मॉल में खरीदारी करने के लिए आने वाले लोगों के साथ छोटे बच्चे भी पहुंचते हैं. मॉल में चलने वाली छोटी ट्रेन या ट्रेन-कार बच्चों के लिए खास आकर्षण होती है. बच्चे इसमें घूमने की जिद करते हैं और माता-पिता भी उनकी खुशी के लिए टिकट खरीद लेते हैं. अगर एक बच्चे के टिकट की कीमत 100 रुपये है, तो इससे होने वाली कमाई का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.
हालांकि, हर दिन बच्चों की संख्या एक जैसी नहीं होती. आम दिनों में मॉल में भीड़ कम होने के कारण ट्रेन में घूमने वाले बच्चों की संख्या भी कम रह सकती है. मान लीजिए, सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना 30 बच्चे ट्रेन की सवारी करते हैं. ऐसे में 100 रुपये प्रति टिकट के हिसाब से रोजाना 3,000 रुपये की कमाई होगी. इस तरह पांच दिनों में कुल कमाई 15,000 रुपये हो सकती है.
ऐसे में 100 रुपये प्रति टिकट के हिसाब से एक दिन की कमाई 3,000 रुपये होगी. अगर महीने में 25 दिन ट्रेन चलाई जाती है, तो कुल कमाई 75,000 रुपये तक पहुंच सकती है. हालांकि, यह टिकटों से होने वाली कुल कमाई है, इसमें से ट्रेन चलाने, रखरखाव और मॉल में जगह के किराये जैसे खर्च घटाने होंगे.
शनिवार और रविवार को मॉल में परिवारों की भीड़ बढ़ जाती है. लोग खरीदारी के साथ बच्चों को घुमाने और मनोरंजन के लिए भी लाते हैं. ऐसे में अगर एक दिन में 70 बच्चे ट्रेन की सवारी करते हैं, तो 100 रुपये प्रति टिकट के हिसाब से कमाई 7,000 रुपये होगी.
त्योहारों के समय बढ़ सकती है कमाई
दिवाली, दशहरा, क्रिसमस और दूसरे त्योहारों के समय मॉल में खरीदारी करने वालों की संख्या बढ़ सकती है. इन दिनों सजावट और छुट्टियों के कारण बच्चों के साथ आने वाले परिवार भी ज्यादा हो सकते हैं. मान लीजिए कि त्योहार के दिन 150 बच्चे ट्रेन में बैठते हैं, तो 100 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से दिनभर में 15,000 रुपये की कमाई होगी.
अगर दिनभर में 100 बच्चे आ जाएं तो?
अब मान लीजिए कि मॉल में रोजाना 100 बच्चे ट्रेन की सवारी करने आते हैं. हर बच्चे से 100 रुपये लेने पर दिनभर की कमाई 10,000 रुपये होगी. अगर महीने में 30 दिन ट्रेन चलाई जाए, तो कुल कमाई 3 लाख रुपये हो सकती है. हालांकि, यह पूरी रकम कमाई यानी कुल बिक्री है, टोटल प्रॉफिट नहीं. इसमें से ट्रेन खरीदने की लागत, बिजली, रखरखाव, कर्मचारियों की सैलरी और मॉल को दिया जाने वाला किराया या कमीशन घटाना होगा. इसके बाद ही पता चलेगा कि महीने में असल में कितना पैसा बचता है.
आम दिनों में कितनी हो सकती है कमाई?
मोदी मॉल में बच्चों के लिए ट्रेन चलाने वाले बताते हैं कि आम दिनों में मॉल में लोगों की भीड़ वीकेंड के मुकाबले कम हो सकती है. ऐसे में अगर दिनभर में 100 से 150 बच्चे कार, बाइक या ट्रेन में घूमते हैं और हर बच्चे से 100 रुपये लिए जाते हैं, तो कमाई का हिसाब कुछ इस तरह होगा. अगर 100 बच्चे घूमते हैं, तो 100 × 100 = 10,000 रुपये की कमाई होगी. वहीं, 150 बच्चे घूमते हैं, तो 150 × 100 = 15,000 रुपये मिलेंगे. यानी इस अनुमान के हिसाब से आम दिनों में रोजाना 10,000 से 15,000 रुपये तक की कमाई हो सकती है.
वीकेंड पर बढ़ सकती है कमाई
शनिवार और रविवार को मॉल में अक्सर ज्यादा लोग घूमने और खरीदारी करने आते हैं. इस दौरान बच्चों की भीड़ बढ़ने से कार, बाइक और ट्रेन की सवारी करने वाले बच्चों की संख्या भी बढ़ सकती है. मान लीजिए कि वीकेंड पर देशभर में 150 से 300 बच्चे इन गाड़ियों में घूमते हैं. एक बच्चे से 100 रुपये लेने पर 150 बच्चों से 15,000 रुपये और 300 बच्चों से 30,000 रुपये की कमाई होगी. इस तरह वीकेंड पर कमाई 15,000 से 30,000 रुपये तक हो सकती है. हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि मॉल में कितनी भीड़ है और कितने बच्चे इन गाड़ियों में घूमना चाहते हैं.
त्योहारों पर कितनी हो सकती है कमाई?
दिवाली, क्रिसमस, नए साल और दूसरे त्योहारों के समय मॉल में लोगों की भीड़ बढ़ जाती है. लोग परिवार के साथ खरीदारी करने और बच्चों को घुमाने भी आते हैं. ऐसे समय में बच्चों के लिए लगी कार, बाइक और ट्रेन की सवारी की मांग बढ़ सकती है. अगर त्योहार के दिन 500 बच्चे इन गाड़ियों में घूमते हैं, तो 100 रुपये प्रति बच्चा के हिसाब से 50,000 रुपये की कमाई होगी. वहीं, 1,000 बच्चे घूमते हैं, तो कुल कमाई 1 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. हालांकि, हर मॉल में इतनी भीड़ हो या हर बच्चे से 100 रुपये ही लिए जाएं, यह जरूरी नहीं है. ये आंकड़े केवल अनुमान समझाने के लिए हैं.
अब एक आसान हिसाब समझिए. अगर किसी मॉल में रोजाना 100 बच्चे कार, बाइक या ट्रेन में घूमते हैं और हर बच्चे से 100 रुपये लिए जाते हैं, तो एक दिन की कमाई 10,000 रुपये होगी. अगर महीने के सभी 30 दिन इतने ही बच्चे आते हैं, तो कुल 3,000 बच्चे सवारी करेंगे. ऐसे में 3,000 × 100 = 3,00,000 रुपये होंगे. यानी इस अनुमान के हिसाब से महीने भर में 3 लाख रुपये की कुल कमाई हो सकती है.
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