'भारत में मेरे पास ना जमीन, ना पैसा और ना स्टॉक...', 150 करोड़ की जमीन कब्जाने के आरोपों पर सैम पित्रोदा की सफाई

बीजेपी नेता का आरोप है कि सैम पित्रोदा ने कर्नाटक सरकार के पांच वरिष्ठ अधिकारियों की मदद से बेंगलुरु में अवैध रूप से 12.35 एकड़ की सरकारी जमीन कब्जाई है. इस जमीन की कीमत 150 करोड़ रुपये है.

Advertisement
सैम पित्रोदा सैम पित्रोदा

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 8:58 AM IST

बीजेपी के एक नेता ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा पर बेंगलुरु में 12.35 एकड़ की सरकारी जमीन कब्जाने का आरोप लगाया है. इन आरोपों के बाद अब पित्रोदा ने मामले पर प्रतिक्रिया दी है.

इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने कहा कि उनके पास भारत में ना कोई जमीन है, ना ही घर हैं और ना ही उन्होंने यहां किसी तरह के शेयर खरीद रखे हैं.

Advertisement

बीजेपी नेता एन आर रमेश ने कहा था कि सैम पित्रोदा ने सरकार के पांच वरिष्ठ अधिकारियों की मदद से बेंगलुरु में अवैध रूप से 12.35 एकड़ की सरकारी जमीन कब्जाई है. इस जमीन की कीमत 150 करोड़ रुपये है.

बृहत बेंगलुरु महानगरपालिका (BBMP) के पूर्व पार्षद रमेश ने इस संबंध में ईडी और कर्नाटक लोकायुक्त के पास शिकायत भी दर्ज कराई है. इसके बाद पित्रोदा ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि मीडिया में जिस तरह की रिपोर्ट्स सामने आई हैं, उन पर मैं कहना चाहता हूं कि भारत में मेरे पास ना जमीन है, ना घर है और ना ही शेयर हैं.

पित्रोदा ने कहा कि इसके अलावा 1980 के दशक के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और 2004 से 2014 के बीच डॉ. मनमोहन सिंह के समय में भारत सरकार के साथ काम करने के दौरान मैंने वेतन भी नहीं लिया था.

Advertisement

उन्होंने कहा कि मैंने अपने 83 साल के जीवन में कभी भी भारत में या फिर किसी अन्य मुल्क में ना तो रिश्वत ली है और ना दी है. इसलिए मेरे बारे में जो कहा जा रहा है, वह पूरी तरह से गलत है.

क्या है पूरा मामला?

बीजेपी नेता ने ईडी के समक्ष की गई शिकायत में कहा कि पित्रोदा ने 23 अक्तूबर 1993 को मुंबई में फाउंडेशन फॉर रिवाइटैलाइजेशन ऑफ लोकल हेल्थ ट्रेडिशंस के नाम से एक संस्था रजिस्टर्ड कराई. बीजेपी नेता के मुताबिक, पित्रोदा ने कर्नाटक वन विभाग से मेडिसिन हर्बल प्लांट्स एंड रिसर्च के लिए लीज पर आरक्षित वन क्षेत्र अलॉट करने का अनुरोध किया था. 

उनके अनुरोध पर वन विभाग ने 1996 में उन्हें पांच साल के लीज पर वन विभाग की पांच हेक्टेयर जमीन आवंटित की थी. 2001 में लीज की अवधि खत्म होने पर विभाग ने इसे 10 साल के लिए बढ़ा दिया था.

बीजेपी नेता का दावा है कि दो दिसंबर 2011 को लीज की अवधि समाप्त होने के बाद इसे बढ़ाया नहीं गया. ऐसे में विभाग को 12.35 एकड़ की इस सरकारी जमीन को उनसे रिक्लेम करना चाहिए था. लेकिन बीते 14 साल में ऐसा नहीं किया गाय. बीजेपी नेता ने ईडी से आग्रह किया है कि इस मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला शुरू किया जाए.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »