हल्द्वानी के गोरापड़ाव इलाके में 19 अगस्त को शहर के कुछ कारोबारी और कथित तौर पर जुए के खेल में शामिल लोगों के ठिकाने पर डकैती की वारदात सामने आई. इस मामले का पुलिस ने 72 घंटे में खुलासा करने का दावा किया है. हालांकि, कार्रवाई के बाद कई ऐसे सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनका जवाब पुलिस के सामने अभी बाकी है.
आरोप है कि बदमाशों ने खुद को SOG का सदस्य बताकर वहां मौजूद लोगों को डराया और करीब 8 लाख रुपये नकद के साथ सोने की मोटी चेन और अंगूठियां लूट लीं. वारदात के दौरान पहचान छिपाने के लिए CCTV का DVR भी अपने साथ ले गए. पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है.
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पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 66 हजार रुपये बरामद किए गए हैं. वहीं, कथित तौर पर लूटी गई रकम करीब 8 लाख रुपये बताई जा रही है और सोने के आभूषण भी गायब हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बाकी रकम और जेवर कहां हैं. कथित मास्टरमाइंड यश सिडाना समेत गैंग के कई सदस्य अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर बताए जा रहे हैं.
डकैतों को पता था जुए के अड्डे का ठिकाना, पुलिस क्यों रही अनजान?
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू कथित जुए का वह अड्डा है, जहां वारदात हुई. पुलिस की जानकारी के मुताबिक, बदमाशों के गिरोह ने पहले इलाके की रेकी की और फिर पूरी तैयारी के साथ वहां पहुंचकर वारदात को अंजाम दिया. आरोप है कि गैंग का सरगना खुद मौके पर आया, वहां की गतिविधियां देखीं और फिर साथियों के साथ वापस पहुंचा.
यहीं से पुलिस के सूचना तंत्र को लेकर सवाल उठ रहे हैं. यदि आरोपों के मुताबिक वहां लंबे समय से जुए का खेल चल रहा था और बदमाशों को इसकी जानकारी मिल गई, तो पुलिस तक इसकी सूचना क्यों नहीं पहुंची. एक्सपर्ट्स की ओर से इसे पुलिस के इंटेलिजेंस सिस्टम की विफलता के तौर पर देखा जा रहा है.
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पुलिस ने शुक्रवार को हल्द्वानी में कार्रवाई की जानकारी दी. SSP मंजूनाथ टीसी ने कहा कि किसी के जुआ खेलने का मतलब यह नहीं है कि कोई दूसरा व्यक्ति उस पर डकैती डालने का हकदार हो जाता है. उन्होंने जुए को अपेक्षाकृत छोटा अपराध बताते हुए कहा कि इसकी सजा छह महीने तक हो सकती है.
8 लाख कैश और सोने के जेवर, बरामदगी सिर्फ 66 हजार
SSP के बयान के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर पुलिस को जुए के अड्डे की जानकारी नहीं थी तो वहां होने वाली गतिविधियों पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई. पुलिस फिलहाल जुए में शामिल लोगों के खिलाफ हुई किसी कार्रवाई के बारे में विस्तृत जानकारी देने की स्थिति में नहीं है. इससे यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या इस गतिविधि की जानकारी स्थानीय स्तर पर पहले से थी.
हालांकि, इन सवालों के बीच यह भी स्पष्ट है कि जुआ खेलना किसी भी व्यक्ति को लूट या डकैती का शिकार बनाने का औचित्य नहीं देता. पुलिस के सामने अब दो स्तर पर जांच की चुनौती है. एक तरफ डकैती में शामिल आरोपियों को पकड़ना है, वहीं दूसरी तरफ कथित जुए के अड्डे से जुड़ी गतिविधियों की भी पड़ताल करनी होगी.
सबसे बड़ा सवाल बरामदगी को लेकर है. करीब 8 लाख रुपये नकद और सोने की चेन-अंगूठियां लूटे जाने के दावे के बीच सिर्फ 66 हजार रुपये की बरामदगी हुई है. पुलिस को अब बाकी रकम और कथित आभूषणों का पता लगाना होगा. साथ ही फरार आरोपियों और कथित मास्टरमाइंड यश सिडाना की गिरफ्तारी भी जांच की अहम कड़ी है.
पुलिस के सामने कई अनसुलझे सवाल
मामले में पुलिस की कार्रवाई के बावजूद कहानी अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है. CCTV का DVR गायब है, कई आरोपी फरार बताए जा रहे हैं और कथित लूट की बड़ी रकम के मुकाबले बरामदगी काफी कम है. ऐसे में पुलिस को वारदात की पूरी कड़ी जोड़ने के लिए आरोपियों से पूछताछ, तकनीकी साक्ष्यों और अन्य सबूतों पर निर्भर रहना होगा.
पूरे घटनाक्रम ने कानून व्यवस्था के साथ-साथ पुलिस के सूचना तंत्र पर भी सवाल खड़े किए हैं. सवाल यह नहीं है कि जुए में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए या नहीं, बल्कि यह है कि यदि कथित जुए का अड्डा बदमाशों की नजर में था तो पुलिस की निगाह से वह कैसे बचा रहा.
फिलहाल, पुलिस फरार आरोपियों की तलाश और बरामदगी बढ़ाने की कोशिश में जुटी है. जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कथित 8 लाख रुपये और सोने के आभूषणों का क्या हुआ. साथ ही यह भी सामने आना बाकी है कि जुए के अड्डे की गतिविधियों की पुलिस को जानकारी थी या नहीं. यही सवाल इस पूरे मामले को साधारण डकैती से आगे ले जाकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बना रहे हैं.
लीला सिंह बिष्ट