'ट्रिब्यूनल सरकार के लिए सिरदर्द...', सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त, खाली पद और जवाबदेही पर केंद्र से जवाब तलब

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली और पदों की लंबित भर्तियों को लेकर गंभीर चिंता और नाराजगी व्यक्त की है. तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि ट्रिब्यूनल केंद्र सरकार के लिए सिरदर्द और सुप्रीम कोर्ट के लिए बोझ बन गए हैं. कोर्ट ने आर्थिक मामलों के ट्रिब्यूनलों में तकनीकी सदस्यों द्वारा फैसले बाहर से लिखवाने के आरोपों पर कड़ी चेतावनी दी.

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टीडीसैट में चेयरपर्सन न होने पर कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट में उठे सवाल (Photo: ITG) टीडीसैट में चेयरपर्सन न होने पर कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट में उठे सवाल (Photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:07 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने देश में न्यायिक कामकाज का सहयोग करने वाले ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली और लंबे समय से खाली पड़े पदों को लेकर गहरी चिंता और कड़ी नाराजगी जताई है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की तीन जजों की पीठ ने कहा कि ट्रिब्यूनल अब सरकार के लिए सिरदर्द और सुप्रीम कोर्ट के लिए बोझ बन चुके हैं.

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सीजेआई ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से कहा कि ये ट्रिब्यूनल केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए हैं, लेकिन इनके फैसलों और आदेशों की वजह से न्यायिक प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. उन्होंने यह भी बताया कि ये ट्रिब्यूनल न तो सरकार के प्रति पूरी तरह जवाबदेह हैं और न ही न्यायपालिका के प्रति, जिससे ये एक तरह से ‘नो मैन्स लैंड’ बन गए हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने खासतौर से आर्थिक मामलों से जुड़े ट्रिब्यूनलों में तकनीकी सदस्यों द्वारा फैसलों को बाहर से लिखवाए जाने के आरोपों पर गंभीर चिंता जताई और चेतावनी दी कि यदि ऐसा पाया गया तो संबंधित सदस्यों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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पीठ ने सरकार से आग्रह किया कि खाली पड़े पदों को तुरंत भरा जाए और भर्ती प्रक्रिया को तेज और सरल बनाया जाए. साथ ही ट्रिब्यूनलों के चेयरपर्सनों का कार्यकाल अंतरिम रूप से बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए. जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने यह साफ किया कि टीडीसैट में चेयरपर्सन के अभाव में कोई भी तकनीकी सदस्य अकेले आदेश पारित नहीं कर सकता.

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सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को याद दिलाया कि पहले भी एक समान सुधार प्रस्ताव चार सप्ताह में लाने के लिए कहा गया था, और यह साफ किया कि ट्रिब्यूनलों को निष्क्रिय नहीं होने दिया जाएगा. न्यायिक प्रणाली को प्रभावी और जिम्मेदार बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाना सरकार की जिम्मेदारी है.

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