काबो वर्डे : कई छोटे द्वीपों से बना देश, भारत से है ये खास नाता

अफ्रीकी तट से 500 किलोमीटर दूर अटलांटिक महासागर में एक दर्जन द्वीपों से बना एक देश है. इसका नाम काबो वर्डे है. इस छोटे से देश के बारे में कम लोगों को पता होगा. लेकिन इसका भारत से खास नाता है.

Advertisement
काबो वर्डे अटलांटिक महासागर में कई द्वीपो से मिलकर बना एक खूबसूरत देश है (Photo - Pixabay) काबो वर्डे अटलांटिक महासागर में कई द्वीपो से मिलकर बना एक खूबसूरत देश है (Photo - Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:20 PM IST

अफ्रीका के पश्चिमी तट से दूर मध्य अटलांटिक महासागर में एक द्वीप समूह है. इसका नाम काबो वर्डे या केप वर्डे है. यह दुनिया के 195 देशों में से एक है. यह देश 10 ज्वालामुखीय द्वीपों का एक समूह है. 

काबो वर्डे गणराज्य ने 24 अक्टूबर 2013 को संयुक्त राष्ट्र में देश के स्थायी प्रतिनिधि  एक अनुरोध के बाद अपना आधिकारिक नाम केप वर्डे गणराज्य से बदलकर काबो वर्डे कर लिया. यहां प्राकृतिक संसाधनों की काफी कमी है. सूखे की आशंका और कृषि योग्य भूमि की कमी के बावजूद, काबो वर्डे या केप वर्डे द्वीपों ने राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता हासिल कर रखी. 

Advertisement

कभी यह पुर्तगाल का उपनिवेश हुआ करता था. इस द्वीप समूह के पूर्व के 10 द्वीप और पांच छोटे द्वीप पुर्तगाल के कब्जे में थे. इनमें से तीन को छोड़कर बाकी सभी पर्वतीय हैं. यह द्वीपसमूह अफ्रीका के पश्चिमी तट से लगभग 500 किलोमीटर दूर स्थित है.

यह देश एक समय दास व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र था. 20वीं शताब्दी के दौरान भीषण सूखे के कारण 200,000 लोगों की मृत्यु हुई और बड़े पैमाने पर पलायन हुआ. आज, द्वीपों में जन्मे लोगों की संख्या देश के भीतर रहने वालों की तुलना में देश के बाहर अधिक है. उनके द्वारा घर भेजे गए पैसे से देश को जरूरी  विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है.

काबो वर्डे से जुड़े फैक्ट्स

राजधानी - प्रेया

क्षेत्रफल - 4,033 वर्ग किलोमीटर

आबादी - 529,630

भाषाएं - पुर्तगाली, केप वर्डेयन क्रियोल

Advertisement

करेंसी - केप वर्डेयन एस्कुडो (CVE)

भारत से कनेक्शन
काबो वर्डे में लगभग 175 भारतीय रहते है. भारत और काबो वर्डे के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध हैं. काबो वर्डे में भारत के पहले राजदूत की नियुक्ति 6 ​​जून 1977 को हुई थी, जिनका निवास डकार में है. दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घनिष्ठ सहयोग करते हैं. काबो वर्डे ने मार्च 2018 में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए. भारत ने 26 जून 2023 से काबो वर्डे में एक स्थायी दूतावास खोला.

पिछले कई वर्षों से सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में काबो वर्डे की नियमित भागीदारी रही है. जनवरी-फरवरी 2026 में आयोजित सूरजकुंड मेले के 39वें  संस्करण में संगीतकारों, डांसर और कारीगरों के 13 सदस्यीय सांस्कृतिक दल ने काबो वर्डे की ओर से मेले में लगातार तीसरी बार हिस्सा लिया था. 

भारत ने कोविड-19 महामारी के दौरान सितंबर 2020 में काबो वर्डे को उपहार के तौर पर दवाएं दीं. काबो वर्डे को'मेड इन इंडिया' कोविड-19 वैक्सीन की 24,000 खुराकें भी दी गई थीं.  काबो वर्डे को भारत का मुख्य रूप से दवाईयां, मिट्टी के बर्तन, चावल, लोहे की छड़ें और बार और स्टील निर्यात करता है. 

काबो वर्डे का इतिहास
1462 में सैंटियागो द्वीप पर उतरे पुर्तगाल के लोगों के आने से पहले, ये द्वीप निर्जन थे. यहां कोई नहीं रहता था. केप वर्डे सस्ते निर्मित सामानों जैसे बंदूक, रम और कपड़े के व्यापार का केंद्र बन गया और अटलांटिक दास व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

Advertisement

- 1495 में यह पुर्तगाली राजशाही का उपनिवेश बन गया.

- 1956 में केप वर्डे के मूल निवासी अमिलकार कैब्रल ने गिनी-बिसाऊ में गिनी और केप वर्डे की स्वतंत्रता के लिए अफ्रीकी पार्टी (पीएआईजीसी) की सह-स्थापना की.

- 1975 में केप वर्डे स्वतंत्र हुआ और उसने गिनी-बिसाऊ के साथ एकता की परिकल्पना करने वाला संविधान अपनाया.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »