25 जुलाई 1978 को दुनिया की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म हुआ था. इस बच्ची का नाम है - लुईस जॉय ब्राउन. लुईस इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) के माध्यम से पैदा होने वाली दुनिया की पहली बच्ची थी. लुईस का जन्म इंग्लैंड के मैनचेस्टर स्थित ओल्डहैम और डिस्ट्रिक्ट जनरल हॉस्पिटल में लेस्ली और पीटर ब्राउन के घर हुआ. इस स्वस्थ बच्ची का जन्म आधी रात से कुछ समय पहले सीज़ेरियन सेक्शन द्वारा हुआ और उसका वजन 5 पाउंड 12 औंस था.
लुईस को जन्म देने से पहले, लेस्ली ब्राउन को फैलोपियन ट्यूबों में रुकावट के कारण कई वर्षों तक बांझपन का सामना करना पड़ा था. नवंबर 1977 में, उन्होंने उस समय की प्रायोगिक आईवीएफ प्रक्रिया करवाई. उनके एक अंडाशय से एक एग निकालकर प्रयोगशाला में उनके पति के स्पर्म के साथ मिलाकर भ्रूण बनाया गया. कुछ दिनों बाद भ्रूण को उनके गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया गया.
उनके आईवीएफ डॉक्टर, ब्रिटिश स्त्री रोग विशेषज्ञ पैट्रिक स्टेप्टो और वैज्ञानिक रॉबर्ट एडवर्ड्स ने एक दशक पहले ही अपना यह प्रयास शुरू किया था. जैसे ही मीडिया को गर्भावस्था के बारे में पता चला, ब्राउन दंपति को जनता की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा. लुईस के जन्म ने दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं और कई कानूनी और नैतिक प्रश्न खड़े किए.
ब्राउन दंपति की दूसरी बेटी नताली का जन्म भी कुछ वर्षों बाद आईवीएफ के माध्यम से हुआ. मई 1999 में, नताली आईवीएफ से जन्मी पहली बच्ची बनी जिसने अपने बच्चे को जन्म दिया. बच्चे का गर्भधारण प्राकृतिक था, जिससे इस चिंता को कुछ हद तक दूर किया जा सका कि आईवीएफ से जन्मी बच्चियां स्वाभाविक रूप से गर्भवती नहीं हो सकती हैं. दिसंबर 2006 में लुईस ब्राउन, जो पहली 'टेस्ट ट्यूब बेबी' थीं. उन्होंने एक लड़के, कैमरन जॉन मुलिंडर को जन्म दिया, जिसका गर्भधारण भी प्राकृतिक रूप से हुआ था.
आज आईवीएफ को बांझपन के लिए एक प्रमुख चिकित्सा उपचार माना जाता है. दुनिया भर में इस प्रक्रिया के माध्यम से गर्भधारण कर लाखों बच्चे पैदा हो चुके हैं. कुछ मामलों में डोनर एग और स्पर्म का इस्तेमाल भी किया गया है.
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