संसद में नहीं बोल पाएंगे जुमलाजीवी, तानाशाही, निकम्मा और बहरी सरकार... तैयार हुई असंसदीय शब्दों की लंबी-चौड़ी लिस्ट

मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले लोकसभा सचिवालय ने ऐसे शब्दों की सूची तैयार की है, जिसके बोलने पर लोकसभा और राज्यसभा में मनाही होगी. खास बात यह है कि इस लिस्ट में ऐसे कॉमन शब्द शामिल हैं जिनका बोलचाल की आम भाषा में भरपूर इस्तेमाल होता है.

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लोकसभा ने तैयार की असंसदीय शब्दों की सूची लोकसभा ने तैयार की असंसदीय शब्दों की सूची

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 4:53 PM IST
  • गद्दार, गिरगिट, घड़ियाली आंसू संसद में नहीं चलेंगे
  • काला दिन, दंगा, दलाल पर भी रोक
  • असंसदीय शब्दों की लंबीं-चौड़ी सूची

अब अगर संसद की कार्यवाही के दौरान कोई सांसद कहता है कि सरकार 'तानाशाह' हो गई है, अथवा विपक्ष 'तानाशाही' कर रही है. तो संसद के नए नियमों के अनुसार इस संबोधन को असंसदीय माना जाएगा. और इस संबोधन को संसद की कार्यवाही से हटा दिया जाएगा. यही नहीं संसद में अब किसी को जयचंद कहना, विनाश पुरुष शब्द का प्रयोग करना, किसी को खालिस्तानी करार देना, यहां तक कि जुमलाजीवी शब्द से किसी को संबोधित करना भी असंसदीय माना जाएगा. 

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लोकसभा और राज्यसभा में 18 जुलाई से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र में ये नियम लागू हो जाएगा. एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी एक नये बुकलेट में कहा गया है कि 'जुमलाजीवी', 'बाल बुद्धि', 'कोविड स्प्रेडर' और 'स्नूपगेट' जैसे शब्दों को लोकसभा और राज्यसभा में असंसदीय माना जाएगा. लोकसभा सचिवालय द्वारा जिन शब्दों को असंसदीय बताया गया है उनमें कुछ बेहद सामान्य शब्द हैं और बोलचाल के दौरान धडल्ले से प्रयोग किए जाते हैं. इनमें अंग्रेजी के शब्द 'ashamed', 'abused, 'betrayed', 'corrupt', 'drama', 'hypocrisy' और 'incompetent' शामिल हैं. यानी कि संसद की कार्यवाही के दौरान लोकसभा और राज्यसभा में इन शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. 

लोकसभा सचिवालय से अमर्यादित शब्दों की लिस्ट 18 जुलाई से संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले आई है. इस लिस्ट में अंग्रेजी-हिन्दी के कई और शब्द हैं, जैसे- शकुनि, तानाशाह, तानाशाही, जयचंद, विनाश पुरुष, खालिस्तानी, खून से खेती, Anarchist और dictatorial शामिल हैं. इसका अर्थ यह है कि संसद में डिबेट अथवा किसी अन्य मौके पर अगर इन शब्दों का प्रयोग किया जाएगा तो इसे सदन की कार्यवाही से हटा दिया जाएगा.

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लोकसभा सचिवालय ने अपने लिस्ट में कई और शब्दों को शामिल किया है. कई ऐसे शब्दों हैं जिनका सरकार की आलोचना करने के लिए संसद में काफी प्रयोग किया जाता है. दोहरा चरित्र, निकम्मा, नौटंकी, ढिंढोरा पीटना और बहरी सरकार जैसे शब्दों को भी असंसदीय शब्दों की सूची में डाल दिया गया है.

देश में अलग अलग विधानसभाओं में अध्यक्ष द्वारा समय-समय पर कुछ शब्दों और अभिव्यक्तियों को असंसदीय घोषित किया जाता है. इन शब्दों की सूची को  लोकसभा सचिवालय द्वारा संदर्भ के लिए संकलित किया गया है.

हालांकि, राज्यसभा के सभापति और लोकसभा अध्यक्ष के पास इन शब्दों और भावों को सदन की कार्यवाही से हटाने का अंतिम अधिकार होगा. इस सूची में कहा गया है कि कुछ शब्द तब तक अंससदीय मालूम नहीं पड़ते जबतक कि संसदीय कार्यवाही के दौरान इन्हें अन्य संबोधन के साथ मिलाकर नहीं देखा जाता है. 

जिन अंग्रेजी शब्दों को असंसदीय घोषित किया गया है. उनमें. 'bloodshed', 'bloody', 'betrayed', 'ashamed', 'abused', 'cheated, 'chamcha', 'chamchagiri', 'chelas', 'childishness', 'corrupt', 'coward', 'criminal' और 'crocodile tears'शामिल हैं. 

इनके अलावा 'disgrace', 'donkey', 'drama', 'eyewash', 'fudge', 'hooliganism', 'hypocrisy', 'incompetent', 'mislead', 'lie' और 'untrue'का भी अब संसद में बोलने के दौरान इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. 

हिन्दी के कुछ शब्दों को जिन्हें असंसदीय घोषित किया गया है उनमें, गद्दार, गिरगिट, घड़ियाली आंसू, अपमान, असत्य, अहंकार, करप्ट, काला दिन, काला बाजारी और खरीद फरोख्त शामिल है. 

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इसके अलावा दंगा, दलाल, दादागिरी, बेचारा, बॉबकट, लॉलीपॉप, विश्वासघात, संवदेनहीन, मूर्ख, पिट्टठू और सेक्सुअल हॉरसमेंट को भी असंसदीय शब्दों की सूची में शामिल किया गया है और इनका इस्तेमाल सदन में नहीं किया जा सकेगा.  


 

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