धंसती जमीन, मलबे में तब्दील होते घर... CM धामी की हाई लेवल मीटिंग, खुद भी पहुंचे जोशीमठ

उत्तराखंड के शहर जोशीमठ में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. यहां घरों और सड़कों में खतरनाक दरारें आ गई हैं. लोग भीषण सर्दी में बाहर सोने के लिए मजबूर हैं. लोगों के आशियाने मलबे में तब्दील होते जा रहे हैं. ऐसे में सीएम धामी प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने और प्रभावित परिवारों से मिलने जोशीमठ पहुंचे.

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जोशीमठ में मकान मलबे में तब्दील होते जा रहे हैं जोशीमठ में मकान मलबे में तब्दील होते जा रहे हैं

अंकित शर्मा

  • जोशीमठ,
  • 07 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 9:10 PM IST

उत्तराखंड के जोशीमठ में जमीन धंस रही है, घरों पर पड़ने वाली दरारें लोगों की धड़कनें बढ़ा रही हैं. पवित्र बद्रीनाथ धाम से महज 45 किलोमीटर दूर जोशीमठ में हैरान करने वाला मंजर है. कई इलाकों में लैंडस्लाइड और दरकती दीवारों की वजह से लोग दहशत में जीने को मजबूर हैं. वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने और प्रभावित परिवारों से मिलने शनिवार को जोशीमठ पहुंचे. 

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सीएम धामी माउंट व्यू होटल पहुंचे. जहां वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और SDRF की टीमों को तैनात किया गया था. दरअसल, माउंट व्यू और मल्लारी होटल जमीन धंसने के कारण आपस में टकरा गए हैं. इन होटलों के पीछे के इलाके में कई घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं.

मुख्यमंत्री ने जोशीमठ का हवाई सर्वेक्षण किया. धामी ने दौरा करने के बाद कहा कि जोशीमठ हमारे लिए एक महत्वपूर्ण और सांस्कृतिक स्थान है. हमारा मुख्य मकसद सभी को बचाना है. विशेषज्ञ इसके कारणों को जानने की कोशिश कर रहे हैं. हम लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रखने की कोशिश कर रहे हैं.

एक्सपर्ट बोले- बहुत नाजुक दौर में हैं हम

हिमालयन भूविज्ञान पर 35 साल से ज्यादा समय से शोध कर रहे एचएनबी गढ़वाल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर यशपाल सुंदरियाल ने बताया कि पहाड़ के ज्यादार गांव, शहर भूस्खलन के मलबे या स्लोप पर बने हैं. हम बहुत नाज़ुक दौर में हैं. इस पर सरकार को एक्शन लेना होगा. जोशीमठ को अभी भी बचाया जा सकता है

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जोशीमठ की नींव कैसे हुई कमजोर?

प्रोफेसर सुंदरियाल ने बताया कि जिस तेज़ी से जोशीमठ में विकास किया जा रहा है, वो कई सालों से समस्या का कारण बन हुआ है. 1946 में जाने माने भू-वैज्ञानिक औगुस्तों गैंसर ने अपने शोध में कहा था कि जोशीमठ भूस्खलन के मलबे पर बसा हुआ एक शहर है. प्रोफेसर सुंदरियाल ने बताया कि जोशीमठ की सतह में चट्टान कम और मिट्टी ज्यादा है और खराब पानी प्रबंधन, सीवर प्रबंधन की वजह से वहां से पानी रिसाव होता रहता है. इस वजह से जोशीमठ की नींव कमज़ोर हो गई.

'फैब्रिकेटिड मकान ही बनने चाहिए'

प्रोफेसर सुंदरियाल ने कहा कि एनटीपीसी के विष्णु गरुड़ प्रोजेक्ट के तहत टनल में जो विस्फोट किए जा रहे हैं, वो इतने शक्तिशाली हैं कि आर्टिफिशल भूकम्प पैदा कर रहे हैं. दरअसल, जोशीमठ एक स्लोप पर बसा शहर है और उत्तराखंड के अधिकांश क्षेत्र स्लोप या भूस्खलन के मलबे पर बसे हैं. अगर उनकी नींव में दरार आएगी तो ज़मीन  धंसेगी ही. एनटीपीसी द्वारा बनाए जा रहे फैब्रिकेटेड मकानों के बारे में सुंदरियाल ने कहा कि हिमलयी क्षेत्रों में फैब्रिकेटिड मकान ही बनने चाहिए.


मलबे में तब्दील हो रहे घर

जोशीमठ में कई घर अब मलबे में तब्दील हो रहे हैं. सड़कों में खतरनाक दरारें पड़ चुकी हैं. इतना ही नहीं, जोशीमठ में इन दरारों के चलते भगवती मंदिर भी ढह गया है. यहां रहने वाले लोगों में भय और घबराहट लगातार बढ़ती जा रही है. जोशीमठ में तेजी से बढ़ रही तबाही के कारण छतों के गिरने की आशंका है. लिहाजा कड़ाके की ठंड में लोग अपने घरों के बाहर सोने को मजबूर हैं. क्योंकि उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि न जाने कब घर की छत धंस जाए.

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कुछ होटल दरार आने से झुके

एजेंसी के मुताबिक आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत सिन्हा ने बताया कि एक सर्वेक्षण में पता चला है कि पहले सुरक्षित स्थानों में नई दरारें आ गई हैं, जबकि कुछ होटल भी झुक गए हैं, उनमें दरारें आ गई हैं. इसके चलते कुछ स्थानों पर पानी जमीन से निकल रहा है. जमीन फाड़कर निकलने वाला पानी चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है. क्योंकि हमें प्रभावित लोगों को वहां से शिफ्ट करना है. 

 

ये ऑप्शन किया तैयार

प्रभावित परिवारों को शिफ्ट करने के लिए जिला प्रशासन ने एनटीपीसी और एचसीसी कंपनियों को एहतियातन अग्रिम रुप से 2-2 हजार प्री-फेब्रिकेटेड मकान तैयार कराने के भी आदेश जारी किए हैं.

सीएम धामी की हाई लेवल मीटिंग

जोशीमठ में हो रहे भू-धंसाव को लेकर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने आज शाम 6 बजे हाई लेवल मीटिंग बुलाई गई है. सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गढ़वाल कमिश्नर सुशील कुमार, आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत कुमार सिन्हा, आपदा प्रबंधन के अधिशासी अधिकारी पीयूष रौतेला, एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट रोहितास मिश्रा, भूस्खलन न्यूनीकरण केंद्र के वैज्ञानिक सांतुन सरकार, आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर डा.बीके माहेश्वरी सहित तकनीकी विशेषज्ञों की पूरी टीम जोशीमठ पहुंच गई है. जोशीमठ में 600 से ज्यादा घरों में दरारें आ चुकी हैं. लोग भीषण ठंड में डेरा डाले हुए हैं.

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