आंध्र प्रदेश में गणेश चतुर्थी की तैयारियों के बीच ईस्ट गोदावरी के कडियम मंडल की एक नर्सरी लोगों का ध्यान खींच रही है. यहां मिट्टी या प्लास्टर ऑफ पेरिस से नहीं, बल्कि जीवित पौधों से भगवान गणेश की प्रतिमा तैयार की गई है.
पोट्टिलंका स्थित मुरुगन नर्सरी में युवा किसान दूलम धनराजू ने करीब दो साल की मेहनत से पौधों को उगाकर और आकार देकर 9 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा तैयार की है. वह इसे 'वृक्ष गणपति' या 'लिविंग गणेशा' कहते हैं. यह प्रतिमा करीब 9 फीट ऊंची और 4 फीट चौड़ी है. इसे बनाने के लिए प्रतिमा को तराशने के बजाय पौधों को धीरे-धीरे भगवान गणेश का आकार दिया गया.
इसकी शुरुआत लोहे के एक ढांचे से हुई, जिससे प्रतिमा की बुनियादी रूपरेखा तैयार की गई. इसके बाद ढांचे के चारों ओर चार मालपिघिया के पौधे लगाए गए. अगले दो वर्षों तक धनराजू ने नियमित रूप से पौधों की छंटाई की, शाखाओं को बांधा और उन्हें ढांचे की रूपरेखा के अनुसार बढ़ने के लिए दिशा दी. समय के साथ शाखाओं ने प्राकृतिक रूप से ढांचे को भर दिया और हरे पत्तों के साथ गणेश की पहचान योग्य आकृति तैयार हो गई.
10वीं तक की है पढ़ाई
धनराजू ने कक्षा 10 तक पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने पौधों से कलात्मक आकृतियां बनाने की रुचि के चलते नर्सरी का कारोबार शुरू किया. उन्होंने शतरंज की गोटियों, गिटार, गार्डन लैंप और अलग-अलग फूलों के आकार समेत कई डिजाइनों पर प्रयोग किए हैं. उनके मुताबिक, पौधों से बनाई गई उनकी कुछ रचनाएं देश के अलग-अलग हिस्सों के ग्राहकों ने खरीदी हैं.
हालांकि, 'लिविंग गणेशा' बिक्री के लिए नहीं है. धनराजू का कहना है कि यह प्रतिमा भगवान गणेश के प्रति उनकी भक्ति के साथ-साथ इस विश्वास को भी दर्शाती है कि पौधों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना कला बनाई जा सकती है.
अपूर्वा जयचंद्रन