चंपत का इस्तीफा-कृष्ण मोहन को कमान, विपक्ष पर वार... राम मंदिर ट्रस्ट की प्रेस कॉन्फ्रेंस की 5 बड़ी बातें

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक के बाद महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर करने का ऐलान किया गया. अब पूर्व IFS अधिकारी कृष्ण मोहन को नया अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रस्ट ने चोरी के आरोपों को खारिज करते हुए दान की गई 2800 चीजों की सुरक्षा की पुष्टि भी की.

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राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में कई अहम फैसले हुए. (Photo- ITGF) राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में कई अहम फैसले हुए. (Photo- ITGF)

समर्थ श्रीवास्तव / कुमार अभिषेक / संतोष शर्मा

  • लखनऊ,
  • 06 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:34 PM IST

चढ़ावा चोरी के बाद सोमवार को हुई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है. अब पूर्व IFS अधिकारी कृष्ण मोहन को ट्रस्ट का नया अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है.

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने बताया कि ये बैठक पहले 11 जुलाई को होनी तय हुई थी. लेकिन विवाद को बढ़ता देख इसे समय से पहले, 6 जुलाई को कर लिया गया. 

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ट्रस्ट की बैठक में अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास महाराज, शंकराचार्य महाराज, युग पुरुष परमानंद, पेजावर मठ के विश्व प्रसन्न तीर्थ, नए ट्रस्टी कृष्ण मोहन और अयोध्या के जिला कलेक्टर शशांक त्रिपाठी शामिल हुए थे. कोरम पूरा होने के साथ यह बैठक काफी लंबी चली और इसमें कई बड़े फैसले लिए गए.

1. चोरी की घटना से आहत होकर दिया इस्तीफा

बैठक के बाद स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा, 'हम सभी इस घटना से बेहद आहत और दुखी हैं. चोरी छोटी थी या बड़ी, ये दूसरी बात है. हम असल में इस बात से परेशान हैं कि यहां ऐसा माहौल कैसे बनने दिया गया. लेकिन असलियत हमारे सामने है और इस पर विचार करना हमारा फर्ज है. इसी गहरी चिंता और दुख की वजह से हम तय तारीख से पहले आज यहां जमा हुए.'

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उन्होंने आगे बताया कि मौजूदा हालात को देखते हुए एक गंभीर स्थिति पैदा हो गई थी. हमारे महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने इस्तीफे सौंप दिए थे. चंपत राय महासचिव के रूप में काम कर रहे थे और वो इस पूरी घटना से बहुत आहत थे. उनका मानना था कि जब तक पूर्ण न्याय नहीं हो जाता, यानी अपराधी पकड़े नहीं जाते और उन्हें कड़ी सजा नहीं मिल जाती, तब तक उनका इस पद पर बने रहना सही नहीं है. इसी वजह से उन्होंने अपना इस्तीफा दिया था.

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2. ट्रस्ट के नियमों के तहत मान्य हुआ इस्तीफा

इस्तीफे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर स्वामी गोविंद देव गिरी ने बताया कि ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य के. परासरन ने एक अहम बिंदु उठाया. ट्रस्ट के संविधान के मुताबिक, कोई भी इस्तीफा सौंपे जाने के पल से ही मान्य मान लिया जाता है.

उन्होंने कहा, 'एक बार जब इस्तीफा सौंप दिया गया, तो उसे स्वीकार या अस्वीकार करने का निर्णय हमारे हाथों में नहीं रह गया था. हमें बस इसे स्वीकार करना था. नियमों के मुताबिक उनका इस्तीफा स्वतः मान्य हो गया है. इस मौके पर हमने चंपत राय की दी गई सेवाओं की तारीफ की और उनका आभार जताया. उन्होंने बहुत ही उदार भावना के साथ खुद ये फैसला लिया है.'

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गोविंद गिरी ने कहा, 'उन्होंने (चंपत राय) इतने सालों तक राम मंदिर निर्माण के लिए काम किया है. बिल्कुल शुरुआत से, जब इस परियोजना को लेकर कोई बड़ी गतिविधि भी नहीं थी, तब से लेकर आज तक उन्होंने अपनी सेवाएं दी हैं. हमने उनके पूरे काम और इस परिस्थिति में दिखाई गई उनकी उदारता के सम्मान में उनके इस्तीफे को स्वीकार किया है.'

3. कृष्ण मोहन बनाए गए ट्रस्ट के महासचिव

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने बताया कि भविष्य की जरूरी व्यवस्थाओं की पूरी जिम्मेदारी अब कृष्ण मोहन को सौंप दी गई है, जो अंतरिम महासचिव के तौर पर काम करेंगे. बता दें कि कृष्ण मोहन ने ही राम मंदिर चंदा चोरी मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी. वहीं, ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव उर्फ गोपाल नागरकटे को भी ट्रस्ट से हटा दिया गया है.

