सुप्रीम कोर्ट ने पेप्सिको के ब्रांड लेज चिप्स में इस्तेमाल होने वाले एफएल 2027 किस्म के आलू से जुड़े विवाद में बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें पेप्सिको का रजिस्ट्रेशन बहाल रखा गया था. साथ ही कोर्ट ने साफ किया कि किसानों के अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे.
इस तरह अदालत ने कंपनी के दावे और किसानों के पारंपरिक अधिकार, दोनों पर अपनी बात रखी. फैसले में कहा गया कि पेप्सिको का रजिस्ट्रेशन बना रहेगा, लेकिन कानून के तहत व्यक्तिगत किसानों को बीज बचाने, दोबारा उगाने और बेचने का अधिकार भी मिलेगा.
यह भी पढ़ें: रेप की धमकी से डीपफेक तक... डिजिटल क्राइम पर 48 घंटे में राहत की मांग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
पेप्सिको और याचिका में क्या था
पेप्सिको का कहना था कि पीपीवीएफआर अधिनियम, 2001 के तहत इस खास आलू एफएल 2027 पर उसके ब्रीडर राइट्स हैं, इसलिए बिना अनुमति इसकी व्यावसायिक खेती नहीं की जा सकती. किसान अधिकार कार्यकर्ता कविता कुरुगंती ने याचिका दायर कर कंपनी के रजिस्ट्रेशन को रद्द करने की मांग की थी. उनका तर्क था कि कंपनी पहले गुजरात के किसानों पर पेटेंट उल्लंघन का मुकदमा कर चुकी है.
किसानों के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले का निपटारा करते हुए कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश में बदलाव की जरूरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कहा कि कानून की धारा 39(1)(iv) के तहत भारत का कोई भी व्यक्तिगत किसान किसी भी कानूनी कार्रवाई के खिलाफ पूरी तरह सुरक्षित है.
यह भी पढ़ें: 'सुप्रीम कोर्ट ने जो दरवाजा बंद किया, उसे...', सागर धनखड़ मर्डर केस में सुशील कुमार को बड़ा झटका, बेल से इनकार
किसान इस संरक्षित किस्म के उत्पाद या बीज को अपने पास रख सकते हैं, दोबारा उगा सकते हैं और आपस में बेच भी सकते हैं, लेकिन इसे पेप्सिको के 'ब्रांडेड बीज' के नाम से नहीं बेच सकते. सुनवाई के दौरान पेप्सिको ने भी कोर्ट में कहा कि वह किसानों के इन अधिकारों में दखल नहीं देगा.
सुप्रीम कोर्ट ने पेप्सिको के एफएल 2027 रजिस्ट्रेशन को बरकरार रखा और साथ ही यह भी साफ कर दिया कि छोटे और व्यक्तिगत किसानों के बीज बचाने और बेचने जैसे पारंपरिक अधिकार कानून के तहत सुरक्षित हैं. इसी के साथ इस विवाद में कंपनी को राहत और किसानों को कानूनी सुरक्षा, दोनों मिल गई.
संजय शर्मा