सूरत: फेक नोट मामले में NIA ने एक और आरोपी के खिलाफ दायर की चार्जशीट

राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावों और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 18 जुलाई 2019 को इस मामले को NIA को ट्रांसफर कर दिया था. गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों के खिलाफ जांच के बाद, NIA ने अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट में अगस्त 2019 में अपनी पहली चार्जशीट दायर की थी.

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सूरत फेक नोट मामले में एक और चार्जशीट सूरत फेक नोट मामले में एक और चार्जशीट

दिव्येश सिंह

  • सूरत,
  • 20 मई 2024,
  • अपडेटेड 8:39 PM IST

साल 2019 के सूरत फेक नोट केस में  राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सोमवार को एक और आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया. बिहार के कटिहार का रहने वाला अब्दुल गफ्फार 2019 से फरार था और 22 फरवरी 2024 को अहमदाबाद, गुजरात से पकड़ा गया था. इस मामले में तमात FICN तस्करों के लिए एक एजेंट के रूप में काम करने के अलावा, उसे FICN तस्करी के दो पिछले मामलों में दोषी ठहराया गया है. उसे 2015 में एक मामले में आर्थिक अपराध न्यायालय, मुजफ्फरपुर द्वारा 3 साल के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई थी. वह IPC और UA(P) अधिनियम के तहत एक अन्य मामले में भी शामिल हो गया.

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उसे दूसरे मामले में कोलकाता की एक अदालत द्वारा दोषी ठहराया गया था. NIA ने आज फेक नोट मामले में उसके खिलाफ अपना पहला आरोप पत्र दायर किया, जो गुजरात में फेक करेंसी के प्रसार और वितरण के लिए कई आरोपी व्यक्तियों द्वारा आपराधिक साजिश से संबंधित था.

2 लाख रुपए के फेक नोट से मिला था आरोपी

इससे पहले, जून 2019 में सूरत की राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने सूरत रेलवे स्टेशन से विनोद निषाद नाम के व्यक्ति को दो लाख रुपए के फर्जी नोटों के साथ गिरफ्तार किया था. इस मामले में आरोपी महफूज़ शेख को भी गिरफ्तार कर लिया गया और सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत मामला दर्ज किया गया. मामले में कुल तीन आरोपियों पर मुकदमा चलाया गया, जिनमें DRI द्वारा गिरफ्तार किए गए दो आरोपी और एक भगोड़ा व्यक्ति शामिल था.

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राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावों और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 18 जुलाई 2019 को इस मामले को NIA को ट्रांसफर कर दिया था. गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों के खिलाफ जांच के बाद, NIA ने अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट में अगस्त 2019 में अपनी पहली चार्जशीट दायर की. आरोप पत्र में आरोपी गफ्फार को वांछित आरोपी के रूप में नामित किया गया था.

नवंबर 2022 में विनोद निषाद और मोहम्मद महफूज शेख को 7 साल की जेल और 10 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई, लेकिन अब्दुल गफ्फार तीन महीने पहले अपनी गिरफ्तारी तक लगातार फरार रहा.

यह भी पढ़ें: सूरत फेक नोट केस में बड़ा खुलासा... अब तक 317 करोड़ बरामद, चंदा देने वाले ट्रस्ट को चूना लगाने के बड़े प्लान का भंडाफोड़

NIA की जांच के मुताबिक, अब्दुल गफ्फार ने मालदा में हाफिज से 2 लाख रुपए के कीमत की फेक नोट लिए और इसे 88 हजार रुपये असली रुपए के बदले में विनोद निषाद को बेच दिया था. इसके बाद नकली मुद्रा करेंसी को आम जनता के बीच चलाने के लिए मोहम्मद महफूज शेख के पास भेजा गया. मामले में अन्य फरार आरोपियों का पता लगाने के लिए जांच जारी है.
 

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