उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर हालिया लॉन्ग वीकेंड के दौरान रिकॉर्ड भीड़ जुटने से ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई. 2 से 4 अक्टूबर के दौरान प्रदेश के बॉर्डर पर लगे एएनपीआर कैमरों में रोजाना लगभग एक लाख बाहरी राज्यों की गाड़ियां दर्ज की गईं. कैंची धाम और आसपास के इलाकों में घंटों लंबा जाम लगने से पर्यटक और स्थानीय लोग बेहाल हो गए. दूसरी ओर, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जैसे जिले खाली रहे. इस असंतुलित दबाव के कारण पर्यावरणविदों और राजनीतिक दलों ने प्रदेश की वहन क्षमता और ट्रैफिक प्रबंधन नीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
बॉर्डर पर गाड़ियों का भारी जमावड़ा
परिवहन विभाग के एएनपीआर कैमरों के आंकड़ों के मुताबिक 2 अक्टूबर को बॉर्डर की 10 चेकपोस्टों पर 1,01,840 बाहरी वाहन दर्ज हुए. 3 अक्टूबर को यह संख्या 93,197 और 4 अक्टूबर को 90,077 रही. यदि स्थानीय और बाहरी दोनों वाहनों को मिला दिया जाए तो 2 अक्टूबर को कुल 1,60,091 वाहन डिटेक्ट किए गए. 3 अक्टूबर को 1,56,991 और 4 अक्टूबर को 1,46,285 वाहन दर्ज हुए. अपर आयुक्त परिवहन शैलेश तिवारी ने कहा कि ये आंकड़े चिंताजनक हैं और शासन के साथ मिलकर कैरिंग कैपेसिटी पर मंथन की योजना बनाई जा रही है.
ट्रैफिक का बढ़ता दबाव और पर्यावरणीय खतरा
ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के पर्यावरण विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अवनीश चौहान का कहना है कि पहाड़ों में लगातार बढ़ता ट्रैफिक बड़े खतरे की ओर इशारा कर रहा है. दिल्ली, हरियाणा और एनसीआर से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं. डॉ. चौहान के अनुसार, सड़कों का बेतरतीब निर्माण और बिना क्षमता आंके सड़क चौड़ीकरण भी ट्रैफिक बढ़ाने की वजह है. पहाड़ों की एक निश्चित वहन क्षमता होती है. सड़कें चौड़ी होने से वाहनों की पहुंच आसान होती है, जिससे वाहनों का दबाव बढ़ता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है.
पर्यटन के असंतुलित फैलाव पर सवाल
उत्तराखंड में एक तरफ कैंची धाम, नैनीताल, देहरादून, ऋषिकेश और चारधाम रूट पर गाड़ियों का भारी लोड है, तो दूसरी तरफ बागेश्वर, अल्मोड़ा, रानीखेत और पिथौरागढ़ जैसे पहाड़ी इलाकों में सन्नाटा पसरा हुआ है. इस असंतुलन से स्थानीय अर्थव्यवस्था और टैक्सियों के कारोबार पर असर पड़ रहा है. जो सफर महज ढाई घंटे का था, उसे तय करने में लोगों को कई-कई घंटे लग रहे हैं. इस स्थिति के चलते स्थानीय निवासियों, एम्बुलेंस और मरीजों को जाम में फंसकर भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
विपक्ष का वार, आंदोलन की चेतावनी
सोशल एक्टिविस्ट अनूप नौटियाल के अनुसार, उत्तराखंड में देहरादून, नैनीताल, कैंची धाम, ऋषिकेश और चारधाम रूट जैसे 5 प्रमुख पर्यटन हॉटस्पॉट बन चुके हैं. हालांकि, असल समस्या पर्यटकों से ज्यादा उनकी गाड़ियों की अनियंत्रित संख्या और बॉर्डर पर खराब प्रबंधन की है. केंद्र और राज्य सरकारें जंगलों का सफाया करके सिर्फ रोड कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दे रही हैं.
उनका कहना है कि सरकार का मकसद केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके अनुभव को बेहतर बनाना और स्थानीय लोगों की समस्याओं को हल करना होना चाहिए. इसके लिए उत्तराखंड में रीजनल कैरिंग कैपेसिटी का अध्ययन करने, बॉर्डर पर टूरिस्ट हब विकसित करने और कंजेशन प्राइसिंग लागू करने की तत्काल आवश्यकता है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता करण महारा के अनुसार, उत्तराखंड में 12-12 घंटे का लंबा जाम लग रहा है, जिससे मरीज, एंबुलेंस, स्थानीय लोग और श्रद्धालु बेहाल हैं. कैंची धाम में लगने वाले जाम का असर रानीखेत, अल्मोड़ा और पूरे पहाड़ पर पड़ रहा है, जबकि बागेश्वर, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जैसे इलाके खाली पड़े हैं.
उन्होंने कहा कि कैंची धाम के लिए वैकल्पिक मार्ग का प्रस्ताव पिछले 5 वर्षों से ठंडे बस्ते में है और स्थानीय टैक्सियों को काम नहीं मिल रहा. सरकार को बाईपास, पार्किंग और वैकल्पिक मार्गों के साथ स्थायी ट्रैफिक प्लान लागू करना चाहिए. यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो कांग्रेस होटल एसोसिएशन और जनता के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करेगी.
अंकित शर्मा