भारत में दिवाली का त्योहार कई दिन पहले से ही शुरू हो जाता है. बाजारों में रौनक दिखने लगती है, घर रोशनी से सज जाते हैं और हर तरफ उत्सव का माहौल नजर आता है. लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान में दिवाली की तस्वीर कुछ अलग है. वहां भी हिंदू समुदाय के लोग दिवाली मनाते हैं, घरों में पूजा करते हैं और दीपक जलाते हैं, लेकिन भारत जैसी खुली रौनक और उत्सव का माहौल हर जगह देखने को नहीं मिलता. आज हम पाकिस्तान में रह चुके लोगों से जानते हैं कि वहां दिवाली पर कैसा रहता है माहौल?
पाकिस्तान से भारत आए हिंदुओं ने वहां दिवाली मनाने के अपने अनुभव साझा किए. उनका कहना है कि पाकिस्तान में दिवाली तो मनाई जाती है, लेकिन इसका दायरा काफी सीमित रहता है. लोग अपने परिवार और समुदाय के लोगों के साथ इकट्ठा होकर पूजा-पाठ करते हैं और कुछ दीपक जलाकर त्योहार मना लेते हैं. हालांकि, भारत की तरह बाजारों में सजावट, घरों में रोशनी और सार्वजनिक तौर पर त्योहार का उत्साह नजर नहीं आता.
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी वाले कुछ इलाकों में दिवाली मनाने में ज्यादा परेशानी नहीं होती. खासकर सिंध में बड़ी संख्या में हिंदू रहते हैं. ऐसे इलाकों में समुदाय के लोग अपेक्षाकृत आसानी से अपने त्योहार मना लेते हैं. लेकिन सिंध से बाहर के कुछ इलाकों में हिंदुओं को त्योहार मनाने के दौरान मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
पाकिस्तान से आए लोगों के मुताबिक, कई जगह दूसरे धर्मों के कुछ लोग हिंदुओं के त्योहार मनाने पर आपत्ति जताते हैं. ऐसे में लोगों को कई बार सीमित दायरे में या छुपकर त्योहार मनाना पड़ता है. उनका कहना है कि होली के दौरान भी कुछ लोग हिंदुओं से दूरी बनाकर रखते हैं. वे रंग खेलने से बचते हैं और कहते हैं कि ऐसा करने से वे 'नापाक' हो जाएंगे.
यही वजह है कि पाकिस्तान में रहने वाले कई हिंदू परिवारों के लिए दिवाली सिर्फ खुशियों का त्योहार नहीं, बल्कि अपनी धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने का मौका भी है. वे अपने घरों और समुदाय के बीच पूजा-पाठ करके इस दिन को खास बनाने की कोशिश करते हैं.
हालांकि, पाकिस्तान में हर जगह हालात एक जैसे नहीं हैं. कई हिंदू बहुल इलाकों में दिवाली बड़े उत्साह से भी मनाई जाती है. लेकिन वहां से आए लोगों के अनुभव बताते हैं कि भारत में दिवाली का जो सार्वजनिक उत्सव, बाजारों की चमक और सामूहिक उल्लास दिखाई देता है, वैसा माहौल पाकिस्तान के हर हिस्से में देखने को नहीं मिलता.
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