भारत की सबसे लंबी ट्रांसपोर्ट सुरंग का ब्रेकथ्रू, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में इंजीनियरिंग की ऐतिहासिक सफलता

यह सुरंग ऋषिकेश-कर्णप्रयाग ब्रॉड गेज रेलवे लाइन का हिस्सा है, जो राज्य में कनेक्टिविटी बढ़ाने के साथ तीर्थ स्थलों को जोड़ने, पर्यटन को प्रोत्साहन देने, स्थानीय व्यवसायों को सहयोग देने और यात्रा समय को काफी कम करने का काम करेगी. इस लाइन से देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, गौचर और कर्णप्रयाग जैसे शहर सीधे जुड़ेंगे, जिससे देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली- कुल 5 जिलों को लाभ मिलेगा.

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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत सुरंग संख्या टी-8 और टी-8एम में सफलता मिली (पीटीआई) ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत सुरंग संख्या टी-8 और टी-8एम में सफलता मिली (पीटीआई)

पीयूष मिश्रा

  • देहरादून,
  • 16 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 11:32 PM IST

भारत ने बुधवार को रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर में एक अहम मील का पत्थर पार किया, जब ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की टनल नंबर-8 में सफलतापूर्वक ब्रेकथ्रू (सुरंग से आर-पार निकलना) हुआ. 14.58 किलोमीटर लंबी यह सुरंग देश की सबसे लंबी ट्रांसपोर्ट टनल बनने जा रही है, जो जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश की मौजूदा रेल और सड़क सुरंगों को पीछे छोड़ देगी.

इस ऐतिहासिक मौके पर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी भी मौजूद रहे. यह ब्रेकथ्रू उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में संपर्क सुधारने और यात्रा का समय घटाने के उद्देश्य से बनाई जा रही इस परियोजना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

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कुल पांच जिलों को मिलेगा लाभ

यह सुरंग ऋषिकेश-कर्णप्रयाग ब्रॉड गेज रेलवे लाइन का हिस्सा है, जो राज्य में कनेक्टिविटी बढ़ाने के साथ तीर्थ स्थलों को जोड़ने, पर्यटन को प्रोत्साहन देने, स्थानीय व्यवसायों को सहयोग देने और यात्रा समय को काफी कम करने का काम करेगी. इस लाइन से देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, गौचर और कर्णप्रयाग जैसे शहर सीधे जुड़ेंगे, जिससे देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली- कुल 5 जिलों को लाभ मिलेगा.

प्रोजेक्ट के तहत कुल 213.57 किमी सुरंगों का निर्माण

कठिन हिमालयी भूभाग में इस सुरंग का निर्माण करना इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. इस परियोजना में कुल 213.57 किलोमीटर सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें 16 मुख्य सुरंगें (104 किमी), 12 बचाव सुरंगें (97.72 किमी) और 7.05 किमी की क्रॉस पैसेजेस शामिल हैं. अब तक 195 किलोमीटर सुरंग निर्माण पूरा हो चुका है.

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यह परियोजना इस मायने में भी ऐतिहासिक है कि यह हिमालयी क्षेत्र में भारतीय रेल द्वारा टनल बोरिंग मशीन (TBM) का पहला सफल प्रयोग है. TBM की मदद से 10.4 किमी की सुरंग बनाई गई, जबकि बाकी हिस्सा न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) से बनाया गया.

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