आंखों देखी: Gen-Z के जज्बे की कहानी, उनकी जुबानी, जानें- लखनऊ-प्रयागराज में कैसा था माहौल

देश के अलग-अलग हिस्सों में नीट पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन देखने को मिले. लखनऊ और प्रयागराज में भी छात्रों ने इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

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लखनऊ, प्रयागराज में कैसा था छात्रों का प्रदर्शन (फोटो: ITG) लखनऊ, प्रयागराज में कैसा था छात्रों का प्रदर्शन (फोटो: ITG)

संतोष शर्मा / पंकज श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 27 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:39 PM IST

नीट पेपर लीक मामले में दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए जेन Z आंदोलन ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा करा दिया. जिस BJP सरकार में किसान आंदोलन महीनों चला, किसानों की जान गई फिर भी सरकार नहीं झुकी. उस BJP सरकार में नौजवान युवा पीढ़ी ने आखिर कैसा आंदोलन खड़ा किया कि सरकार को अपने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेना पड़ गया.

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हमने उस जेन Z  जेनरेशन से बात की जो इस आंदोलन का हिस्सा थे. देश के अलग-अलग राज्य में इसे लेकर आंदोलन हुए. कोई प्रयागराज में शामिल हुआ तो किसी ने लखनऊ की सड़कों पर प्रदर्शन किया. वहीं कोई लखनऊ से अपने साथी छात्रों की आवाज बनने के लिए दिल्ली के जंतर मंतर तक पहुंच गया.इस मुद्दे को लेकर लखनऊ में भी प्रदर्शन हुआ. लखनऊ यूनिवर्सिटी से लेकर परिवर्तन चौक तक मार्च निकाला गया, वहीं इको गार्डन धरना स्थल पर पहुंचकर युवा पीढ़ी ने प्रदर्शन किया.

इस प्रदर्शन में शामिल हुए छात्र नेता हिमांशु बाजपेई ने कहा, "हम मिलेनियल हैं लेकिन हम जेन Z को सलाम करते हैं. जेन Z में क्रिएटिविटी, जोश और निडरता है. जिस प्रदर्शन में 40% से ज्यादा लड़कियां हैं, वहां छेड़छाड़ की एक भी घटना सामने नहीं आई. जेन जी बहुत सजग, धर्मनिरपेक्षता को लेकर पतिबद्ध हैं. मुझे इस पीढ़ी पर नाज़ है."

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लखनऊ के आंदोलन में हमने देखा कि इन्हें कोई डर नहीं था, लाठी-बंदूक किसी का इन्हें डर नहीं था. इनकी क्रिएटिविटी की स्पीड बहुत शानदार थी. 

लखनऊ में हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए हर्षित शुक्ला ने कहा, "हम जेन जी ने चाहे दिल्ली हो या लखनऊ जहां भी प्रदर्शन किया, नए तरीके अपनाए. पुराने प्रदर्शन के तरीकों को छोड़ा. कोई पुतला नहीं फूंका, कोई राजनीतिक चेहरा नहीं बनाया. शांतिपूर्ण ढंग से महात्मा गांधी के रास्ते पर चलते हुए हमने यह मार्च किया. बिना किसी जाति, धर्म या पार्टी के भेद के युवा इस प्रदर्शन में शामिल हुए."

इस प्रदर्शन के दौरान युवाओं में अलग ही जोश देखने को मिला. दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए आंदोलन में शामिल हुए गोंडा निवासी जेन जी हिमांशु ने कहा, "मैंने नीट की परीक्षा नहीं दी, लेकिन मेरा छोटा भाई तैयारी कर रहा है. यह पहली बार था कि जिन्हें रीलबाज कहा जा रहा था उन लोगों ने एक इतना बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया. मंच पर किसी बड़े नेता की मौजूदगी के बिना छात्रों का हुजूम उमड़ा. हम जेन जी ने हर तरीके से हर तरह के लोगों तक अपनी बात पहुंचाई. इस आंदोलन में सबने एक-दूसरे का साथ दिया."

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सिर्फ दिल्ली, लखनऊ में नहीं बल्कि प्रयागराज में भी जेन जी ने खूब प्रदर्शन किया. प्रियांशु, आयुष, अनुराग जैसे छात्रों ने कहा, "इस आंदोलन में कई लोग अपने अलग-अलग स्लोगन लिखी तख्तियां पोस्टर्स लेकर आए थे जिसको देखकर कभी हंसी आ रही थी तो कभी कोई मजाक बना रहा था."

जब पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ हुआ तो छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई और इसे उन्होंने अपनी जीत माना. 

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