अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए संत समाज, संसद से लेकर सड़क तक बनाएगा माहौल

देश में 90 के दशक के तरह ही एक बार फिर राम मंदिर आंदोलन की आहट सुनाई देने लगी है. वीएचपी और संत समाज राम मंदिर निर्माण के लिए देश में माहौल बनाने का अभियान शुरू करने जा रहे हैं. इसके लिए वे संसद से सड़क तक इस मुद्दे को उठाएंगे.

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राम मंदिर का प्रतिकात्मक फोटो (फाइल फोटो) राम मंदिर का प्रतिकात्मक फोटो (फाइल फोटो)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 06 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 11:54 AM IST

अयोध्या में विवादित जमीन पर राम मंदिर के निर्माण को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने तेवर कड़े कर लिए हैं. इस बारे में संत समाज के साथ मिलकर वीएचपी ने प्लान तैयार कर लिया है. इसके मुताबिक संत समाज राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात करेगा. वहीं, संतों ने राम मंदिर के निर्माण पर केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने के लिए दबाव बनाने का फैसला किया है.

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संतों ने दिया अल्टीमेटम

शुक्रवार को दिल्ली में वीएचपी की ओर से आयोजित की गई बैठक में देश भर से आए साधु-संतों ने राम मंदिर निर्माण के लिए मोदी सरकार को चार महीने का अल्टीमेटम दिया है. संतों ने साफ कहा है कि सरकार 31 जनवरी तक मंदिर निर्माण का रास्ता तलाशे. संतों ने कहा कि 31 जनवरी तक सरकार कोई फैसला नहीं करती है तो फिर 1 फरवरी को धर्म संसद में आगे की रणनीति बनाई जाएगी.

वीएचपी का राम मंदिर को लेकर प्लान

विश्व हिंदू परिषद ने शुक्रवार को संतों की समिति के साथ दिल्ली में बैठक कर राम मंदिर के निर्माण को लेकर प्रस्ताव पास किया. इसके अलावा संत समाज देश में ऐसा माहौल तैयार करने के लिए बकायदा रणनीति भी बनाई है.

इसके तहत नवंबर महीने में देश के सभी सांसदों से संतों ने मुलाकात का प्रोग्राम बनाया है ताकि राममंदिर निर्माण के मुद्दे को संसद में उठाएं. इसके अलावा  6 दिसंबर से 18 दिसंबर (गीता जयंती) तक देश भर के मंदिरों और गुरुद्वारों में संत समाज जाकर राम मंदिर निर्माण का माहौल बनाएंगे.

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'तीन तलाक पर अध्यादेश तो मंदिर के लिए क्यों नहीं'

संत समाज राज्यों में धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के साथ-साथ देश के सभी राज्यों के राज्यपाल से इस मुद्दे पर मुलाकात कर उन्हें जनभावनाओं से अवगत कराएंगे. आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानंद ने मांग करते हुए कहा कि कानून से पहले सरकार तीन तलाक की ही तरह राम मंदिर निर्माण के लिए भी अध्यादेश लाएं. हालांकि, अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा है कि अगर सरकार संतों के दबाव में अध्यादेश लाती है तो हमारा भरोसा उठ जाएगा.

सपा ने उठाए सवाल

संत समाज ने राम मंदिर के लिए अभियान का ऐसा समय चुना है, जब देश में 2019 के लोकसभा चुनाव अपने पूरे उफान पर होगा. यही वजह है कि संतों के राम मंदिर अभियान को सियासत के नजरिए से भी देखा जाने लगा है. समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सुनील साजन ने आजतक से बातचीत में कहा कि मौजूदा समय में मोदी सरकार किसान, महंगाई और रोजगार जैसे मुद्दे पर घिरी हुई है. बीजेपी को लगाता है कि 2019 के चुनाव में इन मुद्दों का सामना कैसे करेगी. ऐसे में बीजेपी इन मुद्दों से ध्यान के लिए वीएचपी और संत समाज के सहारे राम मंदिर के मुद्दे को उठा रही है.

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उन्होंने कहा कि 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई थी, तो इस मुद्दे को क्यों नहीं उठाया गया. अब जब चुनाव सर पर है और सरकार जनता के मुद्दों पर घिरी हुई है तो उन्होंने राम का सहारा लेना शुरू कर दिया है. ये लोग भगवान राम के भक्तों का अभियान नहीं है बल्कि बीजेपी और संघ भक्तों का है. सपा नेता ने कहा कि ऐसे में सवाल उठता है कि देश संविधान से चलेगा या फिर आस्था से.

मंदिर के लिए तोगड़िया करेंगे यात्रा

वीएचपी से अलग हो कर नया संगठन-अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद (एएचपी) प्रवीण तोगड़िया ने भी शुक्रवार को कहा कि अगर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए केंद्र सरकार अध्यादेश लाने में असफल रहती है तो वह 21 अक्टूबर से लखनऊ से अयोध्या तक रैली करेंगे. तोगड़िया ने कहा कि बीजेपी राम मंदिर के नाम पर वोट मांगकर सत्त में आई, लेकिन कुर्सी पर बैठने बाद वह मुद्दे को भूल गई.

उन्होंने कहा, 'मैं पिछले चार सालों से सदन में कानून पारित करके राम मंदिर का निर्माण करने की मांग करता रहा हूं लेकिन आरएसएस और बीजेपी ने मेरी आवाज दबाने की कोशिश की. हमने नरेन्द्र मोदी को राम मंदिर की वकालत के लिए चुना था लेकिन वह तो मुसलमानों के हिमायती बन गए.'

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29 अक्टूबर से होगी सुनवाई

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद से जुड़ी विवादित जमीन के मालिकाना हक को लेकर एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में 29 अक्टूबर से नियमित सुनवाई शुरू होने जा रही है.

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