आपने स्कूल, कॉलेज या ऑफिस जाने के लिए बैकपैक यानी पीठ पर टांगने वाला बैग जरूर इस्तेमाल किया होगा. अगर आपने कभी अपने बैग को ध्यान से देखा है, तो उसके आगे की तरफ चमड़े या रबर का एक छोटा सा डायमंड के आकार का टुकड़ा नजर आया होगा. इस टुकड़े के बीच में दो छोटे कट भी बने होते हैं. ज्यादातर लोग इसे बैग की डिजाइन का हिस्सा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह छोटा सा टुकड़ा कभी पहाड़ों पर चढ़ने वाले लोगों के बहुत काम आता था?
दरअसल, बैग पर लगे इस डायमंड के आकार के टुकड़े को 'लैश टैब' (Lash Tab) कहा जाता है. इसे कुछ लोग 'पिग स्नाउट' (Pig Snout) भी कहते हैं, क्योंकि इसके बीच में बने दो कट सुअर की नाक जैसे दिखाई देते हैं. इसका असली काम बैग के बाहर रस्सी या पट्टे की मदद से जरूरी सामान बांधना था. हालांकि, आजकल कई बैग में इसका इस्तेमाल सिर्फ डिजाइन को आकर्षक बनाने के लिए भी किया जाता है.
पहाड़ों पर चढ़ने वालों के लिए क्यों बनाया गया था?
इस छोटे से टुकड़े की कहानी समझने के लिए हमें उन दिनों में जाना होगा, जब बैकपैक का इस्तेमाल मुख्य रूप से पहाड़ों पर चढ़ने और लंबी दूरी तक पैदल सफर करने वाले लोग करते थे. ऐसे सफर में लोगों को अपने साथ कई तरह के उपकरण रखने पड़ते थे. इनमें बर्फ पर चढ़ने के लिए इस्तेमाल होने वाली कुल्हाड़ी, चढ़ाई में काम आने वाले औजार और रस्सियां शामिल थीं. इन सभी चीजों को बैग के अंदर रखना आसान नहीं होता था. कुछ सामान आकार में बड़ा होता था, तो कुछ गीला या गंदा हो सकता था. ऐसे में उन्हें बैग के बाहर सुरक्षित तरीके से बांधने की जरूरत पड़ती थी.
यहीं पर इस छोटे से डायमंड की भूमिका शुरू होती थी. इसकी मदद से रस्सी या पट्टे को बैग के बाहर बांधा जा सकता था. इससे जरूरी सामान को बैग के अंदर रखने की जरूरत नहीं पड़ती थी और उसे जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला भी जा सकता था.
बीच में बने दो कट किस काम आते हैं?
अब सवाल उठता है कि इस टुकड़े के बीच में दो छोटे कट क्यों बनाए जाते हैं? दरअसल, इन कटों का इस्तेमाल रस्सी या पट्टे को निकालने और सामान बांधने के लिए किया जाता है. उदाहरण के लिए, पहाड़ पर चढ़ने वाला कोई व्यक्ति अपने बैग के बाहर कोई उपकरण बांधना चाहता है, तो वह रस्सी या पट्टे को इन कटों से निकालकर सामान को सुरक्षित तरीके से बांध सकता है. इससे सामान को बैग के साथ टिकाकर रखने में मदद मिलती है.
हालांकि, इस तरीके से सामान बांधने के लिए बैग की बनावट और उसमें मौजूद दूसरे लूप का भी महत्व होता है. सिर्फ डायमंड वाला टुकड़ा होने से हर तरह का सामान सुरक्षित तरीके से नहीं बांधा जा सकता.
फिर आजकल स्कूल और ऑफिस के बैग में क्यों दिखता है?
आज के समय में बैकपैक का इस्तेमाल सिर्फ पहाड़ों पर जाने वाले लोग नहीं करते. स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर कॉलेज के छात्रों और ऑफिस में काम करने वाले लोगों तक, बड़ी संख्या में लोग इसका इस्तेमाल करते हैं. समय के साथ पहाड़ों पर इस्तेमाल होने वाले बैग की डिजाइन आम लोगों के बीच भी लोकप्रिय हो गई. बैग बनाने वाली कंपनियों ने उसकी कई पुरानी डिजाइन को बरकरार रखा. इसी वजह से डायमंड के आकार वाला यह टुकड़ा भी रोजमर्रा के बैग का हिस्सा बन गया. आज कई कंपनियां इसे बैग को पारंपरिक और एडवेंचर वाला लुक देने के लिए लगाती हैं. हालांकि, कुछ बैग में इसका इस्तेमाल अब भी सामान बांधने के लिए किया जा सकता है.
क्या आप भी अपने बैग में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं?
अगर आपके बैग पर भी ऐसा डायमंड बना है, तो आप उसकी बनावट के हिसाब से इसमें रस्सी या उपयुक्त पट्टा लगाकर हल्का सामान बाहर बांध सकते हैं. उदाहरण के लिए, कुछ बैग में इसका इस्तेमाल छोटे उपकरण या दूसरे हल्के सामान को साथ रखने के लिए किया जा सकता है. लेकिन ध्यान रखें कि हर बैग का यह टुकड़ा भारी सामान उठाने के लिए नहीं बना होता. इसकी मजबूती, सिलाई और बैग की पूरी बनावट को देखे बिना इस पर ज्यादा वजन नहीं लटकाना चाहिए.
aajtak.in