, बाल या चेहरा ठीक दिख रहा है या नहीं. वहीं कुछ लोगों के लिए यह आदत उनके आत्मविश्वास, सोच और भावनाओं से भी जुड़ी हो सकती है. इसलिए सिर्फ किसी को बार-बार आईना देखते देखकर यह कहना सही नहीं होगा कि वह घमंडी है या खुद पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देता है.
दूसरों पर अच्छा प्रभाव छोड़ने की इच्छा
साइकोलॉजी के अनुसार इंसान अपने बारे में दूसरों की राय को काफी महत्व देता है. इसी वजह से कई लोग बार-बार यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि वे दूसरों के सामने अच्छे दिख रहे हैं. इसे सेल्फ प्रेजेंटेशन यानी खुद को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने की इच्छा माना जाता है. यह एक सामान्य व्यवहार है और लगभग हर व्यक्ति में किसी न किसी स्तर पर पाया जाता है. खासकर नौकरी, बिजनेस या प्रोफेशनल माहौल में लोग अपनी पहली छाप अच्छी बनाना चाहते हैं. इसलिए वे बार-बार आईना देखकर खुद को व्यवस्थित करते हैं.
सेल्फ अवेयरनेस भी हो सकती है वजह
साइकोलॉजी में सेल्फ अवेयरनेस थ्योरी इस आदत को समझाने की कोशिश करती है. इस सिद्धांत के अनुसार जब कोई व्यक्ति खुद पर ज्यादा ध्यान देता है, तो वह अपने चेहरे, हाव-भाव को बार-बार चेक कर सकता है. खासकर इंटरव्यू, मीटिंग, प्रेजेंटेशन या किसी खास कार्यक्रम से पहले यह आदत बढ़ सकती है.
कम आत्मविश्वास वाले लोग भी ऐसा कर सकते हैं
कुछ मामलों में बार-बार चेहरा देखना लो-कॉन्फिडेंस का संकेत हो सकता है. ऐसे लोग अपनी छोटी-छोटी कमियों को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचते हैं. उन्हें बार-बार लगता है कि कहीं उनके चेहरे पर कोई दाग, बाल खराब या कपड़ों में कोई कमी तो नहीं है. मनोवैज्ञानिक इसे बॉडी इमेज कंसर्न से जोड़कर देखते हैं. हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि हर बार आईना देखने वाला व्यक्ति असुरक्षित ही होता है.
कॉन्फिडेंट लोग भी बार-बार देखते हैं आईना
दिलचस्प बात यह है कि कई रिसर्च बताते हैं कि आत्मविश्वास से भरे लोग भी खुद को आईने में देखना पसंद करते हैं. वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनकी पर्सनैलिटी और ड्रेसिंग अच्छी लग रही है. यानी बार-बार आईना देखना हमेशा निगेटिव बिहेवियर नहीं होता. कई बार यह अच्छी ग्रूमिंग और प्रोफेशनल इमेज बनाए रखने की आदत भी हो सकती है.
सोशल मीडिया का भी पड़ रहा है असर
आज इंस्टाग्राम, फेसबुक और सेल्फी कल्चर ने लोगों की सोच बदल दी है. लोग पहले की तुलना में अपनी तस्वीरें ज्यादा देखते हैं और दूसरों से अपनी तुलना भी करते हैं. यही वजह है कि मोबाइल का फ्रंट कैमरा अब कई लोगों के लिए आईने का काम करने लगा है. विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया ने लोगों को अपने लुक्स के प्रति पहले से ज्यादा सजग बना दिया है.
कब बन सकती है चिंता की बात
विशेषज्ञों के अनुसार अगर कोई व्यक्ति हर कुछ मिनट में आईना देखने लगे, बिना चेहरा देखे घर से निकलने में घबराए या अपने चेहरे की छोटी-छोटी कमियों को लेकर लगातार परेशान रहे, तो यह सामान्य आदत से आगे की स्थिति हो सकती है. ऐसे मामलों में यह एंग्जायटी या बॉडी इमेज से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है. अगर यह आदत रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर माना जाता है.
बार-बार आईना देखने की आदत किसी व्यक्ति की पूरी पर्सनैलिटी तय नहीं करती. इसके पीछे आत्मविश्वास, खुद को बेहतर दिखाने की इच्छा, सामाजिक स्वीकार्यता, तनाव या सिर्फ अच्छी ग्रूमिंग की आदत जैसे कई कारण हो सकते हैं. इसलिए किसी एक व्यवहार के आधार पर किसी की पर्सनैलिटी का फैसला करना सही नहीं है. इस आदत को हमेशा व्यक्ति की परिस्थितियों और उसके पूरे व्यवहार के साथ समझना चाहिए.
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