कांग्रेस एक के बाद एक चुनाव हार रही है और अपनी पराजय की खींच में सड़कों पर प्रदर्शन कर रही है. पार्टी अपनी असफलताओं का दोष संवैधानिक संस्थाओं पर मढ़ने का काम करती है, लेकिन सच्चाई यह है कि कांग्रेस की हार का कारण चुनाव आयोग नहीं, बल्कि उसका विचार शून्य नेतृत्व है. उत्तर प्रदेश, पंजाब, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में कांग्रेस की अंदरूनी कलह और गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है. इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने दर्जनों बार चुनी हुई सरकारों को गिराया है और देश में आपातकाल लगाकर लोकतंत्र का गला घोंटा था.