आधी रात का सेल्फी वीडियो... Gen Z से उनकी ही भाषा, उनके ही फ्रेम में PM मोदी ने की बात

देर रात के अपने सेल्फी वीडियो में पीएम मोदी ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि पेपर लीक के मामलों में तेज़ी से कानूनी कार्रवाई की जाएगी, फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे और पेपर लीक रोकने के लिए सख़्त कानून लाए जाएंगे.

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प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को जवाबदेही और कार्रवाई का भरोसा दिलाया है. (Photo: ITG) प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को जवाबदेही और कार्रवाई का भरोसा दिलाया है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:25 PM IST

गुरुवार रात 11:52 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सेल्फ़ी वीडियो मैसेज पोस्ट किया. इसमें उन्होंने सीधे छात्रों से बात की और भरोसा दिलाया कि NEET पेपर लीक विवाद के बीच सरकार उनके साथ खड़ी है. उन्होंने माना कि पेपर लीक कोई "मामूली बात नहीं" है और कड़ा कदम उठाने का वादा किया. इसमें शुक्रवार को कैबिनेट का वह फ़ैसला भी शामिल है जिसमें एक प्रस्तावित कानून पर बात होगी; इस कानून में फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के लिए सख़्त सजा का प्रावधान है. 

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यह पहल प्रधानमंत्री के आम तौर पर बातचीत करने के तरीके से अलग थी. किसी सरकारी जगह से टीवी पर भाषण देने के बजाय मोदी ने तीन मिनट से भी कम का एक सेल्फी वीडियो चुना, जो ऐसा लगता था कि खास तौर पर युवा और डिजिटल दुनिया से जुड़े लोगों के लिए बनाया गया था. 

छात्रों को "दोस्तों" कहकर संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "मैं जानता हूं कि पेपर लीक कोई मामूली बात नहीं है. इससे लाखों छात्रों और उनके माता-पिता को बहुत दुख पहुंचा है. इसीलिए पेपर लीक की घटना के बाद से पिछले ढाई महीनों में कई कदम उठाए गए हैं. दोषियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और वे अब जेल में हैं."

इस मैसेज के समय ने भी सबका ध्यान खींचा. प्रधानमंत्री मोदी देर रात वीडियो बयान जारी करने के लिए नहीं जाने जाते हैं. नोटबंदी या ऑपरेशन सिंदूर जैसी अहम घटनाओं के समय भी आधी रात को कोई मैसेज नहीं आया था. लेकिन गुरुवार को उन्होंने रात 11:52 बजे वीडियो पोस्ट किया. एक ऐसा समय जब कई युवा सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं. यह Gen Z से उन प्लैटफ़ॉर्म्स पर जुड़ने की एक सोची-समझी कोशिश थी, जिनका वे अक्सर इस्तेमाल करते हैं. 

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प्रधानमंत्री ने वीडियो में बिल्कुल अलग राजनीतिक अंदाज अपनाया. उन्होंने विपक्ष पर हमला करने या 'देश के भविष्य को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वालों' का जिक्र करने से परहेज किया, जैसा कि वे पहले के भाषणों में करते रहे हैं.

उन्होंने लगभग पूरी तरह से छात्रों की चिंताओं पर ध्यान केंद्रित किया. उन्होंने पेपर लीक से हुई परेशानी को माना, छात्रों को भरोसा दिलाया कि इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों को गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया गया है और इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकार की तत्काल प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र का शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो. 

पीएम मोदी ने कहा, "हमारी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी यह पक्का करना था कि छात्रों का पूरा एकेडमिक साल बर्बाद न हो. इसलिए जितनी जल्दी हो सके परीक्षाएं करवाना ज़रूरी था. सरकार ने कम से कम समय में लगभग 22 लाख छात्रों के लिए परीक्षाएं आयोजित करने के लिए अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल किया. बस पांच या छह दिन पहले 19 तारीख को नतीजे भी घोषित कर दिए गए. पूरे देश में छात्र अपनी सफलता का जश्न मना रहे हैं. लेकिन हम उन लोगों में से नहीं हैं जो सिर्फ़ इतने से ही संतुष्ट हो जाएं." 

प्रशासन की तेज़ी से की गई कार्रवाई को दिखाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने गुरुवार को ही विभागों को परीक्षा से जुड़े अपराधों से निपटने के लिए फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट के प्रावधान तैयार करने का निर्देश दिया था और उसी रात एक ड्राफ़्ट मिल भी गया. उन्होंने कहा, "कल कैबिनेट में इस ड्राफ़्ट पर चर्चा होगी और हम संसद में जल्द से जल्द बिल पास करवाने की पूरी कोशिश करेंगे."

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बातचीत का नया और असरदार तरीका

सीनियर पत्रकार स्मिता प्रकाश ने प्रधानमंत्री के बातचीत के आम तौर पर अपनाए जाने वाले तरीके से हटकर किए गए इस काम पर ध्यान दिया. उन्होंने सेल्फी-मोड वाले वीडियो को "नया और असरदार" बताया क्योंकि यह ज़्यादा लोगों तक पहुंचा. 

उन्होंने X पर लिखा, "आधी रात के बाद पोस्ट किए गए और सेल्फी-मोड में रिकॉर्ड किए गए मैसेज को 1.2 करोड़ बार देखा गया. यह बातचीत के पुराने तरीके से बिल्कुल अलग था. नया और असरदार."

हालांकि इस वीडियो को अबतक लगभग 2.5 करोड़ (25 मिलियन) बार देखा गया, लेकिन इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं भी आईं. कई यूज़र्स ने मांग की कि प्रधानमंत्री शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका और CJP नेताओं के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई के बारे में सीधे बात करें. 

कुछ लोगों ने इसे देर से आया रिएक्शन बताया, जबकि दूसरों का कहना था कि जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों के पास मैसेज पाने के लिए इंटरनेट की सुविधा नहीं है. इंटरनेट पर कई लोगों ने प्रधानमंत्री से वीडियो मैसेज के बजाय प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की मांग की. 

एक ही दिन में छात्रों के लिए प्रधानमंत्री मोदी का यह दूसरा संदेश था जिसमें उन्होंने कार्रवाई का भरोसा फिर से दिलाया. इससे पहले सुबह उन्होंने X पर पोस्ट किया था, "हमारे युवाओं की भलाई और भविष्य से ज़्यादा ज़रूरी कुछ भी नहीं है!"

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छात्रों की उम्मीदों की रक्षा करने, प्रतियोगी परीक्षाओं में भरोसा बहाल करने और ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के नजरिए से सरकार का पक्ष रखकर पीएम मोदी ने Gen Z तक पहुंचने की एक सोची-समझी कोशिश की. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पेपर लीक विवाद के कारण CJP के नेतृत्व में देश भर में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं और सरकार पर दबाव बढ़ गया है. 

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