प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वरिष्ठ मंत्रियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक रविवार शाम को करने वाले हैं. वजह साफ है कि मिडिल ईस्ट में जारी जंग और उसका भारत पर पड़ने वाला असर. बैठक में चार बड़े मुद्दों पर बात होगी - पेट्रोलियम, कच्चा तेल, बिजली और खाद.
बैठक का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश में इन सबकी सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रहे, ढुलाई का तंत्र दुरुस्त रहे और आम आदमी पर कम से कम असर पड़े.
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जंग छिड़ी हुई है. और इस जंग का सबसे बड़ा असर पड़ा है होर्मुज की खाड़ी पर. वो पतला समुद्री रास्ता जिससे दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल और गैस गुजरता है.
ईरान ने इस रास्ते को बंद कर दिया है. सैकड़ों जहाज वहीं लंगर डाले खड़े हैं. तेल की सप्लाई रुकी हुई है. और इसका नतीजा - दुनियाभर में तेल के दाम बढ़ रहे हैं.
भारत को इससे क्या फर्क पड़ता है?
भारत को होर्मुज बंद होने से बहुत फर्क पड़ता है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से मंगाता है. हमारे कई जहाज अभी भी खाड़ी में फंसे हुए हैं. और होर्मुज जितना लंबे समय तक बंद रहेगा उतना ही भारत पर असर बढ़ता जाएगा. इसका सीधा मतलब है कि पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है. खाद्य होगी तो किसान परेशान होंगे. बिजली उत्पादन पर असर पड़ेगा और इन सबका मिलाजुला नतीजा होगा और हर चीज की कीमत बढ़ेगी.
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सरकार क्या कर रही है?
सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है. दुनिया में क्या हो रहा है इस पर लगातार नजर रखी जा रही है. भारत ने कई देशों से तेल मंगाना शुरू कर दिया है ताकि होर्मुज पर निर्भरता कम हो. मंगलुरु बंदरगाह पर रविवार सुबह को अमेरिका से 72,700 टन से ज्यादा रसोई गैस आई है. और अब यह बैठक जो इस बात का संकेत है कि सरकार आगे की तैयारी में जुट गई है.
हिमांशु मिश्रा