ट्रस्ट की बैठक में CEO बनाने के लिए एक कमेटी का भी गठन किया गया है. इस तीन सदस्यीय कमेटी में दो सैन्य अधिकारी और एक रिटायर्ड न्यायाधीश भी शामिल किए गए हैं. इनके नाम- रिटायर्ड जज प्रमोद कोहली, रिटायर्ड ले.जनरल विष्णुकांत और न्यूक्लियर वैज्ञानिक जनरल सुरेश हावड़े हैं.

4. दान की गई सभी 2800 चीजें सुरक्षित

बैठक के दौरान ट्रस्ट ने कीमती उपहारों और चढ़ावे के गायब होने के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया. स्वामी गोविंद देव गिरी ने बताया कि दान की गई सभी चीजें सुरक्षित हैं. उन्होंने कहा, 'ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं कि कई कीमती चढ़ावे और दान की चीजें बिना किसी सुराग के गायब हो गईं. हम इन सभी चीजों का रिकॉर्ड रखने वाला रजिस्टर अपने साथ लाए हैं ताकि आपको दिखा सकें.'

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उन्होंने आगे कहा, 'हम आज आपके सामने इन सभी चीजों की पूरी डिटेल्स पेश कर रहे हैं. हमारे पास एक रजिस्टर है जिसमें ऐसी 2800 चीजों की लिस्ट है और वो सभी पूरी तरह सुरक्षित हैं. जिन पांच विशेष चीजों को लेकर चर्चाएं हो रही थीं, उन्हें हम आज सिर्फ सैंपल के तौर पर दिखाने के लिए लाए हैं.'

गोविंद गिरी ने भरोसा दिलाया कि आगे काम इस तरह से किया जाएगा कि कोई भी व्यक्ति इसमें छोटी सी भी गलती नहीं निकाल पाएगा. इसके लिए एक छोटी समिति बनाई गई है जो विशिष्ट अधिकारियों की नियुक्ति करेगी.

स्वामी गोविंद देव गिरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे कहा, 'हम साफ कर देना चाहते हैं कि चोरी तो चोरी है. इस मामले की जांच इस समय SIT कर रहा है, जो कि प्रशासन की जिम्मेदारी है. हमारी भी पुरजोर मांग है कि अपराधियों और उनके पीछे छिपे सहयोगियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और उन्हें उनके अपराध की कड़ी सजा मिले.'

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SBI की भूमिका पर सवाल उठाते हुए गोविंद गिरी ने कहा, 'SBI को भी अपनी जिम्मेदारी लेने से चूकना नहीं चाहिए. उनकी निगरानी न होने का भी बहुत बड़ा नतीजा हम लोगों को झेलना पड़ा है. वहीं FIR को लेकर उन्होंने कहा, 'मेरी नजर में तो ये FIR भी SBI को ही करनी चाहिए थी, हमारे ट्रस्ट को नहीं करनी चाहिए थी… लेकिन हमारे ट्रस्ट के लोग भूल कर गए.'

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5. विपक्ष पर वार

गोविंद देव गिरि ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, सच्चाई ये है कि जिन लोगों ने कभी राम के बारे में बात नहीं की, कभी उनमें विश्वास नहीं किया, और जिनकी पीढ़ियों ने कभी उनकी पूजा नहीं की, वो अचानक राम भक्त बन गए. जिन लोगों ने कार सेवकों पर गोलियां चलाईं, वो अचानक राम भक्त बन गए और जो लोग जालीदार टोपी पहनते थे, सिर्फ इफ्तार पार्टियों में शामिल हुए और कभी राम के मंदिर में नहीं गए, वो भी उनके दर्शन करने आए. इसका सीधा सा मतलब है कि ये चोर चोरी के आरोपों का इस्तेमाल विरोध का माहौल बनाने के लिए बहाने के रूप में कर रहे हैं.'

उन्होंने आगे कहा कि हिंदुत्व, एक संगठित समाज के विरोध का माहौल बनाना और इस देश में अराजकता पैदा करना. मैं निश्चित रूप से इस तरह की साजिश देखता हूं. मुझे लगता है कि कई लोग अपने स्वार्थ के लिए यहां आए हैं, क्योंकि जिन्हें कभी यहां आते या अनुकूल बात करते नहीं देखा गया, वो अब राम के लिए अपनी भक्ति में इतने अहम हो गए हैं.

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22 जुलाई को होगी अगली बैठक, आएगी SIT की फाइनल रिपोर्ट

अब ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को दोबारा बुलाई गई है. ट्रस्टीज को उम्मीद है कि तब तक SIT की फाइनल और विस्तृत रिपोर्ट भी सामने आ जाएगी. 22 जुलाई की बैठक में इसी रिपोर्ट पर विचार-विमर्श किया जाएगा. इसके साथ ही, उस बैठक में कुछ नए पदाधिकारियों की नियुक्ति, नए ट्रस्टीज का सिलेक्शन और प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति पर भी अंतिम फैसला लिया जाएगा.

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