नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुग्राम के अस्पताल में अपना अनशन खत्म करने की पूरी कहानी बताई है. उन्होंने केंद्र के मंत्रियों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपना वादा तोड़ा है, सोनम वांगचुक ने कहा है कि वे सरकार, विपक्ष और छात्रों के साथ अपना अनशन खत्म करना चाहते थे, लेकिन आधी रात को मंत्रियों के दौरे ने उनके प्लान को खराब कर दिया. सोनम वांगचुक ने 24 जुलाई की रात को धरना तोड़ा था.
सोनम वांगचुक ने इंडिया टुडे टीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि वे खुद अनशन तोड़ने की खबर सबसे पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं की तस्वीरों के साथ जारी करना चाहते थे. लेकिन सरकार के मंत्रियों ने भरोसा तोड़ते हुए पहले ही तस्वीरें जारी कर दी.
सोनम वांगचुक ने उन सवालों का जवाब दिया कि आखिर उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों के हाथों अपना अनशन क्यों तोड़ा?
अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म करने के बाद दिए पहले इंटरव्यू में वांगचुक ने इंडिया टुडे टीवी से कहा कि लद्दाख में इसे जीत का प्रतीक माना जाता है जब आप जिसके खिलाफ प्रदर्शन करते हैं और उसके ही प्रतिनिधि आकर आपसे कहते हैं कि हम आपकी मांग मानते हैं आप धरना खत्म करें. लेकिन लगता है कि यहां बात विपरीत है. ऐसा 1984 में भी हुआ था जब मेरे पिता का धरना खत्म कराने इंदिरा गांधी आईं थीं
केंद्रीय मंत्रियों के पास रखी थी ये शर्ते
उन्होंने आगे कहा कि मैंने सरकार के मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से शर्त रखी थी. ये शर्त थी कि वे धरना तोड़ने को राजी हैं और सूप लेना पसंद करेंगे लेकिन वे ऐसा दूसरे राजनीतिक दलों की मौजूदगी में करेंगे. इसमें छात्र नेता भी होंगे और वे ये पूरा कार्यक्रम एक संयुक्त जमावड़े में करेंगे.
लेकिन आधी रात के लगभग केंद्र सरकार के मंत्रियों के अस्पताल आने से इस प्लान पर पानी फिर गया.
सोनम वांगचुक ने कहा कि इसके बाद उन्होंने दूसरी शर्त रखी. इसके बारे में लोग नहीं जानते हैं, मैं इसे यहां बताना चाहता हूं.
हांफते हुए आए IB के अफसर
वागंचुक ने मंत्रियों से कहा, "ठीक है मैं अपना अनशन तोडूंगा क्योंकि हिंसा की आशंका थी, लेकिन इस खबर को मैं अपने शर्तों के अनुसार ब्रेक करूंगा. मैंने कहा कि अगर मेरे अनशन तोड़ने के दौरान पक्ष और विपक्ष के नेता एक साथ नहीं आ सके तो मैं उनकी तस्वीरों एक साथ लगाकर अपने अनशन तोड़ने की घोषणा करूंगा. ताकि ये संदेश जाए कि मैंने पक्ष-विपक्ष के नेताओं की संयुक्त मौजूदगी में अनशन तोड़ा है."
उन्होंने कहा कि, "सरकार के मंत्री इस पर राजी हो गए. इस दौरान आईबी के सीनियर अधिकारी भी वहां थे. मैंने उन अधिकारियों से कहा कि आप इस समझौते के गवाह हैं. अनशन तोड़ने की खबर कोई मीडिया को कोई जारी नहीं करेगा जब तक मैं इसकी तस्वीरें पक्ष-विपक्ष के नेताओं के साथ जारी न करूं. उन्होंने इस प्रॉमिस को स्वीकार किया. इसलिए मैंने उनके हाथों से सूप लिया. मैं दूसरी पार्टी के नेताओं से भी तस्वीरें लेने की उम्मीद कर रहा था. लेकिन 5 मिनट के अंदर ही IB के सीनियर अफसर हांफते हुए आए और मुझसे कहा- सर मुझे नहीं पता कैसे, लेकिन ये तस्वीरें मीडिया में चल रही हैं. मंत्री अपना फोटोग्राफर लेकर आए थे, लेकिन उन्होंने मुझसे वादा किया था कि वे इसे रिलीज नहीं करेंगे. पर उन्होंने वादा तोड़ दिया. मेरा इन नेताओं से भरोसा टूट चुका है."
सोनम वांगचुक ने कहा कि उनकी पत्नी गीतांजलि कोशिश कर रही थीं कि उनका अनशन समाप्त करने के कार्यक्रम में राहुल गांधी भी आएं. लेकिन कांग्रेस से पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं मिला. राहुल गांधी का धरना बहुत देर से हुआ.
अपशब्दों का प्रयोग सही नहीं
वांगचुक ने यह भी कहा कि वे राजनीतिक नेताओं के खिलाफ अपशब्दों के इस्तेमाल को सही नहीं मानते. लेकिन उन्होंने सरकारों से अपील की कि वे प्रदर्शनकारियों को सजा देने के बजाय, इस तरह के गुस्से के पीछे की वजहों पर ध्यान दें.
उन्होंने यह भी कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शांतिपूर्ण विरोध ज़रूरी है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन निष्पक्ष, अहिंसक और सिस्टम में सुधार पर केंद्रित होने चाहिए. उन्होंने राजनीतिक जुड़ाव के आरोपों को भी खारिज किया, 'कॉकरोच जनता पार्टी' के गैर-राजनीतिक बने रहने के फैसले का बचाव किया और कहा कि उन्हें इस आंदोलन का नेतृत्व करने का कोई पछतावा नहीं है.
लद्दाख में अपने गांव से बात करते हुए वांगचुक ने कहा कि अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म करने के बाद उनकी सेहत में सुधार हो रहा है और विरोध के दौरान घटे 11 किलो वज़न में से 6 किलो वज़न उन्होंने वापस पा लिया है.
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