13 सितंबर, 1993 को दशकों की खूनी दुश्मनी के बाद, इज़राइल और फ़िलिस्तीन के प्रतिनिधि व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में मिले और शांति के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किया. 'डिक्लेरेशन ऑफ प्रिसंपल' इज़राइलियों और फिलिस्तीनियों के बीच उनके संघर्ष को खत्म करने की दिशा में पहला समझौता था. यह जॉर्डन नदी और भूमध्य सागर के बीच स्थित उस पवित्र भूमि को साझा करने की दिशा एक पहल थी. जिस पर दोनों देश अपना वतन होने का दावा करते हैं.
फिलिस्तीन में यहूदियों और अरबों के बीच संघर्ष 1920 के दशक से चला आ रहा है. जब दोनों समूहों ने ब्रिटिश नियंत्रण वाले क्षेत्र पर अपना दावा जताया था. यहूदी ज़ायोनिस्ट थे, जो यूरोप और रूस से हाल ही में आए प्रवासी थे.यहूदियों की प्राचीन मातृभूमि में एक यहूदी राष्ट्रीय राज्य स्थापित करने के लिए आए थे. वहीं, मूल निवासी अरब (जो उस समय खुद को फ़िलिस्तीनी नहीं कहते थे) यहूदी आप्रवास को रोकना और एक धर्मनिरपेक्ष फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना करना चाहते थे.
पीएलओ (फिलिस्तीन मुक्ति संगठन ) के चीफ यासर अराफ़ात ने 15 नवंबर, 1988 को वेस्ट बैंक और गाज़ा पट्टी में एक स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी राज्य की घोषणा की. एक महीने बाद, उन्होंने आतंकवाद की निंदा की. इज़रायल राज्य के अस्तित्व को मान्यता दी और इज़रायल के साथ 'भूमि के बदले शांति'वार्ता शुरू करने की अनुमति दी. इज़रायल ने पीएलओ के साथ सीधी बातचीत शुरू करने से इनकार कर दिया, लेकिन 1991 में मैड्रिड शांति सम्मेलन में इजरायली राजनयिकों ने जॉर्डन-फिलिस्तीन के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की.
1992 में लेबर पार्टी के नेता यित्ज़ाक राबिन इजरायली प्रधानमंत्री बने और उन्होंने शांति प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने का वादा किया. उन्होंने कब्जे वाले क्षेत्र में नई इजरायली बस्तियों के निर्माण पर रोक लगा दी और इजरायल और पीएलओ के बीच गुप्त वार्ता को अधिकृत किया, जो जनवरी 1993 में नॉर्वे के ओस्लो में शुरू हुई. इन वार्ताओं के परिणामस्वरूप कई महत्वपूर्ण समझौते हुए और 13 सितंबर, 1993 के ऐतिहासिक शांति समझौते का मार्ग प्रशस्त हुआ.
उस दिन व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में, इज़रायली विदेश मंत्री शिमोन पेरेस और पीएलओ के विदेश नीति अधिकारी महमूद अब्बास ने अंतरिम स्वशासन व्यवस्था पर डिक्लेरेशन ऑफ प्रिसिंपुल पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते में गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक के जेरिको शहर से इज़राइली सैनिकों की वापसी और एक फिलिस्तीनी सरकार की स्थापना का आह्वान किया गया था. इसे अंततः वेस्ट बैंक के अधिकांश हिस्से पर अधिकार दिया जाएगा.
राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने समारोह की अध्यक्षता की थी और पूर्व राष्ट्रपतिय जॉर्ज बुश और जिमी कार्टर सहित 3,000 से अधिक दर्शकों ने आश्चर्य से देखा कि अराफ़ात और राबिन ने हाथ मिलाकर समझौते पर मुहर लगा दी. पुराने कट्टर दुश्मन उस सुबह व्हाइट हाउस में आयोजित एक स्वागत समारोह में पहली बार मिले थे.
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