असम में बाढ़ की स्थिति के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से फोन पर बात की और राज्य में बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी ली. पीएम मोदी ने असम सरकार को राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए केंद्र की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा दिया. बारिश कम होने के बाद राज्य के ज्यादातर हिस्सों में बाढ़ की स्थिति में मामूली सुधार हुआ है.
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे बाढ़ की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी ली. उन्होंने बाढ़ से हुए नुकसान, जारी राहत कार्यों और जमीन पर आ रही चुनौतियों के बारे में भी पूछा.
सरमा ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को राज्य सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों और बाढ़ प्रभावित हर परिवार तक पहुंचने के प्रयासों की जानकारी दी. प्रधानमंत्री ने जान-माल के नुकसान पर गहरी संवेदना जताई और भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार इस आपदा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है.
बाढ़ से अब तक 62 लोगों की मौत
असम में इस साल बाढ़ के कारण अब तक 62 लोगों की मौत हो चुकी है. राज्य के 9 जिलों में 7.05 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. करीब 856 गांव पानी में डूबे हुए हैं, जबकि 56,606.78 हेक्टेयर फसल क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है. बाढ़ के कारण कई जिलों में तटबंध, सड़कें, पुल और दूसरी बुनियादी सुविधाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं.
केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने शनिवार को शिवसागर जिले के बाढ़ राहत शिविरों का दौरा किया. उन्होंने विस्थापित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं जानीं और अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाएं, भोजन, पीने का साफ पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं लगातार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए.
सोनोवाल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बाढ़ प्रभावित लोगों तक समय पर मदद पहुंचाने के लिए काम कर रही हैं. उन्होंने कहा कि सरकार हर जरूरतमंद परिवार तक राहत और चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है.
इससे पहले सोनोवाल ने डिब्रूगढ़ से असम ओलंपिक संघ के बाढ़ राहत अभियान को भी रवाना किया. इस अभियान के तहत चराइदेव, शिवसागर और जोरहाट जिलों के बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई जाएगी.
सेना की मदद से पहुंचाई जा रही राहत सामग्री
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने देर शाम कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्र की एक टीम असम पहुंच चुकी है. उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति में शनिवार को थोड़ा सुधार हुआ है और प्रशासन शिवसागर और चराइदेव के लगभग सभी गांवों और इलाकों तक पहुंचने में सफल रहा है.
सरमा ने बताया कि जिन इलाकों में प्रशासन पहले नहीं पहुंच पा रहा था, वहां राहत सामग्री पहुंचाने के लिए एयरलिफ्टिंग की जा रही है. इसके अलावा सेना की भी मदद ली जा रही है.
उन्होंने कहा कि मेडिकल और स्वास्थ्य शिविरों का काम भी तेज कर दिया गया है. मुख्यमंत्री ने बताया कि चराइदेव और शिवसागर जिलों में तीन कैबिनेट मंत्री बिमल बोरा, केशब महंत और सुशांत बरगोहेन राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं.
363 राहत शिविरों में रह रहे 1.15 लाख से ज्यादा लोग
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के मुताबिक, राज्य के सात जिलों में 363 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र चलाए जा रहे हैं. इनमें फिलहाल 1,15,205 विस्थापित लोगों को आश्रय दिया गया है. बाढ़ प्रभावित जिलों में चराइदेव, धेमाजी, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, होजाई, जोरहाट, कार्बी आंगलोंग, नगांव और शिवसागर शामिल हैं.
मुख्यमंत्री ने लोगों से बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए नए कपड़े दान करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि पुराने कपड़ों के बजाय नए कपड़े दिए जाएं. साथ ही, बाढ़ में बच्चों की पढ़ाई का सामान नष्ट होने के कारण शैक्षणिक सामग्री और किट दान करने की भी अपील की गई है.
सरमा ने कहा कि राज्य सरकार अगस्त तक बाढ़ से हुए नुकसान का अपना आकलन पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रही है, ताकि जल्द से जल्द प्रभावित लोगों के पुनर्वास का काम शुरू किया जा सके.
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