उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच रविवार को नैनीताल-हल्द्वानी राष्ट्रीय मार्ग पर बड़ा व्यवधान पैदा हो गया. रूसी बाईपास के बल्दियाखान के पास एक विशाल पेड़ अचानक सड़क पर गिर गया, जिससे दोनों दिशाओं में यातायात पूरी तरह रुक गया. देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और बड़ी संख्या में यात्री बीच रास्ते में फंस गए.
इसी दौरान हल्द्वानी से नैनीताल जा रहे कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की नजर भी इस स्थिति पर पड़ी. उन्होंने मौके से ही राहत और बचाव अभियान की कमान संभाल ली. हालात की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने जिला आपदा प्रबंधन, पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर संपर्क किया और पेड़ को प्राथमिकता के आधार पर हटाकर रास्ता जल्द खोलने के निर्देश दिए.
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कमिश्नर ने सड़क पर फंसे लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी तत्परता के साथ मार्ग बहाल करने में जुटा है. साथ ही नागरिकों से आपदा जैसे हालात में प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और संयम बरतने की अपील की गई.
कमिश्नर के निर्देश मिलते ही एक्टिव हुआ प्रशासन
दीपक रावत के निर्देश मिलते ही प्रशासनिक मशीनरी हरकत में आ गई. सूचना मिलते ही पुलिस, फायर सर्विस और SDRF की टीमें घटनास्थल के लिए रवाना कर दी गईं. राहत दलों ने बिना समय गंवाए सड़क पर गिरे विशाल पेड़ को हटाने का काम शुरू किया, ताकि वाहनों की आवाजाही जल्द से जल्द शुरू की जा सके.
प्रशासन की तत्परता का असर महज 15 मिनट में दिखाई दिया. पुलिस, फायर सर्विस और SDRF की संयुक्त टीम मौके पर पहुंच गई. टीम ने युद्धस्तर पर अभियान चलाकर सड़क से बाधा हटाने का काम शुरू किया. भारी बारिश के बावजूद जवान और कर्मचारी लगातार रास्ता खोलने में जुटे रहे.
करीब 30 मिनट की मशक्कत के बाद सड़क को वन-वे यातायात के लिए खोल दिया गया. इसके बाद फंसे यात्रियों और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली. वाहनों की आवाजाही धीरे-धीरे शुरू हुई और मौके पर बने जाम को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने यातायात व्यवस्था संभाली.
आपदा में तालमेल को बताया सबसे बड़ी ताकत
राहत कार्य पूरा होने के बाद कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने कहा कि आपदा की स्थिति में सभी एजेंसियों का आपसी तालमेल बेहद जरूरी है. उनके मुताबिक, पुलिस, प्रशासन, आपदा प्रबंधन, फायर सर्विस और SDRF के समन्वित प्रयास से आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ उनका प्रशासन पर भरोसा भी मजबूत होता है.
इस पूरे घटनाक्रम में कमिश्नर की मौके पर मौजूदगी और तत्काल निर्णय लेने की पहल चर्चा में रही. भारी बारिश और हाईवे पर गिरे पेड़ से पैदा हुई चुनौती के बीच उन्होंने अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, जिससे राहत अभियान में देरी नहीं हुई.
घटना ने एक बार फिर दिखाया कि प्राकृतिक आपदा या अचानक पैदा हुई आपात स्थिति में त्वरित निर्णय, संवेदनशील नेतृत्व और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय कितना महत्वपूर्ण है. प्रशासन की सक्रियता से हाईवे पर फंसे यात्रियों को जल्द राहत मिली और मार्ग पर यातायात दोबारा शुरू हो सका.
लीला सिंह बिष्ट