मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम हो गया बनारस, रेल मंत्री ने किया ट्वीट

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अनुमति के बाद मंडुआडीह रेलवे स्टेशन बनारस के नाम से जाना जाएगा.

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पीयूष गोयल बोले, इस स्टेशन का नाम होगा बनारस पीयूष गोयल बोले, इस स्टेशन का नाम होगा बनारस

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 7:40 PM IST
  • केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने दी जानकारी
  • यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दी मंजूरी
  • पीएम के संसदीय क्षेत्र स्थित रेलवे स्टेशन का नाम बदला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में स्थित मंडुआडीह रेलवे स्टेशन अब बनारस के नाम से जाना जाएगा. केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर इस संबंध में जानकारी दी है. उन्होंने लिखा है कि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अनुमति के बाद मंडुआडीह रेलवे स्टेशन बनारस के नाम से जाना जाएगा.

गोयल ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के मंडुआडीह स्टेशन को अब पूरे देश में लोकप्रिय व प्रसिद्ध नाम बनारस से जाना जाएगा. उत्तर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल द्वारा, केंद्र सरकार के अनापति पत्र के आधार पर इस स्टेशन का नाम परिवर्तित कर बनारस रखने की अनुमति दी गई.'

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इससे पहले 17 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलने के लिए मंजूरी दी थी. उत्तर प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यूपी के मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘बनारस’ करने की मंजूरी दी है.

उत्तर प्रदेश सरकार ने वाराणसी जिले में रेलवे स्टेशन का नाम बदलने के लिए आग्रह भेजा था. जिसके बाद मार्च में ही यूपी सरकार को मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘बनारस’करने के लिए एक एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) जारी किया गया था.

बता दें कि पिछले साल, पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में रेलवे स्टेशन का नाम बदलने के लिए लिखा था. सिन्हा अब जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल नियुक्त किए जा चुके हैं, उन्हें 6 अगस्त को इस पद पर नियुक्त किया गया था.

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गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) नाम बदलने के लिए वर्तमान दिशा-निर्देशों के मुताबिक संबंधित एजेंसियों से विचार-विमर्श करता है. एक अन्य अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्रालय किसी भी स्थान का नाम बदलने के प्रस्ताव को रेल मंत्रालय, डाक विभाग और सर्वे ऑफ इंडिया से अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC लेने के बाद ही मंजूरी देता है.

दरअसल, किसी गांव या शहर या नगर का नाम बदलने के लिए शासकीय आदेश की जरूरत होती है और MHA नोडल मंत्रालय है. ऐसे में यदि कोई राज्य किसी जिले या रेलवे स्टेशन का नाम बदलना चाहता है तो उसे अपना अनुरोध केंद्र सरकार के कई विभागों और एजेंसियों जैसे कि इंटेलिजेंस ब्यूरो, डाक विभाग, भारतीय भौगोलिक सर्वेक्षण और रेलवे मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजना होता है.

इन सभी विभागों से एनओसी मिलने के बाद गृह मंत्रालय नाम बदलने को मंजूरी दे सकता है. इसके अलावा किसी राज्य के नाम में बदलाव के लिए संसद में साधारण बहुमत से संविधान में संशोधन की जरूरत होती है.

2017 में सत्ता में आने के तुरंत बाद, योगी आदित्यनाथ सरकार ने MHA को भारतीय जनसंघ के विचारक दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलने के लिए अनुरोध किया था. जिसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी के साथ यह स्टेशन पंडित दीनदयाल के नाम से ही जाना जा रहा है. उत्तर प्रदेश सरकार ने दो साल पहले इलाहाबाद का नाम भी बदलने के लिए आवेदन किया था जिसके बाद इसे बदलकर प्रयागराज कर दिया गया था.

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