शुक्रवार को संसद के बाहर कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से एक पत्रकार का सवाल चर्चा में आ गया. पत्रकार ने उनसे हाल ही में हुई हिंसा में घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की मांग को लेकर सवाल किया. इस पर राहुल गांधी ने जवाब दिया, “क्या आप BJP से हैं?”
दरअसल, इससे पहले दिन में घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखी थी. उन्होंने संसद में पुलिसकर्मियों पर हुए हमले और उनके परिवारों को झेलनी पड़ी परेशानियों का मुद्दा भी उठाने की मांग की थी.
इसी संदर्भ में आजतक के पीयूष मिश्रा ने संसद परिसर में प्रवेश करते समय राहुल गांधी से पूछा कि क्या विपक्ष घायल पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की चिंताओं को भी संसद में उठाएगा. राहुल गांधी ने सवाल का सीधा जवाब देने के बजाय पत्रकार से पूछा, “क्या आप BJP से हैं?”
राहुल ने फिर नही दिया जवाब
पीयूष मिश्रा तुरंत स्पष्ट किया कि सवाल किसी राजनीतिक दल की ओर से नहीं, बल्कि घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की ओर से उठाई गई चिंताओं को लेकर है. इस दौरान संसद के मकर द्वार के बाहर विपक्षी सांसद अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी भी वहां विपक्षी सांसदों के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने चले गए. आजतक ने राहुल गांधी को पीछे से दोबारा आवाज देकर सवाल का जवाब मांगने की कोशिश की, लेकिन राहुल गांधी आगे बढ़ गए और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
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बाद में संसद की कार्यवाही स्थगित होने के बाद जब राहुल गांधी संसद भवन से बाहर निकले तो पत्रकार ने एक बार फिर उनसे पूछा कि विपक्ष घायल पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की चिंताओं को संसद में क्यों नहीं उठा रहा है. इस बार भी राहुल गांधी ने सवाल का जवाब नहीं दिया और संसद परिसर से निकल गए.
सवाल सिर्फ राहुल गांधी से नहीं, सियासत से भी
इस पूरे घटनाक्रम का अहम पहलू यह है कि कुछ घंटे पहले ही घायल पुलिसकर्मियों के परिजन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी पीड़ा सामने रख चुके थे. उनका कहना था कि 20 जुलाई की हिंसा को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा में छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई की बात प्रमुखता से हो रही है, लेकिन ड्यूटी के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की स्थिति पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही.
परिजनों ने साफ कहा था कि वे छात्रों को दोषी नहीं ठहरा रहे, लेकिन हिंसा के दौरान पुलिसकर्मियों पर हुए कथित हमलों की भी निष्पक्ष चर्चा होनी चाहिए. ऐसे में पत्रकार का सवाल इसी अपील से जुड़ा था कि क्या संसद में छात्रों के साथ-साथ घायल पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की बात भी उठाई जाएगी?
पीयूष मिश्रा