राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को भारत की युवा पीढ़ी पर भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि वे "जेन Z पर आंख मूंद करके भरोसा करेंगे." उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि छात्रों को बेहतर सिस्टम के लिए विरोध करने का पूरा अधिकार है. एक कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने कहा कि उन्हें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हालिया टकराव के सही जानकारी नहीं पता हैं, लेकिन युवाओं पर उनका भरोसा अटूट है।
भागवत ने कहा, "मैं जेन Z पर आंख बंद करके भरोसा करूंगा." उन्होंने कहा कि उन्हें देश के युवाओं की नीयत और उम्मीदों पर भरोसा है.
'कभी नहीं कहूंगा कि जेन Z को विरोध नहीं करना चाहिए'
एंटी पेपर लीक प्रोटेस्ट पर युवाओं के विरोध और लोकतांत्रिक बातचीत का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध बातचीत का एक ज़रिया है.
उन्होंने कहा, "लोकतंत्र बातचीत के बाद आम सहमति बनाने का एक तरीका है. शिकायतें जायज़ हैं, और हमारे देश की शिक्षा प्रणाली में बहुत कुछ सुधारने की ज़रूरत है. इसलिए बातचीत ज़रूरी है."
भागवत ने कहा कि पहले की पीढ़ियां शायद ही कभी अधिकारियों से सवाल पूछती थीं, लेकिन जेन Z और जेन अल्फा सवाल पूछते हैं और सहानुभूति के साथ तार्किक जवाब चाहते हैं.
उन्होंने कहा, "हम कभी अधिकारियों से सवाल नहीं पूछते थे, लेकिन जेन Z और जेन अल्फा अधिकारियों से सवाल पूछते हैं और तार्किक जवाब चाहते हैं, वह भी प्यार के साथ."
RSS प्रमुख ने कहा कि वह कभी भी जेन Z से विरोध न करने के लिए नहीं कहेंगे. हालांकि उन्होंने ज़ोर दिया कि लोकतंत्र में ऐसी अभिव्यक्ति के लिए सही रास्ता होना चाहिए.
भागवत ने कहा, "मैं कभी नहीं कहूंगा कि जेन Z को विरोध नहीं करना चाहिए, लेकिन लोकतंत्र में इसके लिए एक रास्ता भी होना चाहिए. हमें यह देखना होगा कि अगर युवा आवाज़ उठा रहे हैं, तो यह विरोध के लिए नहीं, बल्कि सुधार के लिए है."
उन्होंने कहा कि सिस्टम में कमियां हैं जिन्हें ठीक करने की जरूरत है और छात्रों को अपनी आवाज उठाने और सुधार की मांग करने का लोकतांत्रिक अधिकार है. उन्होंने जोर दिया कि सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से किए गए विरोध को लोकतांत्रिक भागीदारी की जायज़ अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए.
भागवत ने प्रदर्शनकारियों को 'एंटी-नेशनल' कहे जाने को गलत बताया
सवाल उठाने वाले युवाओं को अक्सर 'एंटी नेशनल' करार दिए जाने के आरोपों पर टिप्पणी करते हुए भागवत ने ज़्यादा सहानुभूति और समझ रखने की बात कही.
उन्होंने कहा, "सहानुभूति और समझ की भावना होनी चाहिए. आज की पीढ़ी सबसे ईमानदार पीढ़ी है. उनकी बात सुनी जानी चाहिए और उन्हें यह महसूस होना चाहिए कि उनकी बात सुनी जा रही है."
मोहन भागवत ने कहा कि विरोध करने वाले एंटी नेशनल नहीं हो जाते, वे हमारे अपने लोग हैं.
मोहन भागवत ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल की खबरों पर भी बात की और कहा कि उनके पास इन घटनाओं के बारे में पक्की जानकारी नहीं है.
उन्होंने कहा, "अगर मुझे किसी पर भरोसा करना हो, तो मैं 'जेन ज़ी' (आज की युवा पीढ़ी) पर भरोसा करूंगा. लेकिन हमें असलियत नहीं पता. हम दोनों ही रिपोर्ट से मिली जानकारी के आधार पर बात कर रहे हैं. इस आंदोलन में कुछ असामाजिक तत्वों के शामिल होने की खबरें भी आई हैं. लेकिन पक्की जानकारी के बिना हम इस पर बात नहीं कर सकते."
भागवत ने कहा कि उन्हें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हालिया टकराव के सही हालात नहीं पता, लेकिन उन्होंने कहा कि पक्की जानकारी न होने के बावजूद युवाओं पर उनका भरोसा अटूट है.
आरएसएस प्रमुख ने शिक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा की और कहा कि शिक्षा को व्यावसायिक गतिविधि नहीं बनना चाहिए.
उन्होंने कहा, "शिक्षा कोई व्यावसायिक धंधा नहीं है. समुदाय की मदद से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है. शिक्षा का आर्थिक बोझ बहुत ज़्यादा है. हमें सतर्क और सक्रिय रहने की ज़रूरत है और सिस्टम का नियमित रूप से आकलन करना होगा. हमें अपने शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करने की ज़रूरत है. शिक्षा देना सिर्फ सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है."
सोशल मीडिया पर रोक ही समाधान नहीं
मोहन भागवत ने युवाओं पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर कहा कि नजरिया बदलना ज़रूरी है. सिर्फ कानून लागू करना काफ़ी नहीं है. हमें रोल मॉडल बदलने की जरूरत है. अगर किसी इन्फ़्लुएंसर के 10 लाख फ़ॉलोअर्स हैं, तो उन्हें पता होना चाहिए कि वे लोगों को गुमराह न करें. सही और भरोसेमंद सोर्स की पुष्टि करना भी ज़रूरी है. अगर किसी चीज़ पर रोक लगाई जाती है, तो उसमें कमियां या रास्ते निकल ही आते हैं. इसलिए सिर्फ़ रोक लगाना ही समाधान नहीं हो सकता.
ऋत्विक भालेकर