सुप्रीम कोर्ट ने फर्जीवाड़ा करने वाले मेडिकल इंस्टिट्यूट पर ठोका 2 करोड़ का जुर्माना

तेलंगाना के मेडिकल इंस्टिट्यूट पर फर्जीवाड़ा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दो करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है. कोर्ट ने जुर्माने की रकम 4 हफ्ते में सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड ट्रस्ट में जमा कराने का आदेश दिया है.

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अजीत तिवारी / संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 08 अगस्त 2018,
  • अपडेटेड 11:04 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने फर्जीवाड़ा करने वाले तेलंगाना के मेडिकल इंस्टिट्यूट पर दो करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है. इस इंस्टिट्यूट ने पहले फर्जीवाड़ा किया और इसके लिए MCI ने कार्रवाई की तो सुप्रीम कोर्ट में अपील भी की. जस्टिस शरद बोबड़े और एल नागेश्वर राव की पीठ ने जुर्माने की रकम दो करोड़ रुपये 4 हफ्ते में सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड ट्रस्ट में जमा कराने का आदेश दिया है.

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विकराबाद के महावीर इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम को प्रभावित करने के लिए स्वस्थ लोगों को फर्जी तौर पर मरीज बना कर भर्ती कर लिया था. जब MCI की टीम वहां का दौरा करने पहुंची तो इस फर्ज़ीवाड़े का खुलासा हुआ. दरअसल MCI की टीम ये देखने पहुंची थी कि मेडिकल कॉलेज में बुनियादी और तकनीकी सुविधाएं डॉक्टरी की शिक्षा देने लायक हैं या नहीं.

जांच के दौरान टीम ने कॉलेज में कई कमियां देखीं. इनमें इलाज के लिए जरूरी उपकरणों और बुनियादी सुविधाओं की कमी समेत कई बातें शामिल थीं. इसके बाद MCI की रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस को 2018-19 के लिए छात्रों का दाखिला करने से रोक लिया.

इसके खिलाफ कॉलेज सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. फर्जीवाड़ा करने वाले मेडिकल इंस्टिट्यूट की वकालत के लिए सीनियर एडवोकेट और पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी पेश हुए. कॉलेज की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दावा किया कि MCI ने रिपोर्ट में बेवजह सख्ती बरती गई है. उनका कहना था कि कॉलेज के हक में जाने वाली अहम बातों पर ध्यान नहीं दिया गया. कई ऐसी कमियां गिनाई गई जो असल में हैं ही नहीं.

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ने कहा कि वो मेडिकल कॉलेज की सुविधाओं की समीक्षा करने के लायक नहीं है. ऐसा करना विशेषज्ञों का काम है. विशेषज्ञ टीम ने जांच कर जो रिपोर्ट दी है, उसमें दखल देने की कोई वजह नजर नहीं आती.

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