'जानबूझकर, इरादतन और बार-बार...', मालेगांव विस्फोट केस में आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित पर जुर्माना लगाते हुए अदालत ने क्या कहा?

विशेष न्यायाधीश ए के लाहोटी ने कहा,  "यह नहीं कहा जा सकता कि पुरोहित को उन सभी आदेशों और अभियोजन पक्ष के गवाह की जांच के बारे में जानकारी नहीं है. इसलिए पुरोहित के काम से पता चलता है कि उन्होंने जानबूझकर अपने आवेदन में गवाह का नाम जोड़ा है. जबकि उन्हें इस न्यायालय द्वारा समय-समय पर पारित पिछले आदेशों के बारे में पूरी जानकारी है."

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मालेगांव ब्लास्ट मामला मालेगांव ब्लास्ट मामला

विद्या

  • नई दिल्ली,
  • 13 जून 2024,
  • अपडेटेड 11:39 PM IST

मालेगाँव 2008 विस्फोट मामले में आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित ने मुंबई की एक विशेष अदालत द्वारा उन पर लगाए गए "2000 रुपये के अनुकरणीय जुर्माने" का भुगतान किया. उन्हें यह जुर्माणा इसलिए देना पड़ा क्योंकि कर्नल पुरोहित ने एक गवाह को बचाव पक्ष के गवाह के रूप में पेश करने के लिए कहा था. जबकि, उस गवाह से एक सैन्य अधिकारी ने पहले ही अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में पूछताछ कर लिया था. 

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विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) अविनाश रसल ने बताया कि पुरोहित के वकील ने पहले ही उस गवाह से लंबी जिरह की थी और इसलिए अभियोजन पक्ष के गवाह को बचाव पक्ष के गवाह के रूप में बुलाना सही नहीं होगा. सेना अधिकारी से पूछताछ के बाद, पुरोहित ने गवाह को वापस बुलाने के लिए एक आवेदन पत्र दाखिल किया था. हालांकि इसे अदालत ने खारिज कर दिया था. इसके बाद पुरोहित द्वारा फिर से उस गवाह को बचाव पक्ष के गवाह के रूप में बुलाने का उल्लेख फिर से किया गया, जिसे अदालत ने गंभीरता से लिया.

विशेष न्यायाधीश ए के लाहोटी ने कहा,  "यह नहीं कहा जा सकता कि पुरोहित को उन सभी आदेशों और अभियोजन पक्ष के गवाह की जांच के बारे में जानकारी नहीं है. इसलिए पुरोहित के काम से पता चलता है कि उन्होंने जानबूझकर अपने आवेदन में गवाह का नाम जोड़ा है. जबकि उन्हें इस न्यायालय द्वारा समय-समय पर पारित पिछले आदेशों के बारे में पूरी जानकारी है."

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इसके बाद अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि पुरोहित ने अपने काम से न केवल न्यायालय का समय बर्बाद किया है, बल्कि न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने का भी प्रयास किया. अदालत ने कहा कि गवाह का नाम जोड़ना कुछ और नहीं बल्कि कानूनी कार्यवाही का अनुचित उपयोग करने का प्रयास है. अप्रत्यक्ष रूप से वो ऐसा कर के इस न्यायालय द्वारा पारित पिछले आदेश को रद्द करने का प्रयास कर रहे थे. कानून इसकी इजाजत नहीं देता है.

इसके अलावा पुरोहित ने बचाव पक्ष के गवाह के तौर पर जिस दूसरे गवाह को बुलाना चाहा था, उसका पता भी विस्तार से नहीं दिया था. इसलिए अदालत ने उन नौ गवाहों में से केवल सात को बुलाया, जिन्हें बुलाने का उन्होंने अनुरोध किया था. पुरोहित के अलावा, मामले में एक अन्य आरोपी सुधाकर चतुर्वेदी ने भी अपने बचाव पक्ष के गवाहों को बुलाने की प्रक्रिया पूरी कर ली है. इसके बाद अब 18 से 21 जून के बीच उनसे संबंधित बचाव पक्ष के गवाहों को विशेष अदालत में बुलाया जाएगा.

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