उत्तराखंड में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान इन दिनों सुर्खियों में है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने साफ किया है कि 14 जुलाई 2026 को जारी हुई ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां अभी सुनी जा रही हैं और अंतिम सूची 3 अक्टूबर 2026 को जारी होगी. इस दौरान करीब 1 लाख 73 हजार फॉर्म-7 आवेदन मिले हैं, जिनमें से 95 हजार से ज्यादा मतदाताओं को 'इनएलिजिबल' यानी अपात्र की श्रेणी में रखा गया है. इसी मुद्दे पर कांग्रेस ने चुनाव कार्यालय पर सवाल खड़े किए हैं.
चुनाव कार्यालय के मुताबिक जिन मतदाताओं को अपात्र माना गया है, वे या तो सुनवाई के समय मांगे गए दस्तावेज नहीं दिखा पाए या खुद या परिवार के किसी सदस्य के जरिए सुनवाई में शामिल ही नहीं हुए. ऐसे मामलों में संबंधित ईआरओ या एईआरओ ने ई-साइन के जरिए मतदाता को अपात्र घोषित कर दिया, जिसके बाद सिस्टम ने अपने आप फॉर्म-7 बनाकर उस नाम को सूची से हटाने के लिए चिह्नित कर दिया.
इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी राजनीतिक दलों के साथ लगातार साझा की जा रही है. विधानसभा स्तर पर ईआरओ, जिला स्तर पर डीईओ और प्रदेश स्तर पर सीईओ मान्यता प्राप्त पार्टियों के साथ बैठकें कर रहे हैं.
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इसी बीच कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी कुमारी शैलजा ने आरोप लगाया कि 42,030 फॉर्म-7 आवेदन एईआरओ के नाम पर और 22,443 आवेदन ईआरओ के नाम पर दर्ज हुए हैं, जबकि ये सभी मतदाता पहले से ड्राफ्ट सूची में शामिल थे. उन्होंने सवाल उठाया कि जिस अधिकारी को फैसला लेना है, आवेदन उसी के नाम से कैसे दर्ज हो गए. उन्होंने उत्तराखंड और पंजाब के आंकड़ों में अंतर पर भी सवाल किया और पूछा कि क्या ये फॉर्म खुद चुनावी सॉफ्टवेयर से बन गए.
चुनाव कार्यालय ने भरोसा दिलाया है कि अंतिम सूची आने के बाद भी फॉर्म-6 के जरिए नया नाम जुड़वाया जा सकेगा. इसके लिए जरूरी दस्तावेज देने होंगे. साथ ही नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं.
अंकित शर्मा