'जीतें तो मशीन ठीक, हारें तो छेड़छाड़?', लोकसभा में EVM विवाद पर NDA का विपक्ष पर पलटवार

लोकसभा में चुनाव सुधारों पर बहस के दौरान TDP और JDU ने विपक्ष पर EVM मामलों में “दोहरा मानदंड” अपनाने का आरोप लगाया. TDP सांसद ने कहा कि कांग्रेस जब जीतती है, तब EVM पर सवाल नहीं उठते. JDU सांसद ललन सिंह ने विपक्ष पर चुनाव प्रणाली को बदनाम करने का आरोप लगाया. बहस में बायोमेट्रिक पहचान, प्रवासी मतदाता अभियान, और चुनाव आयोग द्वारा SIR की स्पष्टता पर भी चर्चा हुई.

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राजीव रंजन सिंह ने कहा, दोहरा मानदंड स्वीकार नहीं किया जाएगा. (Photo: PTI)) राजीव रंजन सिंह ने कहा, दोहरा मानदंड स्वीकार नहीं किया जाएगा. (Photo: PTI))

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 दिसंबर 2025,
  • अपडेटेड 6:28 PM IST

लोकसभा में ‘चुनाव सुधार’ पर चर्चा के दौरान मंगलवार को बीजेपी सहयोगी दल तेलुगू देशम पार्टी (TDP) और जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) ने विपक्ष पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर “दोहरा मानदंड” अपनाने का आरोप लगाया. इन दलों ने कहा कि विपक्ष EVM से छेड़छाड़ के आरोप केवल चुनाव हारने के बाद ही उठाता है.

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल
चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने चुनाव आयोग (EC) की निष्पक्षता पर सवाल उठाए, SIR को लेकर आलोचना की और पेपर बैलेट प्रणाली वापस लाने की मांग रखी. वहीं सत्ताधारी एनडीए के सदस्यों ने विपक्ष पर देश की चुनाव व्यवस्था को बदनाम करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें सुधार के व्यावहारिक सुझाव देने चाहिए.

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क्या बोले TDP सांसद?
TDP सांसद लवू श्री कृष्ण देवरायालु ने कहा कि भारतीय मतदाता जागरूक हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझते हैं. उन्होंने कहा, “तेलंगाना और कर्नाटक में कांग्रेस जीती तो किसी ने ‘वोट चोरी’ की बात नहीं की, लेकिन जहां विपक्ष हारता है, वहीं EVM पर सवाल उठने लगते हैं.” उन्होंने मशीनों में छेड़छाड़ की आशंकाओं को खारिज किया.

देवरायालु ने कहा कि विपक्ष रचनात्मक सुधारों की दिशा में काम करने के बजाय चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है. उन्होंने सुझाव दिया कि यदि आधार को वोटर आईडी से लिंक नहीं किया जा सकता तो पहचान की पुष्टि के लिए आइरिस स्कैन या अंगूठे के निशान जैसे बायोमेट्रिक विकल्प पर विचार किया जा सकता है.

उन्होंने प्रवासी मजदूरों, जनजातीय समुदायों और बुजुर्गों को दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने के लिए लक्षित अभियान चलाने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा, “क्षमता निर्माण केवल चुनाव से छह महीने पहले होता है. इसे वार्षिक रूप से करना चाहिए.”

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देवरायालु ने चुनाव आयोग से जिला-वार मतदाता सूची में जोड़-घटाव के आंकड़े सार्वजनिक करने की भी मांग की, ताकि सभी राजनीतिक दल देख सकें कि किन नामों को हटाया गया.

JDU सांसद का विपक्ष पर निशाना
बहस में हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय मंत्री और JDU सांसद राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने भी विपक्ष पर चुनाव हारने पर ही EVM को कटघरे में खड़ा करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “आप बंगाल, हिमाचल और कर्नाटक में जीते, तब EVM सही थीं. लेकिन महाराष्ट्र, हरियाणा या बिहार में मशीनें अचानक खराब हो गईं? जनता इस दोहरे मानदंड को स्वीकार नहीं करती.”

ललन सिंह ने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव आयोग द्वारा बार-बार दी गई सफाई के बावजूद चुनाव प्रणाली को प्रदूषित करने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा, “अगर लोग आपको लगातार वोट नहीं दे रहे, तो EVM खराब हो जाती है?”

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने SIR के बारे में स्पष्ट किया है कि यह नियमित प्रक्रिया है. हाल ही में दो जिलों में पांच लाख से अधिक लोगों ने नागरिकता के लिए आवेदन किया और कई नाम हटाए गए, “तो अगर आयोग प्रमाण मांग रहा है, तो इसमें समस्या क्या है?”

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी पर निशाना साधते हुए सिंह ने कहा कि विपक्ष सुधार सुझाने के बजाय आयोग को प्रभावित बताने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा, “मोदी जी कभी स्वतंत्र संस्थाओं के काम में हस्तक्षेप नहीं करते.” बिहार के चुनावी परिणामों पर विपक्ष पर तंज कसते हुए सिंह ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी से फ्री टिप्स ले लीजिए. उनसे अकेले में मिलिए और टिप्स लेकर लौट आइए.”

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