आजकल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन में लोहे की सरिया का भी विकल्प आ गया है. कई जगह निर्माण कार्य में फाइबर सरिया यानी प्लास्टिक के सरिया का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्लास्टिक की छड़, लोहे की सरिया से ज्यादा मजबूत हो सकती है और यह कितनी किफायती है और कीमत में क्या फर्क है?
प्लास्टिक की छड़ को GFRP सरिया कहा जाता है. इसका मतलब ग्लास फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीमर होता है. सीधे शब्दों में कहें तो प्लास्टिक का सरिया असल में कांच के रेशों यानी फाइबर और रेजिन के मजबूत मिश्रण से बनता है. इसकी ग्रीप और पकड़ काफी मजबूत होती है. यही वजह है कि कंस्ट्रक्शन में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है.
प्लास्टिक सरिया कई मायने में आयरन टीएमटी बार से बेहतर है. पहली खूबी तो इसमें जंग नहीं लगती है. वजन में यह काफी हल्का होता है. इस वजह से इसके ट्रांसपोर्टेशन और इस्तेमाल में आसानी होती है. माना जाता है कि इसकी मजबूती स्टील से भी दोगुनी होती है. उम्र की बात की जाए तो यह लोहे से ज्यादा टिकाऊ होती है. नमी के संपर्क में रहने के बावजूद यह 80 से 100 साल तक आराम से टिक सकता है.
इसमें करंट दौड़ने का खतरा भी नहीं होता है. इस प्लास्टिक के सरिये की एक खामी है कि यह मुड़ता नहीं है. इसलिए इसका इस्तेमाल सिर्फ खड़े कंस्ट्रक्शन में होता है. फाइबर सरिया का इस्तेमाल पुल, नालियों, डिवाइडर और अन्य निर्माण कार्यों में किया जाता है.
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अगर इसके कीमत की तुलना करें तो प्रति टन या प्रति पीस के हिसाब से यह लोहे की छड़ से महंगा होता है, लेकिन वजन कम होने की वजह से इसकी क्वांटिटी ज्यादा होती है. अगर किलोग्राम के दर से देखें तो फाइबर सरिया महंगा लगेगा, लेकिन वजन के हिसाब से यह किफायती होता है. क्योंकि, अगर आयरन टीएमटी 40 हजार रुपये टन मिल रहा है तो फाइबर सरिया 1 लाख रुपये टन मिलेगा. लेकिन, एक टन में फाइबर सरिया की क्वांटिटी लोहे के छड़ की दोगुने के बराबर या उससे थोड़ी ज्या ही हो सकती है.
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