चुनाव आयोग की निष्पक्षता और इसकी कार्यशैली को लेकर एक बार फिर से देश में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. पिछले आठ से दस वर्षों के दौरान देश में चुनाव कराने की जो पूरी प्रक्रिया रही है और चुनाव आयोग का जो काम करने का तरीका रहा है, उस पर समाज के एक बहुत बड़े वर्ग का भरोसा डगमगाया है. मतदाताओं का मानना है कि चाहे वह वोटर लिस्ट तैयार करने का काम हो, चुनाव की तारीखों को तय करने का तरीका हो या फिर आचार संहिता को लागू करने का ढंग हो, हर स्तर पर आयोग का रवैया सवालों के घेरे में रहता है. इसके साथ ही चुनावों के दौरान भेजे जाने वाले ऑब्जर्वर की भूमिका और काउंटिंग के समय होने वाली कथित धांधली के कारण लोगों का यह शक और गहरा हो जाता है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है.