21 सितम्बर 1949 को मणिपुर ने भारत के साथ विलय संधि की थी. 15 अक्टूबर 1949 से मणिपुर भारत का हिस्सा बन गया. था. इससे पहले मणिपुर एक स्वतंत्र रियासत हुआ करता था. भारत के साथ मणिपुर के जुड़ने की कहानी 1947 से शुरू होती है. जब अंग्रेजों ने मणिपुर छोड़ा तब से मणिपुर का शासन महाराज बोधचन्द्र के पास आ गया.
26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने पर यह एक मुख्य आयुक्त के अंदर भारतीय संघ में भाग 'सी' के राज्य के रूप में शामिल हुआ. बाद में यहां एक प्रादेशिक परिषद बनी. इसमें 30 चयनित तथा दो मनोनीत सदस्य थे. इसके बाद 1962 में केंद्रशासित प्रदेश अधिनियम के अंतर्गत 30 चयनित तथा तीन मनोनीत सदस्यों की एक विधानसभा स्थापित की गई.
19 दिसंबर 1969 से प्रशासक का दर्जा मुख्य आयुक्त से बढ़ाकर उपराज्यपाल कर दिया गया. 21 जनवरी 1972 को मणिपुर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला और 60 निर्वाचित सदस्यों वाली विधानसभा गठित की गई. इस तरह मणिपुर एक भारतीय राज्य बन गया.
क्या मणिपुर का इतिहास
मणिपुर का सन 33 से लिखित इतिहास उपलब्ध है. यहां के राजवंशों की कहानी सन 33 ई. में पाखंगबा के राज्याभिषेक के साथ शुरू होता है. वह यहां के प्रथम शासक थे और 120 वर्षों (33-154 ई ) तक शासन किया. उसके बाद अनेक राजाओं ने मणिपुर पर शासन किया. आगे जाकर मणिपुर के महाराज कियाम्बा ने 1467, खागेम्बा ने 1597, चराइरोंबा ने 1698, गरीबनिवाज ने 1714, भाग्यचन्द्र (जयसिंह) ने 1763, गम्भीर सिंह ने 1825 को यहां का शासन संभाला. इन राजाओं ने शासन कर मणिपुर की सीमाओं की रक्षा की.
मणिपुर की स्वतंत्रता और संप्रभुता 19वीं सदी के शुरुआत तक बनी रही. उसके बाद सात वर्ष (1819 से 1825 तक) बर्मी लोगों ने इस पर कब्जा कर लिया. 24 अप्रैल 1891 के खोंगजोम युद्ध (अंग्रेज-मणिपुरी युद्ध ) हुआ. इस तरह 1891 में मणिपुर ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया और 1947 में शेष देश के साथ स्वतंत्र हुआ.
कई नामों से जाना जाता था मणिपुर
मणिपुर के नामकरण के सन्दर्भ में जहां पौराणिक कथाओं से उसका संबंध जोड़ा जाता है. वहीं प्राप्त तथ्यों से यह प्रतीत होता है कि प्राचीन काल में पड़ोसी राज्यों द्वारा मणिपुर को विभिन्न नामों से पुकारा जाता था. इनमें बर्मियों द्वारा 'कथे', असमियों द्वारा 'मोगली', 'मिक्ली' आदि नाम थे. इतिहास से यह भी पता चलता है कि मणिपुर को मैत्रबाक, कंलैपुं या पोंथोक्लम आदि नामों से भी जाना जाता था.
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