तमिलनाडु की राजनीति में दिग्गज द्रविड़ दलों को हराकर सत्ता में आए अभिनेता से नेता बने विजय अब अपने कामकाज के तरीके से नई पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं. मुख्यमंत्री बनने के बाद विपक्ष ने उनके प्रशासनिक अनुभव पर सवाल उठाए थे, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में लिए गए फैसलों ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है.
विजय ने सबसे पहले सरकारी कामकाज में अनुशासन पर जोर दिया. वह रोज सुबह तय समय पर सचिवालय पहुंचते हैं और शाम तक नियमित रूप से दफ्तर में काम करते हैं. उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को भी समय की पाबंदी का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है. उनका यह 10 से 6 बजे तक का वर्किंग वाला मॉडल तमिलनाडु की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है.
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सरकार ने जनता से जुड़े कई बड़े फैसले भी लिए. सत्ता संभालते ही 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा लागू किया गया, जिससे करोड़ों घरेलू उपभोक्ताओं को फायदा मिलने की बात कही गई. इसके अलावा राज्य की सभी सरकारी बसों को एक एक करके एयर कंडीशन (AC) करने का ऐलान किया गया, ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके.
विजय सरकार का कानून-व्यवस्था को बेहतर करने पर जोर
कानून-व्यवस्था को लेकर भी विजय सरकार ने सख्त संदेश दिया है. जिला कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अपराधियों के खिलाफ बिना किसी राजनीतिक दबाव के कार्रवाई की जाए. महिला सुरक्षा के लिए 'सिंगापेन स्पेशल टास्क फोर्स' बनाई गई है, जबकि नशे के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए हर जिले में एंटी-ड्रग टास्क फोर्स गठित की गई है.
विजय सरकार ने हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग के 245.85 करोड़ रुपये के 46 प्रोजेक्ट भी रद्द कर दिए. इनमें विवाह मंडप और व्यावसायिक परिसरों जैसी योजनाएं शामिल थीं. सरकार का कहना है कि मंदिरों का धन व्यावसायिक परियोजनाओं के बजाय मंदिरों और श्रद्धालुओं से जुड़े कार्यों पर खर्च किया जाना चाहिए. इसी फंड से नई धार्मिक और भक्तों से जुड़ी योजनाएं शुरू करने की तैयारी है.
भ्रष्टाचार के खिलाफ भी एक्शन में सीएम विजय
सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया है. सार्वजनिक निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी रोकने, नौकरशाही में समानांतर शक्ति केंद्र खत्म करने और निवेशकों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत करने जैसे कदम उठाए गए हैं. साथ ही तमिलनाडु के लिए 436 सूत्रीय विजन डॉक्यूमेंट जारी किया गया है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, तकनीक और पारदर्शी प्रशासन पर जोर दिया गया है.
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हालांकि चुनावी वादों का एक बड़ा हिस्सा अभी पूरा होना बाकी है, लेकिन सरकार का दावा है कि उन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय सिर्फ लोकप्रिय अभिनेता की छवि पर नहीं, बल्कि एक अनुशासित और निर्णायक प्रशासक की पहचान बनाकर तमिलनाडु की राजनीति में अपनी अलग जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
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