24 अक्टूबर 1946 को पहले आर्टिफिशियल सैटेलाइट स्पुतनिक के लॉन्च से 10 साल से भी ज्यादा पहले, न्यू मैक्सिको में व्हाइट सैंड्स मिसाइल रेंज के साइंटिस्ट्स ने एक कैप्चर जर्मन V-2 बैलिस्टिक मिसाइल के ऊपर एक कैमरा लगाया. फिर इसे लॉन्च कर दिया गया. रॉकेट लगभग 65 मील की ऊंचाई पर उड़ा – जो आमतौर पर बाहरी स्पेस की बॉर्डर से ठीक ऊपर होता है. मिसाइल में लगे 35 एमएम मोशन पिक्चर कैमरे ने हर डेढ़ सेकंड में एक फ्रेम लिया. इस तरह अंतरिक्ष से पृथ्वी की पहली तस्वीरें ली गईं.
मिसाइल वापस नीचे आ गिरी और 340 मील प्रति घंटे से ज़्यादा की स्पीड से ज़मीन पर गिरी, लेकिन फिल्म बच गई. फिल्म क्रैश लैंडिंग से बच गई, क्योंकि यह स्टील के कैसेट में बंद थी.यह उपलब्धि पहली बार नहीं थी जब पृथ्वी की ढाल को देखा गया. 1935 में, एक्सप्लोरर II गुब्बारा 13.7 मील की ऊंचाई पर पहुंचा था और गोलाकार क्षितिज को देखा गया.
ग्यारह साल बाद, V-2 मिसाइल अंतरिक्ष के विशाल आयाम में पहुंचा और पृथ्वी की पहली तस्वीरें ली. दूसरे विश्व युद्ध के बाद, अमेरिकी सेना ने अमेरिकी मिसाइल रक्षा को बेहतर बनाने के लिए दर्जनों जब्त किए गए V-2 जर्मन मिसाइलों को दागा. इस दौरान शोधकर्ताओं ने कुछ मिसाइलों को वायुमंडलीय अध्ययन के लिए वैज्ञानिक उपकरणों से लैस करके छोड़ा था.
अंतरिक्ष से पहली तस्वीर खींचने वाले कैमरे के डिजाइनर क्लाइड हॉलिडे ने भी पृथ्वी पर लौटने पर इनमें से कई तस्वीरों का विश्लेषण किया. जहां तस्वीरों से भूविज्ञान और मौसम विज्ञान के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला.
1946 और 1950 के बीच, अंतरिक्ष से 1,000 से अधिक तस्वीरें वापस आईं, जिनमें से कुछ 100 मील की ऊंचाई पर ली गई थीं. दशकों बाद, अपोलो 8 के अंतरिक्ष यात्रियों ने एक और प्रसिद्ध तस्वीर खींची, जिसमें गहरे अंतरिक्ष की काली पृष्ठभूमि पर दूर से पृथ्वी दिखाई दे रही थी.
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