1 अगस्त 1782 को विलियम हर्शेल की बहन कैरोलिन हर्शेल ने एक दूरबीन से धूमकेतु को देखकर उसकी खोज की. विलियम हर्शेल एक खगोलशास्त्री थे जिन्होंने एक वर्ष पहले यूरेनस की खोज की थी. यह धूमकेतु की खोज का श्रेय किसी महिला को दिया जाने वाला पहला मौका थाजर्मन मूल की ब्रिटिश महिला हर्शेल ने खगोल विज्ञान में अपना करियर अपने भाई की मदद करने से शुरू किया था.
विलियम की सहायक के रूप में, कैरोलिन हर्शेल ने उनके अध्ययनों से संबंधित कई गणनाएं कीं. 1782 में, धूमकेतु की खोज से पहले, वह अपनी डायरी में नए खगोलीय पिंडों की स्थिति दर्ज कर रही थीं.
हालांकि, कैरोलिन हर्शेल को विलियम हर्शेल की तुलना में कम श्रेय मिला, लेकिन इंग्लैंड के राजा जॉर्ज तृतीय (वही राजा जिनके खिलाफ अमेरिकियों ने क्रांतिकारी युद्ध लड़ा था) ने उनके काम को मान्यता दी और उन्हें वेतन दिया. इससे हर्शेल पहली पेशेवर महिला खगोलशास्त्री बनीं.
पहली खोज के बाद अगले 11 वर्षों में, हर्शेल ने सात और धूमकेतुओं की खोज की. खगोल विज्ञान में कई स्थान और वस्तुएं, जिनमें चंद्रमा पर स्थित सी. हर्शेल क्रेटर भी शामिल है. हर्शेल के नाम पर रखी गई हैं. हालांकि उन्हें अपने भाई जितनी प्रसिद्धि नहीं मिली. लेकिन 1876 में प्रकाशित कैरोलिन हर्शेल के संस्मरण और पत्राचार की संपादक मैरी कॉर्नवालिस हर्शेल के अनुसार , उनकी प्रसिद्ध पूर्वज विनम्र स्वभाव की थीं.
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खगोल विज्ञान में उनका योगदान उल्लेखनीय था और अपने जीवन के बाद के दिनों में उन्हें विद्वानों और विद्वान समाजों से सम्मान और मान्यता प्राप्त हुई. लेकिन उनका प्रमुख विचार हमेशा एक ही था - मैं कुछ भी नहीं हूं, मैंने कुछ भी नहीं किया है, मैं जो कुछ भी हूं, जो कुछ भी जानती हूं, वह सब मेरे भाई की देन है. मैं तो बस एक उपकरण हूं जिसे उन्होंने अपने उपयोग के लिए ढाला. एक ट्रेंड पालतू भी इतना ही कर सकता था. आज भी इंग्लैंड के बाथ शहर में स्थित हर्शेल खगोल विज्ञान संग्रहालय, हर्शेल भाई-बहनों की विरासत का जश्न मनाता है.
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