आज हर दिन टोस्टर, इंडक्शन कुकर, इलेक्ट्रिक आयरन, इलेक्ट्रिक कार, फ्रीज, टीवी, एसी हर चीज के लिए हम बिजली पर निर्भर हो चुके हैं. ऐसे में बिजली खपत को लेकर किफायती कदम बढ़ाते हुए सरकार ने लोगों को घरों में अपना सोलर प्लांट इंस्टॉल करवाने को प्रोत्साहित करती है.
यानी अपने काम की बिजली खुद तैयार करें और जो बच जाए वो सरकार को दे दें. कई जगह सरकार आम लोगों को घरों की छतों पर मिनी सोलर प्लांट मुफ्त में लगवाने का अभियान चला रही है. ऐसे में अगर आप अपने घर प सोलर प्लेट लगवा लेते हैं तो खुद के इस्तेमाल के लायक बिजली आपके घर पर ही उत्पादित हो जाएगी. इससे बिजली के बिल से भी मुक्ति मिलेगी और उल्टा, खपत से ज्यादा बिजली उत्पादन करने पर वह आपके खाते में क्रेडिट होता रहेगा.
मगर घर पर इस सोलर प्लांट को लगवाने से पहले नेट मीटरिंग के बारे में जानना जरूरी है. क्योंकि, इसे समझ जाने पर घर पर सोलर बिजली बनाना और उसका इस्तेमाल करना आसान हो जाएगा. आज उत्तर प्रदेश में घरों में सोलर प्लांट लगाने पर काफी जोर दिया जा रहा है. यही वजह है कि यूपी देश में सबसे ज्यादा सौर ऊर्जा उत्पादित करने वाला राज्य बन चुका है. लेकिन, यहां जिन लोगों ने घर पर सोलर प्लांट लगवाएं हैं, उन्हें उत्पादित सौर ऊर्जा के इस्तेमाल में एक परेशानी आ रही है, जो नेट मीटरिंग से जुड़ी है.
क्या होता है नेट मीटरिंग
नेट मीटरिंग एक ऐसी व्यवस्था है, जो घर पर तैयार होने वाली सौर बिजली का हिसाब किताब रखती है. सरकार के प्रोत्साहन से घरों में जो सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं. उसके तहत उत्पादित सोलर बिजली को पहले अपने घर में इस्तेमाल करना है और फिर जो बिजली बच जाए उसे ग्रिड को भेज देना है.
इसे ऐसे समझिए, अगर आपने अपने घर पर लगे सोलर प्लांट से हर दिन 12 यूनिट बिजली उत्पादित की और 10 यूनिट आपकी खपत है. बाकी बचे 2 यूनिट सरकार के ग्रिड में चली जाएगी. बाद में इस बचे बिजली को आपके बिल में एडजस्ट कर दिया जाएगा. नेट मीटरिंग का काम इसी हिसाब किताब को देखना है कि कितना बिजली आपने तैयार किया, कितानी आपकी खपत है और कितना आपने ग्रिड को भेजा.
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उत्तर प्रदेश में कई उपभोक्ताओं की इसी नेट मीटरिंग से जुड़ी शिकायत आ रही है. काफी लोगों का कहना है कि उनकी तरफ से ग्रिड को भेजी गई बिजली का ठीक ढंग से रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा है या फिर वे जिनती यूनिट बिजली ग्रिड को भेज रहे हैं, उससे कम का रिकॉर्ड दिखाया जा रहा है. अब इस बखेड़े में बिजली विभाग और सोलर प्लांट इंस्टॉलेशन कंपनियां एक दूसरे पर जिम्मेदारी फेंकम -फेंक कर रहे हैं. इसी गड़बड़ी नेट मीटरिंग का बिजली विभाग के रेवेन्यू मैनेजमेंट सिस्टम से सही तालमेल नहीं होने की वजह से भई होता है.
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