तेलंगाना के निर्मल जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. शहर के मंजुलापुर स्थित जिला परिषद हाई स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है. स्कूल में करीब 250 छात्र पढ़ते हैं, लेकिन पूरे स्कूल में सिर्फ एक ही टॉयलेट इस्तेमाल करने लायक है. इस वजह से हर दिन छात्रों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. सबसे ज्यादा परेशानी 130 छात्राओं को झेलनी पड़ रही है. स्कूल में सिर्फ एक टॉयलेट होने के कारण उन्हें रोज लंबी लाइन में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है. कई बार उन्हें काफी देर तक लाइन में खड़ा रहना पड़ता है. इससे उन्हें असुविधा होती है और पढ़ाई पर भी असर पड़ता है.
छात्राओं का कहना है कि कई बार उन्हें स्कूल के समय में टॉयलेट जाने की जरूरत होने के बावजूद इंतजार करना पड़ता है. कुछ छात्राएं अपनी बारी आने तक काफी देर तक रुकने के लिए मजबूर होती हैं. इससे उन्हें शारीरिक असहजता होती है और कक्षा में पढ़ाई के दौरान ध्यान लगाने में भी परेशानी आती है.
लड़के खुले में शौच करने को मजबूर
स्कूल में लड़कों की स्थिति भी बेहतर नहीं है. टॉयलेट की कमी के कारण कई लड़के खुले में शौच करने को मजबूर हो जाते हैं. यह स्थिति स्कूल में मौजूद बुनियादी सुविधाओं की कमी को साफ तौर पर दिखाती है. इस पूरे मामले ने स्कूल की स्वच्छता व्यवस्था, छात्रों की गरिमा और पढ़ाई के माहौल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक सरकारी स्कूल में इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के लिए केवल एक टॉयलेट होना शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को सामने लाता है.
यह स्थिति उन दावों पर भी सवाल उठाती है जिनमें सरकारी स्कूलों में शिक्षा और सुविधाओं को बेहतर बनाने की बात कही जाती है. स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और पढ़ाई के स्तर को सुधारने पर लगातार जोर दिया जाता है, लेकिन अगर छात्रों को टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो, तो इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और दैनिक जीवन पर पड़ता है.
अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिलना भी उतना ही जरूरी है. उनका मानना है कि स्कूल में पर्याप्त टॉयलेट होने चाहिए ताकि किसी भी छात्र या छात्रा को अपनी बारी के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े.
स्थानीय लोगों ने भी शिक्षा विभाग से इस समस्या पर तुरंत ध्यान देने की मांग की है. उनका कहना है कि स्कूल में जल्द से जल्द अतिरिक्त टॉयलेट बनाए जाएं और स्वच्छता से जुड़ी सुविधाओं में सुधार किया जाए. उनका मानना है कि यदि इस समस्या को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो इसका असर छात्रों की सेहत, उनकी नियमित उपस्थिति और पढ़ाई पर पड़ सकता है.
सम्मानजनक माहौल के लिए जरूरी हैं पर्याप्त टॉयलेट
मंजुलापुर के जिला परिषद हाई स्कूल की यह तस्वीर याद दिलाती है कि अच्छी शिक्षा केवल किताबों, शिक्षकों और कक्षाओं तक सीमित नहीं होती. छात्रों को बेहतर शिक्षा देने के लिए स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं भी उतनी ही जरूरी हैं. टॉयलेट जैसी आवश्यक सुविधा केवल स्वच्छता का विषय नहीं है, बल्कि यह हर छात्र के सम्मान, स्वास्थ्य और बेहतर सीखने के माहौल से भी जुड़ी हुई है. जब तक ऐसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी, तब तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य अधूरा ही रहेगा.
अब्दुल बशीर