19 सितंबर 1957 को अमेरिका ने लास वेगास से 65 मील उत्तर में स्थित 1,375 वर्ग मील के रिसर्च सेंटर, नेवादा टेस्टिंग साइट में एक अंडरग्राउंड सुरंग में 1.7 किलोटन के परमाणु बम का विस्फोट किया. रेनियर के नाम से जाना जाने वाला यह टेस्ट पहला पूरी तरह से कंट्रोल अंडरग्राउंड विस्फोट था. इससे कोई रेडियो एक्टिव रेडिएशन बाहर नहीं निकला. टेस्टिंग के लिए 218 पाउंड वजन और 25.7 इंच व्यास और 17.4 इंच लंबाई वाले W-25 वारहेड का इस्तेमाल किया गया था.
दिसंबर 1941 में, अमेरिकी सरकार ने दुनिया का पहला परमाणु हथियार बनाने का संकल्प लिया. जब राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूजवेल्ट ने मैनहट्टन प्रोजेक्ट के लिए 2 अरब डॉलर एप्रूव्ड किया था. पहला परमाणु हथियार परीक्षण 16 जुलाई 1945 को न्यू मैक्सिको के अल्मोगोर्डो के पास ट्रिनिटी साइट पर हुआ.
कुछ हफ़्ते बाद, 6 अगस्त 1945 को, जब अमेरिका जापान के साथ युद्ध में था. राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने जापान के हिरोशिमा पर लिटिल बॉय नामक परमाणु बम गिराने की अनुमति दी. तीन दिन बाद, 9 अगस्त को, फैट मैन नामक परमाणु बम नागासाकी पर गिराया गया. कुछ अनुमानों के अनुसार, इन दोनों शहरों पर हुए हमलों में दो लाख लोग मारे गए और 15 अगस्त 1945 को जापान ने मित्र देशों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.
1957 का ऑपरेशन प्लंबबॉब उस समय हुआ, जब अमेरिका सोवियत संघ के साथ शीत युद्ध और परमाणु हथियारों की होड़ में लगा हुआ था. 1963 में, अमेरिका ने सीमित परीक्षण प्रतिबंध संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसने वायुमंडल, अंडरवाटर और अंतरिक्ष में परमाणु हथियारों के परीक्षण पर प्रतिबंध लगा दिया. 1951 से 1992 के बीच नेवादा परीक्षण स्थल पर कुल 928 परीक्षण हुए, जब अमेरिका ने अपना अंतिम अंडरग्राउंड परमाणु टेस्ट किया.
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