केरल के वायनाड से सांसद और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं लगातार हो रही हैं, लेकिन सरकार इसमें कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है. साथ ही उन्होंने पीएम मोदी को पूरी तरह युवा विरोधी बताया है.
प्रियंका ने मंगलवार को पेपर लीक पर बोलते हुए कहा कि देखिए, राहुल काफी समय से लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं. ये कोई नया मुद्दा नहीं है. समस्या ये है कि पेपर लीक की घटनाएं बार-बार हो रही हैं, लेकिन इसमें कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती.
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
उन्होंने अपने पुराने अनुभवों को याद करते हुए कहा कि मुझे याद है, जब मैं उत्तर प्रदेश में काम कर रही थी, तब भी पेपर लीक होते थे.एक-दो निचले स्तर के अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया जाता था. दो दिन थाने में रखा जाता था और फिर मामला वहीं खत्म हो जाता था. किसी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
युवा-किसान और गरीब विरोधी हैं पीएम
प्रियंका ने प्रधानमंत्री को युवा विरोधी करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री होने के नाते ये आपकी जिम्मेदारी है, लेकिन न तो सरकार इस मुद्दे पर चर्चा करना चाहती है और न ही विपक्ष को इसे उठाने देती है. ये सदन उन्हीं युवाओं का है, जिन्हें बाहर रोका जा रहा है, जिन पर लाठीचार्ज किया जा रहा है और आंसू गैस छोड़ी जा रही है. हम सब यहां उन्हीं की वजह से बैठे हैं, इसलिए उनकी बात तो सुनिए. बीजेपी और पीएम मोदी पूरी तरह युवा-विरोधी हैं, गरीब-विरोधी और किसान-विरोधी हैं.
इस्तीफा दें मंत्री
उन्होंने कहा कि पिछले बारह सालों से हम देख रहे हैं कि किसान आंदोलन करते हैं तो उन दमन होता है, अब बच्चों का दमन हो रहा है. ये बच्चे हैं, इनकी बात सुन लीजिए. अगर सरकार उनकी बात शांति से सुन ले तो समाधान निकल सकता है. संबंधित मंत्री की जिम्मेदारी बनती है कि वह इस्तीफा दें. एक समय था जब मंत्री जिम्मेदारी लेते थे. मुझे याद है, एक रेल दुर्घटना के बाद तत्कालीन रेल मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया था. आज भी जिम्मेदारी लीजिए, इस्तीफा दीजिए और सबसे जरूरी बात, पूरे सिस्टम को दुरुस्त कीजिए.'
देश के भविष्य का सवाल
उन्होंने पूरे मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि ये मुद्दा इतना गंभीर इसलिए है, क्योंकि ये देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा है. युवा सोच रहे हैं कि उनका भविष्य क्या होगा. उनके माता-पिता कर्ज लेकर, बड़ी मुश्किलों से उन्हें पढ़ाते हैं. छात्र खुद कह रहे हैं कि वह संघर्ष कर रहे हैं और उनके लिए ये सब बेहद मुश्किल है.
कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि मैं कई कोचिंग सेंटरों में गई हूं. हर मां-बाप जानते हैं कि बच्चों की पढ़ाई के दौरान कितना दबाव होता है और परीक्षा के समय कितनी चिंता और तनाव होता है. ये वास्तव में बहुत कठिन परिस्थिति है.
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