उत्तराखंड बॉर्डर पर निहंग सिखों का हंगामा, बैरिकेडिंग तोड़ देहरादून रवाना

उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा पर निहंग सिखों के प्रवेश को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है. कर्णप्रयाग और रुद्रप्रयाग में हुई झड़पों के बाद प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है.

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उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा पर निहंग सिखों के प्रवेश को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है. उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा पर निहंग सिखों के प्रवेश को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है.

अंकित शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 25 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:50 PM IST

उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश की सीमा पर इस वक्त तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिल रही है. कर्णप्रयाग में हुई झड़प और रुद्रप्रयाग के नगरासू में हुए विवाद के बाद ये स्थिति बनी है. सामने आया है कि सैकड़ों निहंग सिख उत्तराखंड में प्रवेश के लिए सीमा पर पहुंच गए. राज्य प्रशासन के साथ कई घंटों तक बातचीत चली, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका. इसके बाद प्रशासन ने सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया.

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कर्णप्रयाग और नगरासू में चल रहे विवाद को लेकर निहंगों का एक जत्था आज मोहाली स्थिति गुरुद्वारा सिंह शहीदान से उत्तराखंड के देहरादून की ओर जा रहा था. हालांकि, उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें हिमाचल-उत्तराखंड बॉर्डर पर रोक दिया.

इसके पहले, पहला जत्था हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब गुरुद्वारे से निकलकर विकासनगर के पास कुल्हाल चेक पोस्ट तक पहुंचा. प्रशासन लगातार निहंग सिखों से 25 जून को प्रस्तावित मार्च टालने की अपील करता रहा, लेकिन बातचीत बेनतीजा रही. इसके बाद निहंग सीमा की ओर बढ़ गए. हालांकि अधिकारी अब भी उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे हैं.

स्थिति को देखते हुए उत्तराखंड के कई जिलों की पुलिस, खुफिया एजेंसियां और सुरक्षा बलों को सीमा पर तैनात किया गया है. पूरे इलाके की निगरानी के लिए ड्रोन भी उड़ाए जा रहे हैं ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी तरह स्थिति न बिगड़े.

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क्या है निहंगों की मांगें, क्यों कर रहे है प्रदर्शन?

निहंग सिखों के इस विवाद और प्रदर्शन के बीच कई वीडियो सामने आई हैं. निहंगों ने अपनी मांगें भी रखी हैं. वीडियो में सुना जा सकता है कि निहंग पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच करने और उन्हें सस्पेंड करने की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा उनकी मांग है कि जिन पुलिस अधिकारियों ने हमारे लोगों को कोर्ट के सामने पेश किया और बिना किसी केस के पुलिस स्टेशन में रखा, उन्हें नौकरी से निकाला जाना चाहिए. निहंग कह रहे हैं कि हम यहां से तभी वापस जाएंगे जब हमारे 4 सिंह हमारे साथ जाएंगे. हमें रोका नहीं जाना चाहिए, हमें रुद्रप्रयाग जाने की इजाजत मिलनी चाहिए.'

आखिर क्यों बढ़ा विवाद?

अभी जो तनाव बढ़ा है उसकी जड़ दो अलग-अलग घटनाएं हैं, जो हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान हुईं. हालांकि उत्तराखंड पुलिस का कहना है कि दोनों घटनाओं का आपस में कोई संबंध नहीं है.

कर्णप्रयाग में पार्किंग विवाद से शुरू हुआ मामला

पहली घटना 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुई. यहां वाहन पार्किंग को लेकर निहंग सिख यात्रियों और स्थानीय लोगों के बीच कहासुनी हो गई. देखते ही देखते विवाद हिंसक झड़प में बदल गया. दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए. घटना के बाद पुलिस ने चार निहंग सिखों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया. गिरफ्तारी के बाद देशभर के कई सिख संगठनों ने विरोध जताया.

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सिख संगठनों का आरोप- बिना पगड़ी निहंगों को कोर्ट में किया पेश
सिख संगठनों का आरोप था कि गिरफ्तार निहंगों को अदालत में उनकी पगड़ी के बिना पेश किया गया, जो सिख धार्मिक परंपराओं का उल्लंघन है. इसके अलावा उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि स्थानीय लोगों के खिलाफ शुरुआत में क्रॉस एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई. इन शिकायतों के बाद दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) सहित कई सिख संगठनों ने उत्तराखंड सरकार से हस्तक्षेप की मांग की.

इसके बाद राज्य सरकार ने जांच की जिम्मेदारी चमोली पुलिस से हटाकर हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को सौंप दी. साथ ही स्थानीय लोगों के खिलाफ भी क्रॉस एफआईआर दर्ज करने और निहंगों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों की डीआईजी स्तर की जांच के आदेश दिए.

नगरासू गुरुद्वारे में तीन दिन तक चला गतिरोध

कर्णप्रयाग विवाद के कुछ दिन बाद रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारा लंगर साहिब में एक और विवाद सामने आया. गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अनुसार, लंगर व्यवस्था और प्रशासनिक मामलों को लेकर विवाद शुरू हुआ. इसी दौरान पुलिस गुरुद्वारे पहुंची. प्रबंधन का आरोप है कि कुछ निहंग सिखों ने गुरुद्वारे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और बाद में खुद को गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिलों में बंद कर लिया.

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यह गतिरोध करीब तीन दिन तक चला. इस दौरान उत्तराखंड पुलिस और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया. चारधाम यात्रा और हेमकुंड साहिब यात्रा जारी होने के कारण प्रशासन ने बल प्रयोग करने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाया. आखिरकार पंजाब से आए वरिष्ठ निहंग नेताओं ने समझाइश देकर निहंगों को शांतिपूर्वक नीचे उतरने के लिए तैयार किया और गतिरोध समाप्त हुआ. 

सोशल मीडिया पर दोनों घटनाओं को जोड़कर किए गए दावे

इन दोनों घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की पोस्ट वायरल होने लगीं. इनमें दावा किया गया कि उत्तराखंड में सिख यात्रियों के खिलाफ सुनियोजित तरीके से कार्रवाई की जा रही है और कर्णप्रयाग व नगरासू की घटनाएं आपस में जुड़ी हुई हैं. हालांकि उत्तराखंड पुलिस ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है.

गढ़वाल रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) राजीव स्वरूप ने कहा कि दोनों घटनाएं अलग-अलग परिस्थितियों में हुई हैं और इनके बीच किसी तरह का संबंध होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है. उन्होंने लोगों से अफवाहों और भड़काऊ पोस्ट पर भरोसा न करने की अपील की है. साथ ही चेतावनी दी है कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

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सीमा पर हाई अलर्ट

प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच बातचीत विफल होने के बाद उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है. कुल्हाल चेक पोस्ट और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है. बैरिकेडिंग कर वाहनों की जांच की जा रही है और ड्रोन से लगातार निगरानी रखी जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता किसी भी तरह का टकराव रोकना और बातचीत के जरिए समाधान निकालना है.

चारधाम और हेमकुंड यात्रा के बीच बढ़ी चिंता

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब उत्तराखंड में चारधाम यात्रा और हेमकुंड साहिब यात्रा पूरे जोर-शोर से चल रही है. हर दिन लाखों श्रद्धालु राज्य में पहुंच रहे हैं. ऐसे में सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की है. फिलहाल प्रशासन लगातार सिख नेताओं के संपर्क में है और स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है.

पुलिस का कहना है कि राज्य में शांति बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और किसी को भी माहौल बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

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